चीन ने हाल ही में एक 99 फुट ऊंची बौद्ध प्रतिमा तोड़ दी है। इतना ही नहीं, सिचुआन प्रांत में कम्युनिस्ट सरकार की इस हरकत का विरोध करने वाले कई तिब्बती लामाओं पर भी अत्याचार करने के समाचार मिले हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने कल यानी 13 जनवरी को तिब्बती बौद्धों पर चीन के अत्याचारों की खबरों पर गहन चिंता व्यक्त की है। चीन में जिस तरह से नस्लीय अल्पसंख्यकों और उनकी संस्कृति को सुनियोजित तरीके से नष्ट किया जा रहा है उसे लेकर अमेरिका ने अफसोस जताते हुए चीन को ऐसी नीति से बाज आने को कहा है।
प्राप्त समाचारों के अनुसार, अमेरिका के विदेश विभाग के अंतरराष्ट्रीय पांथिक स्वतंत्रता कार्यालय ने चीन के प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह तिब्बतियों को उनके धर्म के अनुसार चलने दे और उनके अधिकारों का सम्मान करे। विदेश विभाग का यह कार्यालय अमेरिका की विदेश नीति के अंतर्गत दुनिया भर में सभी को पंथ की स्वतंत्रता और उसके सम्मान को बढ़ावा देने से जुड़े विषय देखता है।
अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय पांथिक स्वतंत्रता कार्यालय ने ट्वीट किया है कि “तिब्बती बौद्धों के विरुद्ध पीआरसी की कार्रवाई को बढ़ाए जाने के समाचारों से हम बहुत व्यथित हैं, जिसमें अधिकारियों ने बौद्ध प्रतिमाओं को तोड़ा, बौद्ध प्रार्थना चक्रों को हटाया और धार्मिक प्रार्थना के झंडों को जलाया है। हम आ्रह करते हैं कि पीआरसी के अधिकारी तिब्बतियों की आस्था और मान्यताओं पर स्वतंत्र रूप से चलने के अधिकार की इज्जत करें।”
अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय पांथिक स्वतंत्रता कार्यालय ने तिब्बतियों को लेकर चीन की नफरती नीति की भर्त्सना की है और ट्वीट किया है कि “तिब्बती बौद्धों के विरुद्ध पीआरसी की कार्रवाई को बढ़ाए जाने के समाचारों से हम बहुत व्यथित हैं, जिसमें अधिकारियों ने बुद्ध प्रतिमाओं को तोड़ा, बौद्ध प्रार्थना चक्रों को हटाया और धार्मिक प्रार्थना के झंडों को जलाया है। हम आ्रह करते हैं कि पीआरसी के अधिकारी तिब्बतियों की आस्था और मान्यताओं पर स्वतंत्र रूप से चलने के अधिकार की इज्जत करें।”
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी विदेश विभाग का यह ट्वीट विशेष तौर पर चीन के सिचुआन प्रांत में तिब्बतियों की प्रतिष्ठित बौद्ध प्रतिमा को नष्ट करने के समाचारों के उपरांत आया है। रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट बताती है कि कार्दजे तिब्बती स्वायत्तशासी प्रांत में ड्रैगो काउंटी स्थित गादेन नाम्याल लिंग मठ में मैत्रेय बुद्ध की एक प्रतिमा तोड़े जाने की उपग्रह से मिले चित्रों से पुष्टि हुई है।
उधर चीन का दावा है कि उसने सुरक्षा कारणों से बौद्ध प्रतिमा तोड़ी है। सूत्रों के अनुसार, मैत्रेय बुद्ध की उक्त तीन मंजिल ऊंची प्रतिमा जिस मंदिर में थी वहां आग से बचाव का कोई साधन नहीं है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ दिखावटी वजहें हैं, असल में चीन एक लंबे समय से तिब्बतियों का नस्लीय परिमार्जन करने में लगा है। बौद्ध मठों को बंद करना, लामाओं को कैद करना और युवा तिब्बतियों को उनके धार्मिक संस्कारों और शिक्षा से दूर करना ड्रैगन की इसी नफरती नीति का हिस्सा हैं।











