पश्चिम बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को संरक्षित करने और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर कोलकाता में उनकी 125 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही उनके पैतृक घर को स्मारक और पुस्तकालय के रूप में विकसित किया जाएगा।
इतिहास में अमिट है डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का योगदान
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल और देश की एकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के समय डॉ. मुखर्जी के प्रयासों के कारण पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा। उनके इसी ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। उन्होंने बताया कि 23 जून को डॉ. मुखर्जी का बलिदान दिवस और 6 जुलाई को उनकी 125वीं जयंती राज्यभर में विशेष कार्यक्रमों के साथ मनाई जाएगी। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराया जाएगा। CM शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं होगी, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रहित, एकता और सेवा के प्रति प्रेरित करने का कार्य करेगी। वहीं, उनके पैतृक घर को स्मारक और पुस्तकालय में परिवर्तित करने की योजना भी उनकी विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पुस्तकालय में उनके जीवन और कार्यों से जुड़ी पुस्तकों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक सामग्री को संग्रहित किया जाएगा।

















