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होम भारत

रिश्तों में बनी रहेगी मिठास

भारत और नेपाल के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल रही है। इस बार नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा के तीन दिवसीय दौरे पर यह साफ दिखा। दोनों देशों ने विवाद के मुद्दों को संवाद के जरिये हल करने की प्रतिबद्धता दिखाई। वहीं, भारत ने दिल खोलकर नेपाल के विकास में सहयोग की पहल की है

Written byपंकज झापंकज झा
Apr 13, 2022, 04:35 pm IST
in भारत, विश्व
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया तो स्वागत भाषण की शुरुआत नववर्ष की शुभकामना से ही की। उन्होंने भारतीय नववर्ष और हिन्दू नववर्ष के साथ चैत्र नवरात्र के पहले दिन नेपाल के प्रधानमंत्री के आगमन को महत्वपूर्ण बताया। इसके पीछे कई संकेत हैं। नेपाल दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां आधिकारिक रूप से विक्रम संवत् चलता है। हालांकि नेपाल में वैशाख के पहले दिन से नया वर्ष शुरू होता है, लेकिन हिन्दू राष्ट्र होने के कारण नेपाल की जनता चैत्र प्रतिपदा, वर्ष प्रतिपदा और चैत्र नवरात्र के महत्व से भली-भांति परिचित है। दूसरी ओर, नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। देउबा के साथ संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘दोनों देशों के बीच मित्रता और लोगों के बीच आपसी संबंध का उदाहरण पूरे विश्व में कहीं और नहीं मिलता। हमारी सभ्यता, संस्कृति और हमारे आदान-प्रदान के धागे प्राचीन काल से जुड़े हुए हैं। अनादिकाल से हम एक-दूसरे के सुख-दु:ख के साथी हैं।’’

2019 में नेपाल द्वारा नया नक्शा प्रकाशित करने के बाद द्विपक्षीय कूटनीतिक व राजनीतिक संबंधों में शिथिलता आ गई थी। नेपाल में बदले राजनीतिक माहौल, राजनीतिक समीकरण और दो तिहाई वाली वामपंथी सरकार के पतन के बाद देउबा की लोकतांत्रिक सरकार बनी। तभी से नेपाल की ओर से उनके भारत दौरे के लिए आग्रह किया जा रहा था, लेकिन कभी कोरोना तो कभी वहां की अंदरूनी राजनीति के कारण प्रधानमंत्री बनने के महीनों बाद देउबा भारत दौरे पर आ सके। जिस समय चीनी विदेश मंत्री वांग यी नेपाल आने वाले थे, उस समय नेपाली विदेश मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय देउबा के भारत दौरे की तैयारी में जुटा हुआ था। चीनी विदेश मंत्री के दौरे के बीच ही उनके तीन दिवसीय भारत दौरे का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया। चूंकि वांग यी के दौरे से कुछ खास होने की उम्मीद नहीं थी, इसलिए सबकी निगाहें देउबा के भारत दौरे पर टिकी हुई थीं।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा भारत
भारत हमेशा से नेपाल के समग्र विकास में हर तरह से सहयोग करता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने पर जोर देते हैं। नेपाल के विकास में ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। भारत के सहयोग से ऊर्जा क्षेत्र में नेपाल आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है। इस बार देउबा के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र के लिए संयुक्त दृष्टिकोण जारी किया गया। इसके तहत नेपाल की जलविद्युत परियोजना में भारत निवेश तो करेगा ही, अंतर्देशीय प्रसारण लाइन बनाने, नेपाल की राष्ट्रीय प्रसारण लाइन के निर्माण व संचालन में भी सहयोग करेगा। साथ ही, आपसी लाभ के आधार पर दोनों देशों के ऊर्जा बाजार में पहुंच के लिए मार्ग प्रशस्त करने जैसी बातें भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने बीते ढाई दशक से प्रस्तावित नेपाल की सबसे बड़ी बिजली परियोजना जो 3240 मेगावाट की है, को जल्द ही आगे बढ़ाने की घोषणा की है। भारत के निजी क्षेत्र के सहयोग से परियोजना के पूरी होने पर नेपाल बिजली के क्षेत्र में न सिर्फ आत्मनिर्भर हो जाएगा, बल्कि अपनी अतिरिक्त बिजली भारत-बांग्लादेश सहित अन्य देशों को भी बेच सकेगा। नेपाल ने बारिश के महीनों में 500 मेगावाट बिजली देने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर भारत पहले ही अपनी स्वीकृति दे चुका है।

