हिन्दू संस्कृति का अनुपम संरक्षण
July 19, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

हिन्दू संस्कृति का अनुपम संरक्षण

Written byArchiveArchive
Aug 7, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 07 Aug 2017 10:56:11

इंडोनेशिया के द्वीप जावा  में अनेक हिंदू जनजातियां हैं जिनमें लोगों के नाम भले मुस्लिम हों, पर व्यवहार में वे हिंदू ही हैं। भारत के प्रति उनमें अनूठी आस्था है

 श्याम परांडे
नौंवीं शताब्दी में निर्मित दुनिया का सबसे सुंदर महायान बौद्ध मंदिर बोरोबुदुर और 10वीं शताब्दी के सबसे बड़े हिन्दू मंंिदर प्रंबनन के जिक्र के बगैर जावा का परिचय अधूरा है। प्रंबनन इंडोनेशिया के द्वीप जावा की हिंदू संस्कृति की उत्कृष्ट वास्तुकला का नमूना है और भारत के कई ऐतिहासिक मंदिरों की तरह इसकी भी अपनी एक गाथा है।
किंवदंती के अनुसार, बांडुंग बोंडोवोसो नाम का एक व्यक्ति था, जो रोरो जोंगग्रांग नाम की एक खूबसूरत महिला को चाहता था। लेकिन जोंगग्रांग को उसका प्यार मंजूर नहीं था, इसलिए  उसने बोंडोवोसो के सामने एक शर्त रखी कि उसे एक ही रात में 1000 मूर्तियों वाला एक मंदिर बनाना होगा। यह असंभव था। फिर भी बोंडोवोसो ने अपने हाथ आए इस अवसर को पूरा करने की ठान ली और 1000 मूर्तियों के मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति देखकर जोंगग्रोंग को महसूस हुआ कि कार्य पूरा हो जाएगा। इसलिए जैसे ही बोंडोवोसो ने 999 वीं मूर्ति का निर्माण पूरा किया, जोंगग्रांग ने गांव वालों को फुसलाया कि वे चावल की खूब सारी भूसी इकट्ठी करके जला दें जिससे एक नकली सूर्योदय की स्थिति बन जाए। जब बोंडोवोसो को पता चला कि उसे धोखा दिया गया है तो उसने जोंगग्रांग को मंदिर की 1000 वीं मूर्ति बन जाने का शाप दे दिया। बोरोबुदुर मंदिर चारों ओर से विहंगम पहाड़ों और हरियाली से घिरा है। इससे मंदिर ने सदियों से प्राकृतिक आपदाओं या मानव निर्मित तबाही के बीच अपने अस्तित्व को सुरक्षित रखा है, लिहाजा इस स्मारक को दृढ़ता का प्रतीक कहा जा सकता है। हालांकि, इस विवरण का उद्देश्य बोरोबुदुर या प्रंबनन के अद्भुत मंदिरों के बारे में बताना नहीं, बल्कि उस समुदाय का परिचय कराना है जिनके पूर्वजों ने इन विशाल मंदिरों को एक सहस्राब्दी पहले बनाया था। इन दोनों मंदिरों को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है और गूगल पर इनके इतिहास के बारे में जानकारी उपलब्ध है।  
जावा- जिंदादिल समुदाय
हैरानी की बात है कि हजारों मील दूर एक समुदाय भारत से आने वाले मेहमानों का स्वागत करने के सपने देखता है। मेरे लिए यह अविश्वसनीय था। फिर भी, मुझे अपनी आंखों और कानों पर विश्वास तो  करना ही था। जावा द्वीप में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और द्वीप के कुछ हिस्सों में उनकी आबादी नगण्य हैै। लेकिन उनका आत्मविश्वास काबिलेतारीफ है। मुझे महसूस हुआ कि यह समुदाय छोटा तो है, फिर भी उस विशाल द्वीप पर हर जगह मौजूद है और सभी हिंदू परंपराओं, संस्कारों और अनुष्ठानों का पूरी निष्ठा और नियम से पालन करने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं।
हम भारतीय यह सोच ही नहीं सकते कि विश्वविद्यालय के छात्र और शिक्षक सुबह 6 बजे इकट्ठे होकर भारत से आए अपने मेहमानों का स्वागत करने के लिए तत्पर रहेंगे, पर ऐसा नजारा पूर्वी जावा के दूसरे सबसे बड़े शहर मलांग में दिखाई दिया। मैं सुबह-सुबह मलांग के सेकोलाह तिंगी अगामा हिंदू संतीका धर्म, अश्रमा गुन्गंग अगंग या साधारण शब्दों में कहें तो मलांग हिंदू कॉलेज पहुंचा, क्योंकि हमारा पूरा दिन बड़ा व्यस्त था। यह दौरा एक दिन पहले होने वाला था पर उड़ान रद्द होने के कारण नहीं हो सका। हम सड़क मार्ग से 400 किलोमीटर की यात्रा करके वहां पहुंचे ताकि इस कार्यक्रम में भाग ले सकें। न तो मेरे मेजबान और न मैं कार्यक्रम  छोड़ना चाहता था। यह एक सुखद एहसास था कि वैदिक साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन पर केंद्रित एक कार्यक्रम के लिए उतनी सुबह भारी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी हमारे स्वागत के लिए मौजूद थे।
