डॉ. मुखर्जी ने बंगाली हिंदुओं को बचाया जिहादियों के जबड़े से
July 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

डॉ. मुखर्जी ने बंगाली हिंदुओं को बचाया जिहादियों के जबड़े से

स्वतंत्रता के समय मुस्लिम लीग मुसलमानों की अधिक संख्या के आधार पर संपूर्ण बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने की साजिश रच रहा था। उस वक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आगे बढ़े और बंगाल की समस्त हिंदू जनता को जाग्रत और एकजुट किया जिसके परिणामस्वरूप एकीकृत बंगाल का विभाजन हुआ और पश्चिम बंगाल के रूप में हिंदू बंगालियों के हितों का संरक्षण हो सका।

Written byशुभेन्दु शेखर अवस्थीशुभेन्दु शेखर अवस्थी
Jul 6, 2022, 12:16 pm IST
in विश्लेषण
श्यामा प्रसाद मुखर्जी

श्यामा प्रसाद मुखर्जी

मुस्लिम लीग द्वारा सांप्रदायिक आधार पर सम्पूर्ण बंगाल प्रांत को हड़पने की साज़िश के विरुद्ध बंगाल के विभाजन की सबसे मुखर मांग श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने की। उनकी यह अहम भूमिका एक बलिदानी की तरह थी जिसने बंगाली हिंदुओं को ‘अलग बंग मातृभूमि’ की प्राप्ति के लिए प्रेरित किया और इस मांग के माध्यम से अविभाजित बंगाल में हिन्दुओं के हितों की रक्षा का नेतृत्व किया। आज पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है, उसका मुख्य श्रेय श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को दिया जाता है ।

संयुक्त भारत के भीतर एक अलग पश्चिम बंगाल की मांग को मुखर्जी द्वारा 1946 के अंत में ‘बंगाल विभाजन लीग’ के गठन के द्वारा आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने सवर्णों से लेकर और निम्न वर्ग तक, ग्रामीणों से किसानों तक और बंगाली हिंदू समाज के सभी वर्गों का समर्थन हासिल किया। उनके साथ क्रांतिकारी नेता उपेंद्रनाथ बनर्जी और किसान संगठनकर्ता हेमंत कुमार सरकार रहे और सभी बंगाली हिन्दुओं के साथ बैठकें कीं। उन्होंने विभिन्न जाति, वर्ग या विचार के सभी हिन्दुओं के सामाजिक वर्गों का संगठन किया जो बंगाल के विभाजन को चाहते थे। उस समय के बंगाल प्रांतीय हिंदू महासभा के नेता निर्मल चंद्र चटर्जी ने एक अलग पश्चिम बंगाल की मांग की थी और उन्होंने श्यामाप्रसाद मुखर्जी से प्रभावित होकर कहा :

“बंगाली हिंदू राष्ट्रवाद को बनाए रखना, बंगाली हिंदू लोगों के लिए एक अलग मातृभूमि बनाना और इसे भारत के भीतर एक प्रांत के रूप में बनाना और बंगाली संस्कृति और विरासत को संरक्षित करना ही हमारा उद्देश्य है।“ उन्होंने यह भी कहा कि यह विभाजन बंगाली हिंदुओं के लिए ‘जीवन या मृत्यु’ का सवाल है। 5 अप्रैल 1947 को मुखर्जी की अध्यक्षता में तारकेश्वर में बंगाल प्रांतीय हिंदू सम्मेलन हुआ और उसमें सूर्य कुमार बोस और सनत कुमार रे चौधरी जैसे हिंदू महासभा के नेताओं ने भाग लिया। इसमें भारत के भीतर एक ‘अलग बंगाली हिंदू मातृभूमि’ बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इस सम्मेलन में मुखर्जी को प्रांत के विभाजन की निगरानी के लिए एक परिषद का गठन करने के लिए अधिकृत किया गया। इस उद्देश्य के लिए एक लाख स्वयंसेवकों को नामांकित किया गया था।

