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ग्वादर में उबाल

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 2, 2021, 08:00 am IST
inभारत, दिल्ली
Baloch protest against Pakistan government in Gwadar, ग्वादर में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बलूचों का विरोध प्रदर्शन

Baloch protest against Pakistan government in Gwadar, ग्वादर में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बलूचों का विरोध प्रदर्शन

ग्वादर में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ चल रहा आंदोलन तेज हो गया है। स्थानीय लोगों के विरुद्ध सोची-समझी रणनीति के तहत तरह-तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं और लोग इसके खिलाफ बड़ी तादाद में सड़कों पर उतर आए हैं
 
ग्वादर से पुतन ग्वादरी

चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का सबसे अहम मुकाम ग्वादर इन दिनों पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मकामी (स्थानीय) बलूच लोगों के जद्दोजहद (संघर्ष) का अहम ठिकाना बना हुआ है। वैसे तो यह सब चार-पांच महीनों से चल रहा है, लेकिन हाल के दिनों में यह काफी तेज हो गया है। लोग बड़ी तादाद में घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आए हैं और ग्वादर में जिस तरह के हालात बन गए हैं, उनमें पोर्ट का ज्यादातर काम रुक गया है। पाकिस्तान और चीन के लिए सीपीईसी की खास अहमियत है और इस वजह से ग्वादर उनके लिए ऐसा ठिकाना है, जिसे वे पूरी तरह अपने कब्जे में रखना चाहते हैं। ग्वादर की हिफाजत के लिए पाकिस्तान ने 2016 में ही तमाम एजेंसियों के बेहतरीन जवानों को शामिल करके अलग से एक बटालियन बनाई थी। लेकिन उसके बाद भी 2019 में ग्वादर के सबसे बड़े होटल, पर्ल कंटिनेंटल पर कौमी आजादी की लड़ाई लड़ रहे बलूचों ने हमला कर दिया था जिसमें बड़ी तादाद में पाकिस्तानी फौजी मारे गए थे। लिहाजा, ग्वादर में हाल में जिस तरह बड़ी तादाद में लोग शरीक हो रहे हैं, उसे देख पाकिस्तानी हुकूमत खौफजदा है।

सड़कों पर उतरे ग्वादर के लोग
चंद दिनों पहले इसमें सैकड़ों स्टुडेंट शामिल हुए और उन्होंने ग्वादर की सड़कों पर मार्च किया। अभी कुछ ही दिन पहले बलूचिस्तान यूनिवर्सिटी से सोहेल और फसीह बलोच को अगवा कर लिया गया था जिसके खिलाफ ग्वादर यूनिवर्सिटी के लड़कों ने क्लासेज का बॉयकॉट भी किया। ग्वादर के उस प्रोटेस्ट में शामिल ज्यादातर स्टुडेंट इस बात के हामी हैं कि खास तौर पर ग्वादर के मामले में पाकिस्तान चाहता है कि यहां से मकामी लोग हट जाएं। सियासी वर्कर मौलाना कादिर का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान को पंजाब और चीन की खुशहाली के लिए ग्वादर तो चाहिए, लेकिन ग्वादर के लोग नहीं। वैसे ही, जैसे उन्हें कभी बांग्लादेश की जमीन चाहिए थी, लेकिन बांग्लादेशी नहीं। इसी वजह से यहां के लोगों के लिए तरह-तरह की दिक्कतें खड़ी की जा रही हैं।
 

ग्वादर में चीन और पाकिस्तान के अफसरों और फौजियों के लिए सारे इंतजामात किए गए हैं। उनके लिए पीने के पानी से लेकर हर जरूरी और ऐशो-आरोम की चीज का बंदोबस्त है, लेकिन यहां के लोगों के लिए पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है। पानी की कमी से जूझ रहे लोग कहीं इनके इलाकों में जाकर पानी न लूट लें, इसके लिए फौजी तैनात किए गए हैं।