देउबा के दौरे के बाद नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा कि पंचेश्वर बहुद्देशीय परियोजना का डीपीआर जल्द ही तैयार कर लिया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि देउबा के भारत दौरे से ठीक पहले नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की सदस्यता ली थी। प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के इस फैसले की सराहना करते हुए गठबंधन में मिलकर काम करने को लेकर एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने की जानकारी दी थी। बांग्लादेश-भूटान-भारत-नेपाल (बीबीआईएन) मोटर वाहन समझौते के तहत भी दोनों देशों के बीच समझौते हुए हैं। इसके तहत नेपाल और भारत को जोड़ने के लिए सड़क, रेल, वायु संपर्क, गैस पाइपलाइन संपर्क और पारेषण लाइन संपर्क का विकास किया जाएगा।

पहली रेल सेवा का उद्घाटन
13 जुलाई, 2021 को प्रधानमंत्री की शपथ लेने के बाद 1-3 अप्रैल तक देउबा की यह पहली भारत यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने आपसी मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद दोनों नेताओं ने बिहार के जयनगर से नेपाल के कुर्था तक पहली रेल सेवा सहित कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। 90 किलोमीटर की पावर ट्रांसमिशन लाइन का भी उद्घाटन किया गया। साथ ही, प्रधानमंत्री ने नेपाल में रूपे पे-कार्ड भी जारी किया। इस अवसर पर देउबा ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए साझा व्यवस्था बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

 

दोनों प्रधानमंत्री ने पूरी तरह भारत के आर्थिक व प्राविधिक सहयोग से बिहार के जयनगर से नेपाल के जनकपुरधाम तक पहली रेल सेवा की शुरुआत ने हरी झंडी दिखाकर की। यह रेल सेवा दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिकता को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस रेल सेवा के शुरू होने से भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या धाम से माता सीता की पावन भूमि जनकपुरधाम के बीच सीधा संपर्क होगा। इसके अलावा, भारत ने नेपाल में रेल संपर्क और अधिक बढ़ाने के लिए हर तरह का सहयोग देने की घोषणा की है। भारत के सहयोग से नेपाल की राजधानी काठमांडू को रेल सेवा से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना पर भी जल्द काम शुरू होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने रक्सौल-काठमांडू रेल सेवा का डीपीआर तैयार होते ही इसका निर्माण शुरू होने की बात कही है।

भाजपा मुख्यालय और काशी भ्रमण
तीन दिवसीय दौरे पर आए देउबा प्रधानमंत्री मोदी के अलावा कई प्रमुख नेताओं से भी मिले। साथ ही, उनका भाजपा मुख्यालय जाना और काशी भ्रमण भी चर्चा में रहा। पहली बार किसी देश के प्रधानमंत्री का भाजपा मुख्यालय जाना हुआ है। भाजपा केराष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के निमंत्रण पर देउबा भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां भाजपा अध्यक्ष और पार्टी के विदेश विभाग के प्रमुख विजय चौथाइवाले ने नेपाल के प्रधानमंत्री और नेपाली प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। दो देशों के बीच कूटनीतिक संबंध तभी सफल माना जाता है, जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक दलों का संबंधों को प्रगाढ़ हो।

75 नई परियोजनाओं की सौगात

खास बात यह है कि द्विपक्षीय वार्ता में लिंपियाधुरा, लिपुलेख और काला पानी विवाद को तवज्जो नहीं दी गई। दोनों देश आपसी संबंधों को साफ नीयत से आगे बढ़ाने के इच्छुक दिखे। ओली के शासन काल में नेपाल में चीन का दखल बढ़ने और भारत विरोधी स्वर के मुखर होने से द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ा। इससे खासतौर से नेपाल को काफी नुकसान हुआ। वहां भारत ने जो परियोजनाएं शुरू की थीं, उनमें कुछ ठप पड़ गर्इं तो कुछ की गति धीमी हो गई। देउबा के दौरे पर उन परियोजनाओं को गति देने पर सहमति बनी ही है। इसमें 14 साल से ठप छोटी दूरी की रेल परियोजना भी शामिल है। साथ ही, भारत ने नेपाल को 75 नई परियोजनाओं का उपहार भी दिया है।