प्रांत के विभाजन की मांग को और तेज करने में बंगाल प्रदेश कांग्रेस द्वारा निभाई गई भूमिका भी उल्लेखनीय थी। प्रांतीय कार्यसमिति ने बंगाल के विभाजन की मांग पर आधिकारिक मुहर लगाते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया था। बैठक में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, क्षितिज चंद्र नियोगी, डॉ. बिधान चंद्र रॉय, नलिनी रंजन सरकार, डॉ. प्रमथ नाथ बनर्जी, देवेंद्रलाल खा, माखनलाल सेन, अतुल चंद्र गुप्ता और अन्य शामिल थे। हिंदू महासभा और कांग्रेस, दोनों द्वारा प्रांत के विभाजन पर सहमति के साथ, पूरे बंगाल में 76 बंग विभाजन समर्थक बैठकें हुईं। उनमें से 59 कांग्रेस द्वारा; 19 महासभा द्वारा और पांच संयुक्त रूप से बुलाई गई थीं।

मुखर्जी ने स्पष्ट किया था कि बंगाल का विभाजन किसी भी तरह से भारत के विभाजन से संबंधित नहीं था। 22 अप्रैल 1947 को, नई दिल्ली में एक रैली में, उन्होंने घोषणा की कि अगर मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन योजना (जिसमें भारत के विभाजन का उल्लेख नहीं किया) को स्वीकार कर लिया, तो भी बंगाली हिंदुओं के लिए एक अलग प्रांत का गठन करने की आवश्यकता है। पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने के कड़े विरोध में, मुखर्जी ने 23 अप्रैल को 1947 को एक आम हड़ताल का आह्वान किया, जिसे कम्युनिस्ट पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और कलकत्ता ट्राम वर्कर्स यूनियन के कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन दिया था।

कम्युनिस्ट कार्यकर्ता और शिक्षाविद् डॉ. कल्याण दत्ता लिखते हैं कि मुस्लिम लीग के प्रस्तावों के प्रति हिंदू कम्युनिस्टों की उदासीनता 1946 में थी परन्तु कलकत्ता हत्याओं के बाद कम्युनिस्टों ने भी इन मांगों से सहमति दिखाई। उदाहरणार्थ जब किद्दरपुर डॉक के मुस्लिम कम्युनिस्ट, जो मुस्लिम लीग के रैंक में शामिल हो गए थे और लाल कार्ड रखने वाले कम्युनिस्ट हिंदू की हत्या करने लगे। इस तत्कालीन माहौल ने कम्युनिस्टों और समाजवादियों के बड़े हिस्से को विभाजन समर्थक पक्ष में खींच लिया।

बंगाल के विभाजन में अनुसूचित जाति के नेताओं की भूमिका काबिलेतारीफ थी। मटुआ महासंघ के प्रमुख प्रमथ रंजन ठाकुर, बंगाल प्रांतीय डिप्रेस्ड क्लासेज लीग के सचिव आर. दास और बंगाल के पूर्व मंत्री प्रेमहारी बर्मन प्रमुख थे। डिप्रेस्ड क्लासेस लीग और डिप्रेस्ड क्लासेस एसोसिएशन, दो प्रमुख समूह थे और दोनों इस विभाजन के पक्ष में थे।

फिर नोआखली नरसंहार हुआ जिसमें सबसे ज्यादा पीड़ित निचली जाति के नमःशूद्र किसान और मछुआरे थे और फिर उन्होंने भी मांग की कि क्षेत्र खुलना, जेसोर, बकरगंज और फरीदपुर जिलों को पश्चिम बंगाल में ही रखा जाए। उन्होंने संयुक्त रूप से घोषणा की कि पाकिस्तान में अनुसूचित जाति के क्षेत्रों को शामिल करने की मांग में जोगेंद्र नाथ मंडल के विचार बहुमत की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। मंडल को छोड़कर सभी प्रमुख अनुसूचित जाति के नेताओं ने एक अलग बंगाली हिंदू प्रांत हासिल करने में कांग्रेस और हिंदू महासभा के विचार का समर्थन किया।

बंगाल के सभी प्रतिष्ठित हस्तियों ने पश्चिम बंगाल के निर्माण का समर्थन किया। प्रमुख नामों में बर्धमान के महाराजा उदय चंद महताब और कोसिमबाजार के महाराजा श्रीशचंद्र नंदी सहित जमींदारों ने मार्च में अपने वार्षिक सम्मेलन में प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें बंगाल के हिंदू-बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक प्रांत के गठन को मंजूरी दी गई थी। ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन ने भी मुखर्जी का समर्थन किया। पीएन सिन्हा रे, महाराजा प्रबेंद्र मोहन टैगोर, महाराजा सीतांगशुकांत आचार्य चौधरी, अमूल्यधन अध्या और अमरेंद्र नारायण रॉय ने भी इस कदम का समर्थन किया।

बंगाल के विभाजन का समर्थन करने वाले प्रख्यात बंगाली बुद्धिजीवियों में, भौतिक विज्ञानी डॉ मेघनाद साहा, भाषाविद् डॉ सुनीति कुमार चटर्जी और इतिहासकार जदुनाथ सरकार और डॉ रमेश चंद्र मजूमदार, नलिनाक्ष्य सान्याल, मेजर जनरल एसी चटर्जी, जादाब पांजा का उल्लेख किया जाना चाहिए। उपेंद्रनाथ बनर्जी, डॉ शिशिर कुमार बनर्जी, सुबोध चंद्र मित्रा और शैलेंद्र कुमार घोष जैसे प्रमुख लोगों ने भी बंगाल विभाजन के पक्ष में अपना मत दिया।

बंगाल का विभाजन और पश्चिम बंगाल का निर्माण

लॉर्ड माउंटबेटन भारत के विभाजन की प्रक्रिया को देख रहे थे। 3 जून 1947 को, माउंटबेटन एक योजना लेकर आए जिसके अनुसार अविभाजित बंगाल और अभिवाजित पंजाब की विधानसभाओं के हिंदू-बहुल और मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों से चुने गए विधायक दोनों प्रांतों के भाग्य का निर्धारण करने के लिए मिलेंगे। तदनुसार, 20 जून 1947 को बंगाल प्रांतीय विधानमंडल की बैठक हुई। 1946 के प्रांतीय चुनावों ने बंगाल में मुस्लिम लीग को शानदार बहुमत दिया था, इसलिए मुस्लिम लीग के लिए पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल नहीं था। बंगाल विधानसभा ने अपने संयुक्त सत्र में 120-90 मतों से निर्णय लिया कि उसे पाकिस्तान में शामिल होना है।

बाद में फिर से हिंदू-बहुल पश्चिमी बंगाल के विधायक अलग से मिले और 58-21 मतों से निर्णय लिया कि बंगाल प्रांत का विभाजन किया जाना चाहिए और पश्चिम बंगाल को भारत की संविधान सभा में शामिल होना चाहिए। विभाजन के खिलाफ मतदान करने वाले सभी 21 विधायक आस्था से मुस्लिम थे और मुस्लिम लीग का प्रतिनिधित्व करते थे। विभाजन के पक्ष में मतदान करने वाले 58 विधायक ज्यादातर कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी और हिंदू महासभा के थे। ज़मींदारों और श्रमिक प्रतिनिधियों एवं ईसाई विधायकों ने भी कांग्रेस और अन्य दलों के साथ विभाजन के पक्ष में मतदान किया।

बाद में, पूर्वी बंगाल के विधायकों की एक और बैठक में, 107-34 मतों से यह निर्णय लिया गया कि विभाजन की स्थिति में, पूर्वी बंगाल को पाकिस्तान में शामिल चाहिए। इसके बाद, पश्चिम बंगाल के गठन के साथ, एकीकृत बंगाली हिंदू संघर्ष का एक गौरवशाली इतिहास बना जिसमें मुख्य भूमिका श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की रही। मुस्लिम लीग के पूर्ण बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने के मंसूबों और एक उन्मादी प्रान्त के मसौदे को पश्चिम बंगाल बनाकर और भारत में विलय कर ध्वस्त कर दिया गया।

इससे पता चलता है किस तरह श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा बंगाल प्रांत में जातीय-धार्मिक अल्पसंख्यक होने के बावजूद, पक्षपाती इस्लामी राज्य मशीनरी के सामने बंगाली हिंदू लोगों के दृढ़ संकल्प का आन्दोलन किया जिसने उन्हें अपने भविष्य को भारतीय राजनीति के भाग्य से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

विभाजन में भेदभाव

हालांकि, रैडक्लिफ के विभाजन ने बंगाली हिंदुओं को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं किया, क्योंकि खुलना के हिंदू-बहुल जिले और बौद्ध-बहुल चटगांव हिल ट्रैक्ट्स को पाकिस्तान में धकेल दिया गया था। प्रारंभ में 55 प्रतिशत का वादा किया गया था, पश्चिम बंगाल को तत्कालीन एकीकृत बंगाल की भूमि का केवल 36 प्रतिशत ही उनकी मातृभूमि के रूप में प्राप्त हुआ। 1947 में पश्चिम बंगाल की कुल आबादी का 16 प्रतिशत मुस्लिम, भारत में ही रहे, जबकि पूर्वी बंगाल में हिंदुओं की संख्या दोगुनी थी – लगभग 30 प्रतिशत।