स्थानीय मछुआरों पर बंदिशें
पोर्ट सिटी ग्वादर में बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है जो समंदर से मछली मारकर गुजर-बसर करते हैं। लेकिन इन छोटे-छोटे मछुआरों को यह हक नहीं कि—समंदर में जाकर मछली पकड़ सकें। उन्हें इसके लिए इजाजत लेनी पड़ती है और जान-बूझकर इसमें तरह-तरह की दिक्कतें पेश की जाती हैं। जबकि बड़े ट्रॉले समंदर में मछलियां पकड़ते हैं और इससे समंदर के किनारे मछलियां तेजी से खत्म होती जा रही हैं।
एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अरशद मजीद ने खास तौर पर एडमिनिस्ट्रेशन को हिदायत दी है कि हर डिस्ट्रिक्ट के बॉर्डर पर लोगों की सख्ती से जांच-पड़ताल की जाए और इस काम में फौज और दूसरी एजेंसियों के साथ तालमेल मिलाकर काम करें। वैसे, ग्वादर के भीतर भी तमाम जगहों पर चेक प्वाइंट बनाए गए हैं और वहां फौजियों को तैनात किया गया है। इन चेक प्वाइंट्स का मकसद से ग्वादर के भीतर लोगों के आने-जाने पर नजर रखना है और इसके साथ ही हुकूमत नहीं चाहती कि बाहर के लोग आकर यहां के मूवमेंट को और तेज करें।
एक मांग मानी गई
24 नवंबर को अरशद मजीद ने सीनियर अफसरों के साथ मीटिंग करके ग्वादर के हालात का जायजा लिया। इस बैठक में इस बात पर गौर किया गया कि अगर जल्द ही लोगों की नाराजगी दूर नहीं की गई तो कोई बड़ी मुश्किल भी खड़ी हो सकती है। इस मामले में मछुआरों की यह मांग मान ली गई कि ग्वादर के समंदर में बड़े-बड़े ट्रॉले जिस तरह गैर-कानूनी तरीके से मछली मारते हैं, उसे रोका जाए। यहां ऐसे तमाम अफसर हैं जो पैसे लेकर इन बड़े ट्रॉलों को मछली मारने देते हैं। मीटिंग के बाद तत्काल ही अरशद मजीद ने इस बात का आॅर्डर जारी किया कि ग्वादर में 12 नॉटिकल मील तक इस तरह गैर-कानूनी तरीके से मछली मार रहे बड़े ट्रॉलों को हर हाल में रोका जाए। इसके साथ ही ग्वादर के डिप्टी कमिश्नर ने 24 नवंबर को ही खास तौर पर डीएसपी (लीगल) को आॅर्डर दिया कि वह देखें कि मछुआरों की नावें वगैरह क्यों सीज की गईं और उन्हें जल्दी से जल्दी छुड़ाने के बंदोबस्त करें। पिछले चंद रोज इस लिहाज से खासे अहम साबित हुए हैं कि हुकूमत तेजी से बिगड़ रहे हालात को काबू करने के लिए एक के बाद एक कई ऐसे फैसले कर रही है जिसके लिए बलूच लंबे अरसे से मांग करते रहे थे।
तो क्या इससे लोगों की नाराजगी दूर हो जाएगी? जिस तरह से लोग सड़कों पर उतर आए हैं, उसे देखते हुए लगता तो नहीं कि यह सब इतनी जल्दी खत्म होने वाला है। आजादी की जद्दोजहद तो एक बात है, इसके लिए बलूच जद्दोजहद कर ही रहे हैं और करते रहेंगे जब तक वे इसे हासिल न कर लें, लेकिन इसके साथ सवाल रोजी-रोटी का है। यहां के लोगों को बखूबी पता है कि आज हुकूमत खौफजदा है, इसलिए उसने उनकी एक बड़ी मांग को मान लिया। लेकिन अभी तो ऐसे तमाम मसले हैं। मकामी लोगों के मछली मारने के हक का क्या? उन्हें आखिर मछली मारने के लिए इजाजत लेनी ही क्यों पड़े? जिस तरह से यहां पर फौज, अफसरों और यहां काम करने वाले चीनियों के लिए हर तरह की सहूलियतों का ख्याल रखा जाता है, उनके लिए हर तरह का इंतजाम किया जाता है, आखिर यह सब बलूचों के लिए क्यों नहीं? बलूचों के हिस्से की चीज पर औरों की खुशनसीबी की इबारत लिखी जा रही है और वे चाहते हैं कि बलूच चुप रहें?
आंदोलन तोड़ने की साजिश
वैसे, कुछ खास लोगों से इस तरह की जानकारी मिली है कि ग्वादर के सीनियर सुपरिंटेंडेंट आॅफ पुलिस तारीक ईलाही मस्तोई ने 24 नवंबर को तमाम एजेंसियों की मीटिंग बुलाई थी जिसमें हालात का जायजा लेने के अलावा लोगों के प्रोटेस्ट से निपटने के तरीकों पर गौर किया गया। बताते हैं कि उनकी इंटेलिजेंस के लोगों के साथ भी मुलाकात हुई है। इस मीटिंग में क्या हुआ, इसके बारे में कोई खास मालूमात तो नहीं है, लेकिन यही अंदाजा है कि हुकूमत ने बलूचों के इस प्रोटेस्ट को तोड़ने के लिए इंटेलिजेंस के कुछ लोगों को लगा रखा था और इस मीटिंग में इस बात पर चर्चा हुई कि आखिर उनका हासिल क्या रहा।
फिलहाल ऐसा लगता है कि महीनों से चल रहे प्रोटेस्ट के अचानक तेज होने के बाद हुकूमत किसी तरह इसे खत्म कराना चाहती है और बलूचों को लगता है कि अरसे के बाद ऐसा मुमकिन हो सका है कि अपने वाजिब हकों के लिए सड़क पर उतरे लोगों की तादाद बढ़ती ही जा रही है और यहां के लोग जिस तरह रोजी-रोटी से महरूम होते जा रहे थे, उन्हें लगता है कि इस मौके को जाया नहीं देना चाहिए।
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