हमारे मेजबान डॉ़ मिसवांतो कॉलेज के अकादमिक मामलों के उपाध्यक्ष थे। इस संस्थान के पुस्तकालय में हिंदू धर्म और दर्शन पर अच्छी संख्या में पुस्तकें उपलब्ध हैं, जिनमें से कुछ आईसीसीएस की ओर से भेजी गई हैं। छात्रों के एक समूह ने सस्वर मंत्र-पाठ से मेहमानों का स्वागत किया। यह दुखद है कि हिंदू धर्म का अध्ययन छात्रों को न तो उज्ज्वल भविष्य के प्रति आश्वस्त करता है, न ही सफलता की कोई उम्मीद प्रदान करता है। फिर भी वे चुनौतियों से घबराते नहीं। उनमें से कुछ की ख्वाहिश भारत में हिंदू धर्म का अध्ययन करने और अपनी आजीविका के लिए एक और विषय पढ़ने की है क्योंकि हिंदू धर्म का अध्ययन उनकी आमदनी का जरिया नहीं बन सकता। हमें यह देखना होगा कि क्या भारत में  हिंदू धर्म की शिक्षा के बाद उपाधि देने के लिए कोई प्रतिष्ठान या संस्था है? मलांग में बहुसंख्यक मुसलमानों के बीच हिंदू समुदाय की आबादी नाममात्र की है लेकिन उन्हें अपनी विरासत पर गर्व है।
सुमात्रा के लैपंग की हमारी यात्रा अत्यंत शिक्षाप्रद रही। बहुसंख्यक समुदाय के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते बरकरार रखते हुए अपने धर्म को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में हिंदू समुदाय जिस तनाव से गुजरता होगा उसे हम बखूबी समझ सकते हैं। हमें सेकोलाह हिंदू तिंगी के छात्रों से मिलने का मौका मिला, जिनके पास बहुत सारे प्रश्न थे। हम लैपंग के बुद्ध मंदिर पहुंचे जहां हमने मठ में मौजूद बौद्ध समुदाय के साथ बातचीत की।
हालांकि, लैपंग की यात्रा की सबसे अच्छी यादें बालिनूरागा नाम के एक गांव में बंजार (पंचायत) के दौरे की हैं जहां पूरे ग्रामीण समुदाय ने, विशेष रूप से अपने बालों में फूल सजाए युवा लड़कियों ने अपनी पारंपरिक पोशाक में बड़ी गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया था। वे भारत से आए हिंदुओं को देखकर बहुत खुश थे। एक साल पहले एक उग्र भीड़ ने मंदिर के विशाल परिसर को जला दिया था, जिसमें इस गांव के 14 निवासियों की मृत्यु हो गई थी। हालांकि, इस समुदाय ने सरकार से कोई मांग किए बगैर पूरी निष्ठा के साथ इस मंदिर की अलौकिक छटा का पुनर्निर्माण किया।  बालिनूरागा एक कृषि-प्रधान परिश्रमी गांव है, जिसके निवासी भजन-कीर्तन और रामलीला आदि करते हैं। हमें बताया गया कि इस गांव की समृद्धि से आस-पास के बहुसंख्यक समुदाय के गांवों को ईर्ष्या होती है। इस क्षेत्र का हिंदू समुदाय बाली से आया है, जिसे कुछ दशक पहले इंडोनेशियाई सरकार ने इस स्थान पर बसाया था।  आज यह समुदाय भारी तनाव में है। दक्षिणी लैपंग के नतर, पैडेंगर्मिन, पेसवारन और सिदोम्योली आदि आस-पास के गांवों में  3 वर्ष के दौरान उन पर 5 बार हमले हुए। फिर भी, यह समुदाय अपनी पीड़ा पर मरहम लगाकर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में बसे जावा से आए इस हिंदू समुदाय की अदम्य शक्ति की हम सराहना की जानी चाहिए।
जकार्ता में हिन्दू शिक्षाविद्
राजधानी जकार्ता विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का केंद्र है, हालांकि यहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं। सरकारी नौकरियों में कार्यरत हिंदुओं की संख्या नाममात्र की है। जकार्ता में कुछ आप्रवासी समुदाय भी हैं जो व्यवसाय और उद्योग चला रहे हैं। सेकोलाह (स्कूल) तिंगी हिंदू कॉलेज में जावा के विभिन्न क्षेत्रों से आए छात्र हैं, हालांकि उनकी संख्या बहुत कम है।
हिंदू धर्म विभाग के महानिदेशक प्रो़ डॉ़  इडा बागुस युधा त्रिगुना और पूरे देश में हिंदू विषयों के विभिन्न विभागों के सभी 9 प्रमुखों के साथ एक बहुत ही उपयोगी बैठक हुई। यह विभाग इंडोनेशिया गणराज्य के पांथिक मामलों के मंत्रालय के अधीन है और मंत्रालय की भव्य इमारत में ही स्थित है। डॉ़ त्रिगुना गरिमा और दृढ़ विश्वास का प्रतीक हैं। उनके नेतृत्व में विभाग अच्छी प्रगति कर रहा है और हिंदू धर्म पर भारत के शिक्षाविदों के साथ नियमित संवाद के लिए तैयार है। हमने इंडोनेशिया में हिंदू धर्म के मुख्यालय पेरिसदा का दौरा किया जो हिंदुओं का इंडोनेशिया सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्थानीय निकाय है। वहां निदेशक मंडल के साथ हमारी एक विस्तृत बैठक हुई। पेरिसदा को भारत के हिंदुओं के साथ संपर्क और नियमित संवाद की उम्मीद है। इंडोनेशिया में श्रेष्ठ इस्लामी प्रथाओं के पालन के साथ-साथ हिन्दू संस्कृति का पोषण एक ऐसी कुंजी है जो देश के लिए शांतिपूर्ण माहौल की नींव गढ़ सकता है।  
(लेखक अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के   महामंत्री हैं)