मुख्य रूप से फरीदपुर और बकरगंज के हिंदू क्षेत्रों को पाकिस्तान में छोड़ दिया गया था, जबकि मुर्शिदाबाद के मुस्लिम बहुल जिले को विशुद्ध रूप से रणनीतिक और व्यावसायिक तर्ज पर पश्चिम बंगाल में स्थानांतरित कर दिया गया था। वैसे भी, विभाजन के पक्ष में बंगाली भावना को साहित्यकार विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के शब्दों से सबसे अच्छा सारांशित किया जा सकता है: अच्छा हुआ कि बंगाल का विभाजन हो गया। बंगाली हिंदू राहत की सांस लेंगे। (25 जून 1947)

बंगाल के विभाजन में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मंशा उनके 19 मार्च 1947 के भाषण से स्पष्ट थी जहां उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के लिए बंगाली हिंदू संघर्ष एक संयुक्त भारत के भीतर बंगाल में बहुलवाद, लोकतंत्र और स्वतंत्र सोच को बनाए रखने के लिए था। बंगाली हिंदू को ‘सांप्रदायिक उन्माद’  के जबड़े से बचाएं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान में पूरे बंगाल को शामिल करने के लिए प्रयास किए गए, तो बंगाली हिंदू इस्लामिक बंगाल से जमीन का एक टुकड़ा छीनने में संकोच नहीं करेंगे, और लोकतंत्र का शासन स्थापित करेंगे और उचित रखरखाव के लिए संस्थानों को बढ़ावा देंगे।

उन्होंने उस समय भारत में प्रचलित ऐसी सभी ताकतों को बंगाली हिंदू समर्थन भी दिया, जो हर तरह से, अखंड हिंदुस्तान की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए तैयार रहेंगी। यह लेख वामपंथी कहानी को चकनाचूर करने का प्रयास करता है और इस तथ्य को स्थापित करता है कि मुखर्जी को इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों के कपटी मंसूबों से बंगाल के एक तिहाई हिस्से को छीनने और उस हिस्से को भारत के साथ जोड़ने का श्रेय दिया जा सकता है।

उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि जहां 1905 का विभाजन बंगाली हिंदू राष्ट्रवाद की डोर को तोड़ने के उद्देश्य से एक औपनिवेशिक उपकरण था, वहीं 1947 का विभाजन बंगाली और भारतीय राष्ट्रवाद की ताकतों को मुस्लिम लीग की सांप्रदायिकता की चपेट में आने से बचाने के लिए एक बहुत ही आवश्यक पहल थी। भारत की संसद ने 12 दिसंबर 2019 को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पारित किया। नए संशोधित कानून ने तीन पड़ोसी देशों: पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से कई भारतीय धर्मों से संबंधित शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिकता का मार्ग प्रदान किया है।

पहली बार, केंद्र की किसी सरकार ने देश के धड़ से विभाजन के अवशेषों को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे यह स्वीकार किया गया है कि विभाजन एक दुखद वास्तविकता थी जो पूर्वी सीमांत में भी हुई थी। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत में हिंदू, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों की आमद का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि भारत की स्वतंत्रता।

ढाका विश्वविद्यालय के जनसांख्यिकीविद् अबुल बरकत के अनुसार, 1971 और 2013 के बीच, बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव के परिणामस्वरूप 1.13 करोड़ से कम हिंदू भारत भाग गए। इस दर पर, उन्हें संदेह है कि 2030 के बाद बांग्लादेश में कोई हिंदू नहीं बचेगा। 1947 की घटना किसी भी तरह से राजनीतिक या नागरिक अधिकारों के लिए एक साधारण संघर्ष नहीं थी। अपनी संस्कृति, परंपरा, धर्म, भाषा और लिपि की रक्षा के सामूहिक मिशन में बंगाली हिंदुओं का यह एक क्षणिक प्रयास था।

