| दिंनाक: 31 Jul 2017 10:56:11 |
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चंद दिन पहले दो बड़ी अच्छी खबरें सुनाई दीं। पहली, खेतों में फसल कटाई के बाद बचे पुआल और दूसरे कृषि अवशेषों को जलाकर हवा में जहर घुलने देने की बजाय उनसे बिजली और एथनॉल बनाया जा रहा है। इससे दो फायदे सीधे-सीधे मिल रहे हैं। एक, भरपूर बिजली की उपलब्धता और… दो, किसान की जेब में पैसा। दूसरी, रेलवे ने एक ऐसी रेल चलाई है जिसके डिब्बों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं जो सूरज के ताप से डिब्बे में रखी बैटरी चार्ज करते हैं, जिससे डिब्बे के पंखे चलते हैं, बिजली जलती है।
भारत बदल रहा है। नवाचार के रास्ते, नवोन्मेष की डगर पर चलता हुआ नवीकरणीय ऊर्जा को सृजित-संचित करते हुए आने वाले कल के लिए समृद्धि के प्रयास कर रहा है। स्वागत योग्य हैं ये कदम जो इस रास्ते पर बढ़ चले हैं, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक लीक गढ़ रहे हैं। यह जरूरी भी था। ऊर्जा उत्पादन के परंपरागत स्रोतों, जैसे, कोयला और पानी के लगातार रीतते जाने से पवन और सौर ऊर्जा के क्षेत्रों को खंगालना जरूरी था। खासकर तब जब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद की दर यहां खेती-किसानी के साथ ही कुटीर, मध्यम उद्योगों की खुशहाली पर टिकी हो। खासकर तब जब आज आजादी के 70 साल बाद भी 20.4 करोड़ लोगों तक बिजली पहुंच ही न पाई हो। इसलिए, बदलाव आना था, आ रहा है, और यह सुखद है। तो, इस बार प्रस्तुत है, देश में वैकल्पिक, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों, उद्यमों और कर्मठ ऊर्जा-साधकों के बारे में अद्यतन जानकारी से भरपूर यह विशेष आयोजन