जब भी किसी देश की सरकार ताइवान को एक आजाद देश मानते हुए उससे संबंध मधुर करने की बात करती है या वहां की सरकार की नीतियों के प्रति समर्थन जताती है, विस्तारवादी चीन की मुश्कें कस जाती हैं! अमेरिका और जापान को वह पिछले दिनों इसी बात को लेकर घुड़की दिखा चुका है। अब उसी क्रम में उसने जर्मनी को लेकर आंखें तरेरी हैं।
ताइवान को निगलने की मंशा पाले ड्रैगन विश्व के कई देशों पर दबाव बनाता आ रहा है कि ताइवान का समर्थन न करें। उसे आजाद देश न बताएं। अब उसने इसके लिए ताजी धमकी दी है जर्मनी को। जर्मनी को भी चीन ने ताइवान की आजादी का समर्थन न करने की 'सलाह' दी है।
जर्मनी को यह 'सलाह' या धमकी दी है चीन के एक राजनयिक ने। जर्मन सरकार को बिल्कुल उन्हीं शब्दों में धमकाया गया है जिनमें कुछ वक्त पहले बीजिंग ने अमेरिका को धमकाया था। जर्मनी में चीन के दूतावास के वरिष्ठ राजनयिक वांग वीदोंग ने 2 जनवरी को ताइवान के संदर्भ में जर्मनी को आगाह करते हुए कहा है कि 'हम ताइवान के पक्ष में बोलने वाले देशों पर नजर रखे हुए हैं। जर्मन सरकार को हम 'सलाह' देते हैं कि वह कैसे भी ताइवान की स्वतंत्रता की आवाज उठाने वालों या उसका पक्ष लेकर समर्थन में खड़े होने वालों को सहयोग न दे'।
स्पष्ट है कि बीजिंग के आदेश पर खुद चीन की कम्युनिस्ट सरकार और विदेशों में मौजूद दूतावास ताइवान पर विभिन्न देशों के व्यवहार पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। उधर ताइवान की स्वाभिमानी सरकार ने चीन को सावधान किया है कि उनके देश की संप्रभुता पर किसी तरह की टीका—टिप्पणी उन्हें बर्दाश्त नहीं है और वे हर तरह से उसका प्रतिकार करने को तैयार हैं।
दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी ने आगे कहा है कि 'चीन तथा जर्मनी के रिश्ते काफी मधुर रहे हैं। हम बिल्कुल नहीं चाहते कि इनमें किसी तरह की खटास पैदा हो। जर्मनी की सरकार लिथुआनिया का भी समर्थन दे रही है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि चीन इस तरह की हरकत करने वाले देशों के विरुद्ध कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का कदम उठा सकती है। बेशक, इससे जर्मनी को काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है'।
स्पष्ट है कि बीजिंग के आदेश पर खुद चीन की कम्युनिस्ट सरकार और विदेशों में मौजूद दूतावास ताइवान पर विभिन्न देशों के व्यवहार पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। ताइवान को अपनी मिल्कियत मान बैठे चीन को खुद ताइवान की स्वाभिमानी सरकार ने सावधान किया है कि उनके देश की संप्रभुता पर किसी तरह की टीका—टिप्पणी उन्हें बर्दाश्त नहीं है और वे हर तरह से उसका प्रतिकार करने को तैयार हैं। इसके बावजूद चीन ताइवान के हवाई क्षेत्र का आएदिन अतिक्रमण करके उस पर सैन्य दबाव बनाए हुए है।
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी चीन की इन हरकतों से अनजान नहीं है और समय—समय पर चीन को अपना अक्खड़ रवैया ठीक करने की सलाह दे चुकी है।











