पड़ोसी इस्लामी देश में अब पाकिस्तान हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति गठित की गई है। सरकार द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि इस नवगठित पाकिस्तान हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति की पहली बैठक संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता वहां के मजहबी मामलों के मंत्री पीर नूर-उल-हक कादरी ने की।
इस संबंध में पाकिस्तान के अंग्रेजी दैनिक द डॉन के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने गत 29 दिसम्बर को बताया कि उसने इस्लामी देश में अल्पसंख्यक समुदाय के मंदिरों के प्रबंधन के लिए हिंदू नेताओं वाली पहली समिति गठित कर दी है।
बता दें कि पाकिस्तान में मजहबी मामलों के मंत्रालय ने पहले से कार्यरत पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की ही तर्ज पर नई पाकिस्तान हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति बनाई है।
पाकिस्तान में 'इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' (ईटीपीबी) प्रमुख आसिफ हाशमी ने इस बैठक में अपनी इकाई से जुड़े मामलों का ब्योरा दिया। ईटीपीबी वह बोर्ड है जिस पर बंटवारे के बाद भारत आ बसने हिंदुओं तथा सिखों की धार्मिक संपत्तियों और तीर्थों का रखरखाव करने की जिम्मेदारी है। आसिफ कादरी ने बताया कि यह नई बनी समिति हिंदू मंदिरों से जुड़े सभी मामलों को देखेगी।

पाकिस्तान में बंटवारे के बाद से ही प्रताड़ना झेलते आ रहे हिंदू समुदाय ने बहुत समय पहले मांग की थी कि उनके मंदिरों और आस्था स्थलों की देखभाल हिन्दुओं के प्रतिनिधित्व वाली समिति को सौंपी जानी चाहिए। आखिरकार सरकार को हिन्दुओं की यह जायज मांग माननी पड़ी।
दरअसल पाकिस्तान में बंटवारे के बाद से ही प्रताड़ना झेलते आ रहे हिंदू समुदाय ने बहुत समय पहले मांग की थी कि उनके मंदिरों और आस्था स्थलों की देखभाल हिन्दुओं के प्रतिनिधित्व वाली समिति को सौंपी जानी चाहिए। आखिरकार सरकार को हिन्दुओं की यह जायज मांग माननी पड़ी। नई बनी समिति में शाामिल हिन्दू नेता हैं दीवान चंद चावला, हारून सरब दयाल, मोहनदास, नारंजन कुमार, मेघा अरोड़ा, अमित शदानी, अशोक कुमार, वर्सी मिल दीवानी तथा अमर नाथ रंधावा। समिति के अध्यक्ष बनाए गए कृष्णा शर्मा का कहना है कि पाकिस्तान ने हिंदू समुदाय की मांग पर यह समिति बनाकर एक बड़ा कदम उठाया है।
समिति की घोषणा करते हुए मजहबी मामलों के मंत्री कादरी अपनी सरकार की तारीफ करना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री इमरान खान की सोच के तहत गैर मुस्लिम लोगों की भलाई की कोशिशें की जा रही हैं।
पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। एक अनुमान के अनुसार, आज वहां 75 लाख हिंदू रह रहे हैं। इनमें से ज्यादातर हिन्दू सिंध प्रांत में बसे हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि सिंध में मजहबी उन्मादियों द्वारा आएदिन हिन्दू लड़कियों को अगवा करके, उन्हें कन्वर्ट करने के बाद उनसे जबरन निकाह किया जाता है, लेकिन ऐसी घटनाओं पर सरकार अक्सर मुंह सिले रहती है।











