अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को फटकारते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि अफगानिस्तान के मामलों में दखल न दें। करजई ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में आतंकवाद पाकिस्तान का ही फैलाया हुआ है। बता दें कि हामिद करजई अफगानिस्तान में सत्तारूढ़ तालिबान सरकार के 'सलाहकार' हैं जिसके बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि रविवार 19 दिसम्बर को इस्लामाबाद में शुरू हुए तीन दिन के ओआईसी सम्मेलन में इमरान ने अफगानिस्तान को लेकर 'आंसू' बहाते हुए कहा था कि 'उसकी हालत खराब है, सब मिलकर मदद करें। इमरान ने तब कहा था कि अफगानिस्तान की वजह से पाकिस्तान में आतंकवादी हमले होते हैं। वहां इस्लामिक स्टेट और कई दूसरे आतंकवादी गुट सक्रिय हैं। ऐसे में दुनिया के सभी देश इस बात पर गौर करें, अफगानिस्तान की मदद करें। क्योंकि अगर वक्त रहते अफगानिस्तान की यह मदद नहीं की गई तो वहां हालात और खराब हो सकते हैं'। इसके जवाब में ही करजई की यह कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को साफ कहा है कि वे और उनकी सरकार हमारे मामलों में दखलंदाजी फौरन बंद कर दें।
पूर्व राष्ट्रपति करजई ने कहा कि 'इमरान के तमाम आरोप बेबुनियाद हैं। वे अफगानिस्तान को बदनाम करने के षड्यंत्र रचते रहते हैं। सच तो यही है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी पाकिस्तान में मौजूद हैं जहां से वे अफगानिस्तान में हमले करते हैं।'
उल्लेखनीय है कि हामिद करजई का अफगानिस्तान की राजनीति में काफी ऊंचा कद है। वे 2004 से 2014 तक अफगानिस्तान के राष्ट्रपति रहे थे। यह करजई का ही राष्ट्रपति काल था जब भारत ने अफगानिस्तान में विनिर्माण के कई काम किए थे। भारत अफगानिस्तान में विकास योजनाओं में सबसे बड़ा मददगार था। पाकिस्तान को यह बात हमेशा चुभती रही थी। उसने हर मंच का दुरुपयोग करते हुए अफगानिस्तान में भारत के कामों को कमतर करने की नाकाम कोशिश भी की थी।
20 दिसम्बर को प्रेस से बात करते हुए पूर्व राष्ट्रपति करजई ने कहा कि 'इमरान के तमाम आरोप बेबुनियाद हैं। वे अफगानिस्तान को बदनाम करने के षड्यंत्र रचते रहते हैं। सच तो यही है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी पाकिस्तान में मौजूद हैं जहां से वे अफगानिस्तान में हमले करते हैं।' हामिद करजई ने गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि 'वे इमरान को यही सलाह देना चाहते हैं कि अब भी वक्त है, अफगानिस्तान के मामलों में दखल देना बंद कर दें। पाकिस्तान को कोई जरूरत नहीं है कि दुनियाभर में हमारी पैरवी करता फिरे'।











