| दिंनाक: 16 Aug 2014 16:15:55 |
|
गत दिनों हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में 'अभ्युदय' संस्था द्वारा 'अखण्ड भारत' विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि 1947 में एक ओर हमें स्वतंत्रता तो मिली, पर उसके साथ ही हमारी मातृभूमि का बंटवारा भी हो गया। यानी एक ओर स्वतंत्र होने का हर्ष, तो दूसरी ओर देश के खण्डित होने का दु:ख भी हुआ। स्वतंत्रता के भान का अभाव, समाज का संगठित न होना, अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति ने हमें गुलाम बनाया। प्राचीनकाल में अपनी सीमाएं ईरान से आस्ट्रेलिया तक थीं। क्या कारण रहा होगा कि हम गुलाम हुए, इस पर हमें गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय का राजनीतिक नेतृत्व कहता रहा कि हम भारत का विभाजन नहीं होने देंगे, लेकिन अदूरदर्शिता, आपसी फूट और संगठित न होने के कारण स्वतंत्रता के रूप में खण्डित भारत मिला। तुष्टीकरण की नीति के चलते महात्मा गांधी और पं नेहरू भी विभाजन को नहीं रोक पाए। आजादी की गाथा वर्तमान में युवा पीढ़ी को स्मरण रखनी चाहिए। कोई भी देश अपने समाज, जागरूक युवाशक्ति तथा सक्षम राजनीतिक नेतृत्व के बल पर एक हो सकता है। बर्लिन की दीवार को तोड़कर पूर्वी-पश्चिमी जर्मनी एक संगठित जर्मन राष्ट्र बना सकते हैं, वियतनाम एक हो सकता है, तो अपना देश भी संगठित समाज, जागरूक युवाशक्ति और सक्षम नेतृत्व के बल पर एक दिन अवश्य अखण्ड होगा, ऐसा अपना विश्वास है। खण्डित भारत फिर अखण्ड होगा और अखण्डित भारत फिर खण्डित नहीं होगा, आज के अवसर पर हम सब यह संकल्प लें। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि थे हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति डॉ. शशि धीमान। अभ्युदय के संयोजक नीताराम ने सबका धन्यवाद किया। -प्रतिनिधि