विद्युत परियोजनाओं में भागीदारी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘हम दोनों सहमत हैं कि हमें बिजली क्षेत्र में सहयोग के अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। पावर कॉर्पोरेशन पर हमारा संयुक्त बयान भविष्य में ब्लू प्रिंट साबित होगा। हमने पंचेश्वर परियोजना में तेज गति से आगे बढ़ने पर जोर दिया है। भारतीय कंपनियों द्वारा नेपाल की पनबिजली परियोजनाओं के विकास में अधिक भागीदारी पर भी सहमति जताई है। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा जी भारत के पुराने मित्र हैं, भारत-नेपाल संबंधों के विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। नेपाल में रुपे कार्ड की शुरुआत हमारे आर्थिक संपर्क में एक नया अध्याय जोड़ेगी। अन्य परियोजनाएं जैसे- नेपाल पुलिस अकादमी, नेपालगंज में ई-इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, रामायण सर्किट आदि भी दोनों देशों को और करीब लाएंगे। देउबा जी और मैंने व्यापार और सभी प्रकार से सीमा पार संपर्क को प्राथमिकता देने पर भी सहमति जताई है। जयनगर-कुर्था रेल नेटवर्क की शुरुआत इसी का एक हिस्सा है।

भाजपा की यही कोशिश है कि विभिन्न देशों के प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ उसके संबंध अच्छे हों और उसे इसमें सफलता मिल रही है। 2018 के बाद नेपाल-भारत संबंधों में जो कटुता आ गई थी, वह भाजपा के कारण ही सामान्य हो सकी। दो साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भाजपा के विदेश विभाग प्रभारी विजय चौथाईवाले को विशेष निमंत्रण देकर काठमांडू बुलाया था। उसके करीब 9 माह बाद दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत शुरू हो पाई थी। फिर कूटनीतिक संबंध भी मधुर होते गए। बाद में जब नेपाल का राजनीतिक समीकरण बदला और नेपाली कांग्रेस सत्ता में आई तो प्रधानमंत्री देउबा की धर्म पत्नी आरजू देउबा ने तत्काल चौथाईवाले को निमंत्रण दिया।

रक्षा बंधन पर नेपाल पहुंचे चौथाईवाले को उन्होंने प्रधानमंत्री निवास में राखी बांधी थी, जिसकी नेपाली मीडिया में काफी चर्चा हुई थी। बाद में नेपाली कांग्रेस ने भाजपा के साथ राजनीतिक स्तर पर संबंध बनाने की इच्छा जताई तो चौथाईवाले के ही निमंत्रण पर नेपाली कांग्रेस के तीनों शीर्ष नेता को दिल्ली भेजा गया और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से संवाद की शुरुआत हुई। नतीजा, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का न्यौता स्वीकार कर प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना प्रधानमंत्री देउबा भाजपा मुख्यालय पहुंचे। हालांकि नेपाल के वामपंथी दलों ने देउबा के इस कदम की काफी आलोचना की। विरोधी देउबा के भारत दौरे को उनके हिंदू एजेंडे से भी जोड़कर देख रहें हैं। वहीं, प्रधानमंत्री देउबा की ओर से नेपाल के विदेश मंत्री डॉ. नारायण खड़का ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों के बीच में प्रोटोकॉल के लिए बहुत अधिक जगह नहीं है।

दौरे के आखिरी दिन देउबा काशी गए और वहां धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। वाराणसी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया और उन्हें काशी विश्वनाथ, काल भैरव सहित कई धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए। काशी गलियारे को देखकर देउबा दंपती अभिभूत हो गए। वाराणसी के घाट पर नेपाली मंदिर के पास देउबा ने वृद्धाश्रम बनाने के लिए भूमि पूजन और शिलान्यास किया।

कुल मिलाकर नेपाल के प्रधानमंत्री देउबा का भारत दौरा उपलब्धियों से भरा रहा। नेपाल की ओर से सीमा विवाद का मुद्दा उठाया गया तो भारत ने साफ कर दिया कि द्विपक्षीय संवाद के जरिये वह नेपाल के साथ सभी समस्याओं का समाधान करने के लिए हमेशा तैयार है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद बड़ी समस्या नहीं है। दो साल पहले संवादहीनता के कारण कूटनीतिक संबंधों में नरमी आ गई थी। इसकी पुनरावृत्ति न हो और इसके लिए सभी क्षेत्रों में सभी स्तर पर संवाद बहुत जरूरी है। भारत और नेपाल खुली सीमाओं वाले देश है। दोनों देशों के बीच पारिवारिक, वैवाहिक, सामाजिक, आर्थिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक संबंध हैं, जो हिमालय से अटल और गंगा सा निर्मल हैं। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत का सार यह है कि अब दोनों देशों के संबंध पटरी से नहीं उतरेंगे।

Topics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीहैदराबाद हाउसनेपालप्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबाभगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या धाम से माता सीता की पावन भूमि जनकपुरधामरक्सौल-काठमांडू रेल सेवा
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