| दिंनाक: 10 Mar 2014 15:58:01 |
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उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठतम कांग्रेसी नेता एन.डी. तिवारी ने आखिरकार रोहित शेखर को अपना बेटा स्वीकार कर ही लिया। तिवारी का यह कबूलनामा 6 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सामने आया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कबूल किया है कि 34 वर्षीय रोहित शेखर उनका बेटा तथा उज्ज्वला शर्मा रोहित की मां हैं। इससे पहले रोहित खुद को एन.डी. तिवारी का बेटा बताते रहे, लेकिन उससे तिवारी इनकार ही करते रहे। रोहित शेखर को लम्बी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी, 89 वर्षीय तिवारी को सच न स्वीकारने के कारण सर्वोच्च न्यायालय के दखल के बाद डीएनए टेस्ट भी करवाना पड़ा, आखिर डीएनए टेस्ट से साबित हुआ की रोहित तिवारी का ही बेटा है। 2008 में रोहित सर्वोच्च न्यायालय गया, रोहित ने दावा किया था कि तिवारी का उसकी मां से प्रेम संबंध था, उनके शारीरिक संबंध स्थापित हुए और इसके बाद उसका जन्म हुआ। ह्यरोहित का यह कहना, जन्मदिन पर तिवारी मेरे घर आते थे मेरे साथ खेलते थे लेकिन सार्वजनिक तौर पर उसे अपना पुत्र स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। मैं सिर्फ इतना चाहता था कि सार्वजनिक रूप से वे मुझे अपना बेटा स्वीकार करें।ह्ण पितृत्व विवाद का यह मामला अभी भी दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है। रोहित अब सारी बातें भूलकर अपने पिता के साथ वक्त बिताना चाहते हैं।
तिवारी किसी भी सूरत में पितृत्व जांच (एडीए) के लिए तैयार नहीं थे, न्यायालय का यह भी आदेश आया था कि अगर तिवारी डीएनए के लिए तैयार न हों तो जबरन परीक्षण करवाया जाए। आखिर इसी परीक्षण से साबित हो पाया कि रोहित तिवारी का बेटा है। तिवारी ने रोहित को अपने घर बुलाकर कहा कि मैं इस लड़ाई में थक गया हूं। फिर उन्होंने अपने परिचितों के समक्ष रोहित को अपना बेटा स्वीकारा। रोहित शेखर ने कहा ह्यअगर मैं हक जमा लूं तो भी हमारे घाव नहीं भरेंगे, लेकिन मैं उनके साथ कुछ समय बिताना चाहता हूं हमारे मामले ने एक उदाहरण पेश किया है। उम्मीद करता हूं कि इससे उन लोगों को मदद मिलेगी जो इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं।ह्ण
एन.डी. तिवारी के इस मामले से समाज की एक अजीब विडम्बना ही कही जाएगी, भारतीय राजनीति का एक प्रतिष्ठित चेहरा, जो कांग्रेस पार्टी का वरिष्ठ नेता रहा हो। जिसने उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश के राज्यपाल तथा केन्द्र में बड़े विभाग का मंत्री पद सुशोभित किया हो, उन्हें इस सामाजिक शर्मिन्दगी का सामना करना पड़ा है। तिवारी को तब भी ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ा था जब आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहते, महिलाओं के साथ अभद्र मुद्रा की क्लीपिंग मीडिया में आया था। इसे आखिर क्या कहें, एनडी तिवारी का व्यक्तिगत दोहरा चरित्र या उस पार्टी की जीवन शैली, जिसमें शुरू से ही नेता इस तरह के आचरण में लिप्त हैं? आज के दौर में जिसे महिपाल मदेरणा, गोपाल कांडा, अभिषेक मनु सिंघवी आदि नेता अपने आचरण से मीडिया में प्रमुख स्थान बनाए रखते हैं? प्रतिनिधि