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जानिये कहां से लिया गया है ‘आईएनएस विक्रांत’ का आदर्श वाक्य और क्या है इसका अर्थ

नौसेना के मुताबिक विक्रांत का करीब 76 फीसदी हिस्सा देश में मौजूद संसाधनों से ही निर्मित हुआ है और यह भारत में बना सबसे बड़ा युद्धपोत है।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 3, 2022, 09:38 am IST
in भारत, रक्षा
भारत का गौरव आईएनएस विक्रांत

भारत का गौरव आईएनएस विक्रांत

भारत का पहला स्वदेशी और अत्याधुनिक स्वचालित यंत्रों से युक्त युद्धपोत ‘आईएनएस विक्रांत’ भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल हो गया है। इसके साथ ही अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और इंग्लैंड के बाद भारत विश्व का छठा ऐसा देश बन गया है, जो 40 हजार टन का भारी-भरकम और विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की क्षमता रखता है। भारत ने दो विमानवाहक पोत ‘एचएमएस हरक्यूलीस’ (आईएनएस विक्रांत-1) तथा ‘एचएमएस हर्मीस’ (आईएनएस विराट) ब्रिटेन से खरीदे थे जबकि रूस से सोवियत काल का युद्धपोत ‘एडमिरल गोर्शकोव’ (आईएनएस विक्रमादित्य) खरीदा था, जो अभी भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े का हिस्सा है।

नौसेना के मुताबिक विक्रांत का करीब 76 फीसदी हिस्सा देश में मौजूद संसाधनों से ही निर्मित हुआ है और यह भारत में बना सबसे बड़ा युद्धपोत है।

आईएनएस विक्रांत का आदर्श वाक्य को सुनकर हम सभी को गर्व होगा। इसका आदर्श वाक्य है ‘जयेम सम युधि स्पृधा’ ऋग्वेद से लिया गया है, जिसका अर्थ है, यदि कोई मुझसे लड़ने आया तो मैं उसे परास्त करके रहूंगा।

इसलिए विक्रांत नाम रखा

विक्रांत का अर्थ है विजयी एवं वीर। भारत में बने पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत का नाम ‘आईएनएस विक्रांत’ ही इसीलिए रखा गया है क्योंकि इससे पहले ब्रिटेन से खरीदे गए भारत के पहले विमानवाहक पोत ‘एचएमएस हरक्यूलीस’ का नाम ‘आईएनएस विक्रांत’ ही रखा गया था, जिसने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर विजय में अहम भूमिका के अलावा 1997 में सेवा से बाहर किए जाने से पहले विभिन्न अवसरों पर पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय नौसेना को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाई थी। उसी के प्रति प्यार और गौरव की भावना प्रदर्शित करने के लिए स्वदेशी विमानवाहक पोत का नाम ‘आईएनएस विक्रांत’ रखा गया है।

ये है विशेषता

आईएनएस विक्रांत की अधिकतम गति 28 नॉट्स (51 किलोमीटर प्रतिघंटा) तक है, जो समुद्र में उसकी असली ताकत है जबकि इसकी सामान्य गति 18 नॉट्स यानी करीब 33 किलोमीटर प्रतिघंटा है। एक बार में यह युद्धपोत 7500 नॉटिकल मील यानी 13 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तय कर सकता है अर्थात् एक बार में भारत से निकलकर यह ब्राजील तक पहुंच सकता है और इस पर तैनात फाइटर जेट्स भी एक से दो हजार मील की दूरी तय कर सकते हैं। यह युद्धपोत एक बार में 30 एयरक्राफ्ट को ले जा सकता है, जिनमें मिग-29के फाइटर जेट्स के अलावा कामोव-31 अर्ली वॉर्निंग हेलीकॉप्टर, एमएच-60आर सीहॉक मल्टीरोल हेलीकॉप्टर तथा एचएएल द्वारा निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। नौसेना के लिए भारत में ही निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘एलसीए तेजस’ भी इस विमानवाहक युद्धपोत से आसानी से उड़ान भर सकते हैं। आईएनएस विक्रांत की विमानों को ले जाने की क्षमता और इसमें लगे अत्याधुनिक और खतरनाक हथियार इसे दुनिया के कुछ खतरनाक पोतों में शामिल करते हैं। यही कारण है कि आईएनएस विक्रांत को भारतीय सेना की शान और नए भारत का अभिमान माना जा रहा है।

Topics: युद्धपोत आईएनएस विक्रांतभारतीय नौसेनाइंडियन नेवीआदर्श वाक्य
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