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

vp cp radhakrishnan releases book rss at 100 ek sadi sankalp ki in delhi

“युवाओं के राष्ट्रीय चरित्र को ढालने वाली आत्मा की कार्यशाला है संघ की शाखा” : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

Young Thinkers Meet Dehradun RSS Arun Kumar Sangh At 100 Ramesh Pokhriyal Nishank Ram Madhav India Foundation

देहरादून: ‘लेखक गांव’ में राष्ट्रीय युवा विचारक बैठक शुरू, संघ सहसरकार्यवाह अरुण कुमार ने ‘RSS@100’ पर दिया व्याख्यान

Azam Khan

बरकरार रहेगी आजम खान की सजा, अपील खारिज, अफसरों को ‘तनखैया’ बताकर किया था जूते साफ करवाने का ऐलान

RSS Bhayyaji Joshi Udaipur Seva Bharati Natural Health Center Inauguration Website Digital Launch

प्राकृतिक चिकित्सा वैकल्पिक नहीं, बल्कि समानान्तर पद्धति: भय्याजी जोशी

श्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

PM मोदी का AI वीडियो वायरल! 22,000 रुपये लगाकर 25 लाख कमाने का झांसा, PIB Fact Check ने बताया फर्जी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पंजाब में आप सरकार के मर्म पर प्रहार कर चुनावी एजेंडा सेट कर गए PM मोदी

Load More

ताज़ा समाचार

vp cp radhakrishnan releases book rss at 100 ek sadi sankalp ki in delhi

“युवाओं के राष्ट्रीय चरित्र को ढालने वाली आत्मा की कार्यशाला है संघ की शाखा” : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

Young Thinkers Meet Dehradun RSS Arun Kumar Sangh At 100 Ramesh Pokhriyal Nishank Ram Madhav India Foundation

देहरादून: ‘लेखक गांव’ में राष्ट्रीय युवा विचारक बैठक शुरू, संघ सहसरकार्यवाह अरुण कुमार ने ‘RSS@100’ पर दिया व्याख्यान

Azam Khan

बरकरार रहेगी आजम खान की सजा, अपील खारिज, अफसरों को ‘तनखैया’ बताकर किया था जूते साफ करवाने का ऐलान

RSS Bhayyaji Joshi Udaipur Seva Bharati Natural Health Center Inauguration Website Digital Launch

प्राकृतिक चिकित्सा वैकल्पिक नहीं, बल्कि समानान्तर पद्धति: भय्याजी जोशी

श्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

PM मोदी का AI वीडियो वायरल! 22,000 रुपये लगाकर 25 लाख कमाने का झांसा, PIB Fact Check ने बताया फर्जी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पंजाब में आप सरकार के मर्म पर प्रहार कर चुनावी एजेंडा सेट कर गए PM मोदी

India UK trade deal

Explainer: UK के साथ व्यापार समझौते से भारत को क्या फ़ायदा होगा?

Journalist Alok Goswami passes away

वरिष्ठ पत्रकार आलोक गोस्वामी का निधन, पाञ्चजन्य के अतुलनीय सहयोगी अब हमारे बीच नहीं रहे

खटीमा: ईसाई बने थारू जनजाति के 36 लोगों ने सनातन धर्म में की घर वापसी, जनेऊ और कलेवा धारण किया

अमेजन से मंगवाई हिंदी की पुस्तक, मिली अंग्रेजी की; शिकायत के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies