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इमरान पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

पाकिस्तान में इमरान बुरी तरह घिर गए हैं। पंजाब असेंबली के चुनाव में जीत से उनका लहजा क्या बदला कि वे और उनके सहयोगी शहबाज गिल सरकार, सेना और न्यायपालिका के विरुद्ध कुछ ज्यादा बोल गए। गिल को गिरफ्तार कर लिया गया और इमरान पर भी मुकदमा दर्ज हो गया है। फिलहाल उनके सामने आतंकवाद निरोधी अदालत से जमानत लेने का मौका है परंतु पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर के अंत तक उनका अध्याय बंद होने जा रहा

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 3, 2022, 11:01 am IST
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इमरान

इमरान

पाकिस्तान की राजनीति का रंग बदल देने वाली तमाम घटनाएं अक्तूबर से नवंबर के बीच होती रही हैं। पिछले साल 6 अक्तूबर को आईएसआई के नए डायरेक्टर जनरल की नियुक्ति के साथ शुरू हुए विवादों का क्रम अभी तक रुक नहीं पाया है और अगला अक्तूबर एक बार फिर सामने खड़ा है।

 

ऐतिहासिक दृष्टि से ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान की राजनीति में नवंबर का महीना अक्सर बहुत महत्वपूर्ण होता है। आप पाएंगे कि पाकिस्तान की राजनीति का रंग बदल देने वाली तमाम घटनाएं अक्तूबर से नवंबर के बीच होती रही हैं। पिछले साल 6 अक्तूबर को आईएसआई के नए डायरेक्टर जनरल की नियुक्ति के साथ शुरू हुए विवादों का क्रम अभी तक रुक नहीं पाया है और अगला अक्तूबर एक बार फिर सामने खड़ा है।

27 नवंबर को पाकिस्तान सेनाध्यक्ष के जनरल कमर जावेद बाजवा सेवानिवृत्त हो जाएंगे। अटकलें हैं कि उनके कार्यकाल को एक बार फिर साल भर के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके पीछे नवाज शरीफ का गुजरांवाला में दिया गया वह भाषण ध्यान देने योग्य है जिसमें उन्होंने सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा और आईएसआई के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल फैज हमीद को संबोधित करते हुए कहा था कि उन्हें 2018 के चुनाव में की गई चुनावी धांधली का जवाब देना होगा।

उन्होंने आगे यह भी कहा था कि इमरान खान पाकिस्तानी राजनीति में उनकी लाई हुई गंदगी हैं, जिसे स्वयं उन्हें ही साफ करना होगा। जनरल बाजवा के कार्यकाल में संभावित एक साल की बढ़ोतरी इसी गंदगी को साफ करने का समय देना है। जनरल हमीद मार्च के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यदि बाजवा चाहेंगे तो अप्रैल, 2023 में भी त्यागपत्र देकर जा सकते हैं, लेकिन तब तक जनरल हमीद सेवानिवृत्त हो चुके होंगे, जिसका सीधा अर्थ मौजूदा सरकार की आंख का कांटा निकालना है।

इमरान का बदला लहजा
अविश्वास मत के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद इमरान खान ने जिन रैलियों और जलसों का सिलसिला शुरू किया था, वह रुकने का नाम नहीं ले रहा। इस बीच पंजाब में नेशनल असेंबली के 20 रिक्त स्थानों पर हुए चुनाव में इमरान खान की पार्टी ने 15 सीटें जीत ली हैं, जिसके कारण शहबाज शरीफ की सरकार पर नैतिक और राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। पेट्रोलियम पदार्थों और खाद्य पदार्थों की बढ़ती महंगाई से आम जनता में अत्यधिक असंतोष पैदा हो गया है। अपनी लोकप्रियता को बढ़ते देख इमरान खान ने सेना से नए चुनाव करवाकर उन्हें प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग की और इस क्रम में उनका लहजा और शब्दावली कठोरतम होती चली गई। इसमें सेना प्रमुख जनरल बाजवा को गद्दार, मीर सादिक, मिस्टर एक्स जैसे नामों से भी पुकारा गया।

हैरत की बात यह थी कि सेना ने इस सबके बावजूद इमरान खान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन दो हफ्ते पहले पानी उस समय सिर के ऊपर से गुजरा, जब इमरान खान के चीफ आफ स्टाफ शाहबाज गिल ने एक टेलीविजन कार्यक्रम मे सैनिकों और ब्रिगेडियर स्तर से नीचे के अधिकारियों से यह अपील की कि वे अपने अधिकारियों के आदेश न मानें। यह बात सेना को नागवार गुजरी। आनन-फानन में शहबाज गिल पर सेना को विद्रोह के लिए उकसाने की धारा के तहत एफआईआर दर्ज करा दी गई। आपको ज्ञात होगा कि इमरान खान स्वभावत: अपने घर में अपने खर्चे पर किसी के भी भोजन की व्यवस्था नहीं करते। पर शहबाज गिल जैसे ही इमरान के घर से भोजन के लिए बाहर निकले, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत ने उन्हें दो दिन का पुलिस रिमांड दे दिया।