एक संक्षिप्त अवधि के लिए, ‘गांधीवादी’, ‘क्रांतिकारी’, ‘समाजवादी’ या ‘कम्युनिस्ट’ की राजनीतिक रूप से आरोपित पहचानों को कालीन के नीचे दबा दिया गया और केवल ‘बंगाली हिंदू’ होने की पहचान के तहत एकजुट किया गया। इस्लामवादी प्रशासन की ज्यादतियों के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने वाले उन उच्च विचारों वाले व्यक्तियों को इस वास्तविकता का यकीन था कि अगर बंगाल का विभाजन नहीं हुआ होता, तो यह बंगाल की आत्मा से हिंदू भावना का आसन्न क्षरण होता। बंगाल का विभाजन ही एकमात्र विकल्प था जो बंगाली हिंदुओं की अगली पीढ़ियों को पूर्ण विनाश से बचा सकता था।

(लेखक भाजपा के दिल्ली प्रदेश के प्रवक्ता हैं) 

Topics: बंगाली हिंदूSyama Prasad MookerjeeArticles on Shyama Prasad MookerjeeBengali HinduContribution of Shyama Prasad Mookerjeeश्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदानश्यामा प्रसाद मुखर्जीश्यामा प्रसाद मुखर्जी पर लेख
Share23TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रयासों से पूर्वी पाकिस्तान में जाने से बचा पश्चिम बंगाल (खंड-4)

Shyama Prasad mukharjee

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कैसे रोका बंगाल में सांप्रदायिक अन्याय ? (खंड-3)

अमित शाह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री

अमित शाह ने बंगाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा की रखी आधारशिला, कहा-‘सोनार बांग्ला’ बनाना भाजपा सरकार का संकल्प

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और बंगाल में हिंदू एकता का उदय (खंड-2)

अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती : दो वर्षीय आधिकारिक समारोह का होगा शुभारंभ, अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान : नेहरू की भूमिका, मौत के पीछे की साजिश, मां का पत्र और बेटी का रहस्योद्घाटन

Load More

ताज़ा समाचार

Explainer। मेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश ‘नमो भारत कॉरिडोर’ को समझिये, दिल्ली से 180 मिनट में गंगा स्नान…

फेक न्यूज और भ्रम की दुनिया से बचना है तो पढ़ें आज का श्लोक

Uttarakhand Voter List 2026 Draft Publication CEO BVRC Purushottam Election Commission Camp

उत्तराखंड में SIR का प्रथम चरण पूरा: 19 लाख वोटरों के डेटा में मिली गड़बड़ी, जानिए कैसे सुधारें अपना नाम!

Punjab Terror Module ISI Drone Dropped Weapons AK 47 LMG Seized Amritsar Rural Police Delhi Threat

Punjab Terror Module: स्वतंत्रता दिवस से पहले ISI की बड़ी साजिश नाकाम! 2 AK-47, 2 LMG राइफलों और बमों के साथ 3 गिरफ्तार

Punjab Drug Bust Amritsar Counter Intelligence Seizes Heroin DGP Gaurav Yadav Pakistan Border Smuggling

पंजाब में सीमापार तस्करी नेटवर्क ध्वस्त! ₹210 करोड़ की 30 KG हेरोइन के साथ 2 तस्कर गिरफ्तार, विदेशी हैंडलर से जुड़े तार

UP Education Services Selection Commission Prayagraj

यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने PGT, TET और अन्य परीक्षाओं को लेकर जारी की चेतावनी

Jagannath Rath Yatra Significance Darubrahma Puri Temple King Indradyumna

पुरी रथयात्रा विशेष: भारत की सनातन आस्था का महामहोत्सव है जगन्नाथ स्वामी का रथयात्रा उत्सव

India on PoJK Pakistan Human Rights Violations External Affairs Ministry New Delhi Global Community

पीओजेके को लेकर भारत सख्त, कहा- ‘PoJK में कुकृत्यों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए अंतरराष्ट्रीय समुदाय’

International Court Credibility ICJ ICC Bias Debate Global Justice System National Sovereignty Marco Rubio

क्या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय भी जवाबदेही से ऊपर हैं? अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर छिड़ी बड़ी बहस!

Afghan Makeup Trend Viral Video Reels Instagram Women Burqa Protest Social Media

क्या है अफ़गान मेकअप ट्रेंड? और क्यों हो रहा है वायरल? बुर्के के पीछे छिपा है ये हैरान करने वाला सच!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies