विश्व पटल पर गूंज अटल
August 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

विश्व पटल पर गूंज अटल

Written byArchiveArchive
Dec 21, 2013, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 21 Dec 2013 14:20:06

लेखन कर्म से अपनी जीवन यात्रा शुरू करने वाले अटल जी के जीवन के हर पड़ाव पर संघर्षशीलता एवं उतार-चढ़ाव दृष्टव्य होता है। अटल जी को कुशल वक्ता की कला एवं काव्य कला अपने पिताजी पं. कृष्णबिहारी वाजपेयी से विरासत में मिली है।  उनके पिताजी तत्कालीन समय में ग्वालियर राज्य के विख्यात कवि तथा कुशल वक्ता थे। अटल जी के बाबा भी संस्कृति के मूर्धन्य विद्वान थे, परन्तु अटल जी की वाणी पर जिस प्रकार साक्षात् सरस्वती विराजती है वह उनकी ईश्वर प्रदत्त और स्वयं के अध्यवसाय से अर्जित उपलब्धि है।
 संवाद कौशल एवं अपनी भाषण कला के लिए अटल जी विख्यात  हैं एवं श्रोताओं में अति लोकप्रिय हैं। विषयों का गहन विवेचन या प्रतिपादन भी जैसी सर्वजन-सुलभ सरल शब्दावली में करके अर्थशास्त्र से अनभिज्ञ श्रोताओं को भी वे सारी बात जितनी अच्छी तरह से समझा देते हैं वह योग्यता अर्थशास्त्र के पंडितों के लिए भी कठिन है। सहज भाषा के बावजूद अपने कथ्य को कितने स्पष्ट रूप से अटल जी समझाते हैं, इसके लिए संसद में विदेश मंत्रालय की पूरक अनुदान मांगों के अवसर पर लोकसभा में 21 फरवरी, 1958 को दो कटौती प्रस्तावों पर बहस के दौरान अटल जी के भाषण से स्पष्ट होता है। प्रस्तुत उदाहरण में श्री वाजपेयी विदेशों से आने वाले मेहमानों के सत्कार पर व्यय होने वाली राशि और तौर-तरीके के संबंध में संसद में चर्चा में भाग ले रहे हैं। अटल जी कहते हैं- 'मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या यह आवश्यक है कि दिल्ली की नगरपालिका प्रत्येक विदेशी मेहमान को मानपत्र भेंट करके ही स्वागत करे? जब भी कोई मेहमान आते हैं, हम उनका स्वागत करें यह स्वाभाविक है। अतिथि- सत्कार की हमारी पुरानी परम्परा है।' परिवहन तथा संचार राज्य मंत्री- 'स्वाभाविक ही नहीं बल्कि आवश्यक भी है।' श्री वाजपेयी- 'आवश्यकता से स्वभाव अधिक बलवान होता है। जो स्वाभाविक चीज होती है वह स्वभाववश अपने आप अन्दर से आ जाती है और प्रकट हो जाती है, जबकि आवश्यकता में एक बाहर से लाने की भावना प्रकट होती है। अपने मेहमानों का स्वागत करना यह हम भारतीयों के स्वभाव में है़।' श्री दी.चं. शर्मा- 'आप उसको अपोज कर रहे हैं।' श्री वाजपेयी- 'मैं उसको अपोज नहीं कर रहा हूं। जरा ध्यान से सुनिये। मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि स्वागत का हमारा एक स्तर होना चाहिए। जो हमारी आज की स्थिति और पुरानी परम्पराओं के अनुकूल हो। दिल्ली नगरपालिका मानपत्र भेंट करें और उसी से स्वागत हो, या दिल्ली दरवाजे पर बिजलियां जगमगा कर और आसफअली पार्क के एक-एक पत्ते पर एक-एक लट्टू लगा कर अगर हम समझते हैं कि स्वागत-सत्कार का हमारा कर्तव्य पूरा हो गया तो यह ठीक नहीं है और मैं उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूं। आज का हमारा स्वागत भी पंचवर्षीय योजना की सफलता के लिए हम देश में त्याग और बलिदान का जो वातावरण उत्पन्न करना चाहते हैं, उसके अनुकूल होना चाहिए। अगर उससे शान और शौकत टपकती है और अगर आम आदमी को ऐसा अनुभव होता है कि इन स्वागतों के बिना भी हम अपने अतिथि के प्रति प्रेम प्रकट कर सकते हैं तो मैं समझता हूं कि इन स्वागतों के ढांचे में और तौर-तरीकों में कुछ परिवर्तन होना चाहिए।'

भाषा, सहजता, शब्द-चुनाव एवं सांकेतिक भाषा में अपने प्रस्ताव की प्रासंगिकता एवं उसके गुण-दोष के आधार पर उसकी सापेक्षता को सिद्घ करने का उनका अनोखा ही अंदाज था। उपरोक्त उदाहरण में अपने विनम्र अंदाज में उन्होंने विदेशी मेहमानों के स्वागत को भारतीय परंपरानुसार कायम रखते हुए खूबसूरती से उस पर होने वाले खर्चें में कटौती का उदाहरण देकर उसे भारत की स्थिति एवं जनता की भावनाओं से जोड़ा है। इससे स्वागत की मूल भावना को कायम रखते हुए एवं जनता की भावनाओं से जोड़कर उस पर होने वाले व्यय में कटौती का संदेश भी उन्होंने बखूबी दिया है। यह तो एक उदाहरण भर है। ऐसे अनगिनत प्रसंग हैं, जब अटल जी ने अपने अनोखे अंदाज एवं चुटकियों से अपने अभूतपूर्व संवाद कौशल का परिचय दिया।
जिस समय अंग्रेजी बोलने वाले राजनेताओं का बड़ा रुतबा हुआ करता था और उन्हें हिन्दी भाषी राजनेताओं की तुलना में ज्यादा योग्य माना जाता था उस समय अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में विदेश मंत्री के नाते हिन्दी में भाषण करते हुए विश्व मंच पर सर्वप्रथम भारत की राष्ट्रभाषा को गौरव का स्थान दिलाकर उसके नए अध्याय का सूत्रपात किया। वहां से वापसी पर भारत की राजधानी में हिन्दी प्रेमी तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री बाबू जगजीवन राम की अध्यक्षता में अटल जी का सम्मान किया गया। इस समारोह में वक्ताओं ने अटल जी की भूरि-भूरि प्रशंसा की। तब अंत में अटल जी ने कहा हिंदी की बात मत करो, हिंदी में बात करो। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की ह्यनिज भाषा उन्नति अहै सब भाषा को मूलह्ण में पूरी तरह विश्वास करने वाले अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अपने भाषण से भारतेन्दु जी की उक्ति को पूर्णत: चरितार्थ किया।  उनके भाषण में निहित संदेश, उसकी सम्प्रेषणीयता एवं उसके स्तर ने भी सबको प्रभावित किया। भाषण के कुछ अंश यहां प्रस्तुत हैं -ह्यमेरे विचार राष्ट्रों की शक्ति और महिमा के संदर्भ में नहीं हैं। मेरे लिए आम आदमी की गरिमा और मांग ज्यादा महत्वपूर्ण है। हमारी सफलताओं और असफलाओं को मापने का एक ही मापदण्ड होना चाहिए। हम हर आदमी, औरत और बच्चों, सभी लोगों के लिए सामाजिक न्याय और गरिमा के लिए काम कर रहे हैं। इसकी सफलता के लिए यह आवश्यक है कि संयुक्त राष्ट्र संघ मानवता की प्रभावी आवाज बने और राष्ट्रों के बीच अन्तर्संबंधों एवं सहयोग तथा सामूहिक कार्रवाई पर आधारित एक गतिशील मंच इसे बनाया जाए।ह्ण उपरोक्त भाषण को पढ़कर यह आभास होता है कि यह किसी राजनेता का उबाऊ या उपदेशात्मक भाषण भर नहीं वरन् परिस्थितियों को देखते हुए बहुमुखी प्रतिभावान किसी कुशल नेता द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय मंच से दिया गया प्रभावी एवं मर्मस्पर्शी संदेश है।
अटल जी का व्यक्तित्व इतना व्यापक है कि उन पर कई पुस्तकें बन सकती हैं। परन्तु उन पर लिखे गये लेख में यदि उनके अंदर विद्यमान कालजयी कवि की चर्चा न करना, उनके व्यक्तित्व के साथ अन्याय होगा। उनकी कविताओं को पढ़कर विश्वास नहीं होता कि कोई राजनेता इतना उत्कृष्ट कवि हो सकता है। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, जीवन संघर्ष, विश्व शांति एवं राजनेता के  रूप में उनके मन के अंदर की उथल-पुथल का बखूबी वर्णन है। जब वे लिखते हैं- ह्यखड़े देहली पर हो किसने पौरुष को ललकारा, किसने पापी हाथ बढ़ाकर मां का मुकुट उतारा?ह्ण तब मानो वे राष्ट्र के दुश्मनों को चुनौती देते हुए ललकार रहे हैं। एक दूसरी कविता में वे लम्बे संघर्ष के बाद मिली आजादी की सुरक्षा के लिए नसीहत देते हुए कहते हैं- ह्यउस स्वर्ण दिवस के लिए आज से कमर कसें बलिदान करें। जो पाया उसमें खो न जायें, जो खोया उसका ध्यान करें।ह्ण भारत के आत्मसम्मान की अक्षुण्णता के लिए लिखते हैं- ह्यदांव पर सब कुछ लगा है रुक नहीं सकते हैं, टूट सकते हैं, मगर हम झुक नहीं सकते हैं।ह्ण अटल जी की उक्त कविताओं को देखकर लगता है कि मानो वे कोई वीर रस के कवि हों। लेकिन जब हम उनकी एक अन्य कविता ह्यअपने ही मन से कुछ बोलेंह्ण पर नजर डालते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है कि मानो कोई दार्शनिक लिख रहा है एवं कविता के माध्यम से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संदेश दे रहा है। यह कविता बहुत मर्मस्पर्शी है एवं मानव जीवन की यात्रा का वृतांत इसमें वर्णित है। अपनी अंतरचेतना में झांकने एवं उसका आत्मावलोकन करने का खूबसूरत संदेश भी इसमें निहित है। पूरे जीवन चक्र का निचोड़ इस कविता में किस तरह सम्मिलित है यह कविता की निम्न पंक्तियों से समझा जा सकता है:-
 क्या खोया, क्या पाया जग में,
मिलते और बिछड़ते मग में,
मुझे  किसी से नहीं शिकायत,
 यद्यपि छला गया पग-पग में,
एक दृष्टि बीती पर डालें,
यादों की पोटली टटोलें।
पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी,
जीवन एक अनन्त कहानी,
पर तन की अपनी सीमाएं,
यद्यपि सौ शरदों की वाणी,
इतना काफी है अंतिम
दस्तक पर खुद दरवाजा खोलें।
जन्म-मरण का अविरत फेरा,
जीवन बंजारों का डेरा,
आज यहां, कल कहां कूच है,
कौन जानता, किधर सवेरा,
अंधियारा आकाश असीमित,
प्राणों के पंखों को तोलें।
अपने ही मन से कुछ बोलें।
 कुल मिलाकर चाहे एक कुशल संगठक की भूमिका हो, चाहे मंजे हुए राजनेता की, सहृदय कालजयी कवि या फिर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक की, अटल जी जैसा कोई दूसरा नहीं है। यह अटल जी की अभूतपूर्व मेधा का ही परिणाम है कि उन्हें विरोधी और दूसरी पार्टियों में वही सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त है जो अपनी पार्टी के शीर्ष नेता होने के कारण अपनी पार्टी में प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूरदृष्टा, दृढ़ निश्चयी, अविचल और प्रखर प्रतिभा के धनी, अटल जी के व्यक्तित्व को हम परखते हैं तो उनका व्यक्तित्व सबसे ऊंचाई पर व्यक्तित्व की पराकाष्ठा को छूता नजर आता है। आजकल की चरित्रहनन, कीचड़ उछालने वाली राजनीति से दूर साफ-सुथरी छवि एवं व्यापक व्यक्तित्व तथा राष्ट्र के गौरव को शिखर पर पहुंचाने के लिए समर्पित रहने को हमेशा तत्पर रहने वाले बिरले राजनेताओं में उनको शीर्ष स्थान प्राप्त है। अटल जी सत्ता के लिए सिद्घान्तों से समझौता न करने एवं वैचारिक स्वतंत्रता की परम्परा के संवाहक हैं। उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने से इस विश्वास की पुष्टि होती है कि संस्कारित व्यक्ति कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न पहुंच जाय, अपने सद्गुणों को कभी नहीं छोड़ता।

प्रो. बृजकिशोर कुठियाला

(लेखक माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति हैं)  

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका

ध्रुव जुरेल

IND vs SL : ध्रुव जुरेल का धमाकेदार शतक, बाजुओं पर ‘जय जवान-जय किसान’, कारगिल हीरो पिता का बढ़ाया मान

Odisha Weather: बारिश-बाढ़ की स्थिति पर सरकार की कड़ी नजर, प्रशासन 24 घंटे सतर्क

तस्करों के पास से बरामद हेरोइन और पिस्तौल

पंजाब पर विदेशी तस्करों की नजर: अमृतसर में 6 किलो हेरोइन और तुर्की की पिस्तौल बरामद, पांच गिरफ्तार

सुकमा में नक्सली डम्प से 23 हथियार, 492 जिंदा राउंड और 240 जिलेटिन स्टिक बरामद

उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को समीक्षा बैठक की

उत्तराखंड में SIR : लापरवाह अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने की समीक्षा बैठक

Load More

ताज़ा समाचार

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका

ध्रुव जुरेल

IND vs SL : ध्रुव जुरेल का धमाकेदार शतक, बाजुओं पर ‘जय जवान-जय किसान’, कारगिल हीरो पिता का बढ़ाया मान

Odisha Weather: बारिश-बाढ़ की स्थिति पर सरकार की कड़ी नजर, प्रशासन 24 घंटे सतर्क

तस्करों के पास से बरामद हेरोइन और पिस्तौल

पंजाब पर विदेशी तस्करों की नजर: अमृतसर में 6 किलो हेरोइन और तुर्की की पिस्तौल बरामद, पांच गिरफ्तार

सुकमा में नक्सली डम्प से 23 हथियार, 492 जिंदा राउंड और 240 जिलेटिन स्टिक बरामद

उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को समीक्षा बैठक की

उत्तराखंड में SIR : लापरवाह अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने की समीक्षा बैठक

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया, 28 अगस्त को ही बांधी जाएगी राखी

CM धामी ने कहा- 500 वर्षों से अधिक पुरानी हिलजात्रा पिथौरागढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान

रोपवे परियोजनाओं के संबंध में समीक्षा बैठक करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

रोपवे परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर मुख्यमंत्री ने जताई नाराजगी, राज्य स्थापना दिवस तक दी समय-सीमा

Pushkar Singh Dhami

जौनसार-बावर के लगभग 700 बीघा जनजातीय भूमि प्रकरण पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा- मामला गंभीर, शीघ्र होगी कार्रवाई

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies