पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कल यानी रविवार से शुरू हुई ओआईसी की बैठक प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुलाई तो अफगानिस्तान में कुर्सी पर बैठे तालिबान लड़ाकों के प्रति अपना 'प्यार' दिखाने को थी, लेकिन इसमें भी वह कश्मीर पर रोना रोने से बाज नहीं आए।
20 विदेश मंत्री
यह बैठक इस्लामिक सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों के 17वें सत्र की है जिसमें 20 विदेश मंत्री, 10 उप विदेश मंत्री और 57 इस्लामी दूत अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा के लिए बुलाए गए हुए हैं। इन सबके सामने अफगानिस्तान पर बात करते—करते इमरान ने कहा कि इस मंच से उन्हें कुछ मुद्दे और उठाने हैं।उन्होंने कहा, 'कश्मीर तथा फिलिस्तीन के नागरिक हमारी ओर देख रहे हैं। वे अपने मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक अधिकारों तथा संयुक्त राष्ट्र से मिले हकों को लेकर हमारे मन की बात जानना चाहते हैं। हमें हर मंच से उनकी आवाज उठानी चाहिए, हमें मिलकर कार्रवाई करनी चाहिए'।
यह सम्मेलन सऊदी अरब की अध्यक्षता में हो रहा है। इस सत्र में हिस्सा लेने आए मंत्रियों के मुख्य रूप से अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पर चर्चा करने की बात है।
अफगानिस्तान पर अपना 'दर्द' झलकाते हुए इमरान खान का कहना था कि अगर अफगानिस्तान में मानवीय संकट, आतंकवाद और कोविड-19 जैसी चुनौतियां गंभीर हुईं और वह इनसे हार गया तो पाकिस्तान में इतने शरणार्थी आ जाएंगे कि वह इस समस्या से निपट नहीं पाएगा। अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर दुनिया भर में हो रही अपनी फजीहत पर लगभग सफाई देने के अंदाज में उन्होंने कहा कि आतंकवाद को चुनौती दे सकती है तो बस एक स्थिर अफगान सरकार। लेकिन वहां हालात इतने गंभीर थे कि देश में अराजकता फैल सकती थी।
आतंकवाद और कोविड-19 जैसी चुनौतियां गंभीर हुईं और वह इनसे हार गया तो पाकिस्तान में इतने शरणार्थी आ जाएंगे कि
वह इस समस्या से निपट नहीं पाएगा।
इमरान खान ने आगे कहा, 'मेरा यकीन मानिए, अफगानिस्तान में अराजकता से किसी भी देश का भला नहीं होगा, खासतौर पर अमेरिका को कोई फायदा नहीं होने वाला।' उनका कहना था कि अफगानिस्तान को बर्बादी से बचाने के लिए फौरन कार्रवाई करनी होगी। अगर अफगानिस्तान गंभीर चुनौतियों से हारता है तो पाकिस्तान शरणार्थियों की तादाद को झेल नहीं पाएगा।
इस मौके पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अफगानिस्तान के तालिबानी विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी से कहा कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार अफगानिस्तान में बिगड़ते हालात, खराब होती मानवीय स्थिति पर दुनिया का ध्यान खींचने की पूरी कोशिश कर रही है।