दो दिन बाद पुलिस ने उन्हें न्यायिक हिरासत मे भेज दिया। इस बीच इमरान ने आरोप लगाया कि शहबाज गिल को न सिर्फ शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया है बल्कि उनका अप्राकृतिक यौन शोषण भी किया गया है। अदालत में पूछे जाने पर शहबाज गिल ने इसका खंडन किया लेकिन अदालत के बाहर एक पत्रकार के पूछने पर उन्होंने बिना किसी शिकन के इसकी हामी भर ली। यौन शोषण को लेकर तो बात यहां तक गई कि बोल टीवी चैनल के एक एंकर जमील फारूकी ने अपने यू ट्यूब चैनल पर इसका शाब्दिक चित्रांकन भी कर दिया कि कैसे कुछ मूंछ वाले लोगों ने डंडों से ऐसा करते हुए मिर्च लगे डंडों का प्रयोग किया। इन सज्जन को कराची से गिरफ्तार कर इस्लामाबाद लाया गया है।

इमरान की अभद्र भाषा
अभी यह सब चल ही रहा था कि इमरान ने एक रैली में भाषण देते हुए न सिर्फ इस्लामाबाद पुलिस के आईजी और डीआईजी को धमकी दी कि वे उन पर शहबाज गिल को गिरफ्तार करने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे बल्कि उन्होंने उस महिला जज जेबा चौधरी को भी धमकी दी कि वे भी अपने खिलाफ कार्रवाई लिए तैयार रहें। बस, फिर क्या था। अगले ही दिन इमरान खान पर आतंकियों पर लगने वाली धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया और पुलिस उन्हें तलाशने लगी।

इमरान का पता नहीं लग रहा था। ऐसा लग रहा था कि सरकार उन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहती बल्कि उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर थकाना चाहती है। अदालत ने इमरान को 25 अगस्त तक की जमानत दी है ताकि वे आतंकियों के लिए बनी अदालत से अपनी जमानत करवा लें। ऐसा प्रतीत होता है, सेना ने तय कर लिया है कि अब इमरान खान को और छूट नहीं दी जाएगी। पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर का अंत होते-होते इमरान का अध्याय बंद होने जा रहा है। इमरान के इस भाषण के तुरंत बाद पेमरा (पाकिस्तान में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को नियंत्रित करने वाली संस्था) ने उनके भाषणों के सीधे प्रसारण पर रोक लगा दी ताकि इन भाषणों की अभद्र भाषा को रोका जा सके।

पर यह घटनाक्रम इतनी तेजी से चला कि राजनीतिक दलों को अपनी प्रतिक्रिया सोच-समझकर कर देने का समय ही नहीं मिला। उन्हें यह डर भी था कि यदि इमरान को गिरफ्तार किया गया तो उन्हें इसका राजनीतिक खामियाजा न भुगतना पड़े। लेकिन अब सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल सभी 13 दलों ने यह तय कर लिया है कि जरूरत पड़ने पर इमरान को गिरफ्तार किया जाएगा।

इस बीच इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने इमरान के एक महिला जज को धमकी देने की घटना को अदालत की अवमानना मानते हुए उन पर मानहानि का मुकदमा चलाने का फैसला करते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा है। देखें, इस मामले में ऊंट किस करवट बैठता है।

तालिबान का नियंत्रण
इस बीच सिंध और पंजाब के तमाम इलाकों में बाढ़ आई हुई है। भारत द्वारा छोड़ा गया पानी पंजाब में तबाही मचा रहा है। तमाम बलूचिस्तान पानी में डूब गया है। अफगानिस्तान सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा में तालिबान आ चुके हैं और तमाम राजनीति को से हफ्ता वसूली कर रहे हैं। इसमें पाकिस्तान सरकार में स्पीकर रहे असद कैसर भी शामिल हैं।

पेशावर के कोर कमांडर जनरल फैज हमीद को पेशावर से बहावलपुर भेज दिया गया है। माना जाता है कि सेना वहां पर उनके किए गए काम से खुश नहीं थी। याद रहे कि पाकिस्तान में एक कोर कमांडर को सामान्य रूप से तीन साल के लिए तैनात किया जाता है लेकिन जनरल फैज हमीद को मात्र आठ माह में ही बदल दिया गया। माना जा रहा है कि तालिबान के साथ सेना का जो समझौता हुआ, उसमें मूल भूमिका जनरल फैज हमीद की ही थी। इस समझौते के तहत खैबर पख्तूनख्वा के इलाके से साठ प्रतिशत सेना को हटा लिया गया है और वहां तैनात बाकी सेना बैरकों में वापस चली गई है। यही हाल अर्धसैनिक बलों का है। राज्य में तालिबान का नियंत्रण लगभग पूरा हो चुका है।

आर्थिक बदहाली
उधर आईएमएफ से मिलने वाला कर्ज स्वीकृत हो चुका है और देखना होगा कि इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कितनी बेहतर होती है। डॉलर के दाम घटे जरूर हैं, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि अर्थव्यवस्था के पहियों और आयात को रोक दिया गया है,  स्टेट बैंक आफ पाकिस्तान ने लगभग तीन अरब डॉलर की एलसी को भुगतान को रोक रखा है, जिसके चलते डॉलर के दाम गिरना स्वाभाविक है। अब जब कि आईएमएफ की शर्तों के तहत आयात को फिर खोल दिया गया है, इतना तय है कि डॉलर के दाम दोबारा ऊपर जाएंगे। याद रहे, जब किसी देश की अर्थव्यवस्था टूटती है तो उसकी भौगोलिक सीमाओं को टूटते देर नहीं लगती।

Topics: इस्लामाबाद पुलिसआईजी और डीआईजीइमरान पर लटकी गिरफ्तारी की तलवारइमरान की अभद्र भाषापाकिस्तान सेनाध्यक्ष के जनरलकमर जावेद बाजवा
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