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अभी 31 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने सूर्यानेल्ली बलात्कार मामले में एक को छोड़ बाकी सब आरोपियों को छोड़े जाने का अपना फैसला पलट दिया। कांग्रेस एक बार फिर राज्यसभा के उपसभापति और इस मामले में संलिप्त होने के आरोपी कुरियन के बचाव में उतर आयी है। हालांकि, इस बार पार्टी खुद घेरे में फंस गयी है क्योंकि नये-नये रहस्योद्घाटनों ने कुरियन के दावों की पोल खोल दी।
कांग्रेसी सूत्र बताते हैं कि कुरियन के आका और रक्षामंत्री ए.के. एंटोनी ने 10 फरवरी को तिरुअनंतपुरम के दौरे से लौटकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताया था कि 1996 में 16 वर्ष की लड़की से बलात्कार के मामले में कुरियन की संलिप्तता की फिर से जांच करने की मांग के पीछे है राज्य इकाई में गुटबाजी। 1996 में जब यह मामला उजागर हुआ था तब एंटोनी ही राज्य के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने सोनिया गांधी को बताया कि तमाम अदालतों और तीन पुलिस जांचों ने कुरियन को बेदाग करार दिया था।
कांग्रेस कुरियन की मासूमियत पर भले ही कितना यकीन करे लेकिन हाल में आए चार बयानों ने कुरियन की सुनाई कहानी पर शक की सूई घुमा दी है कि वह उस वक्त कुमिली गेस्ट हाउस के आस-पास नहीं थे जब उन पर उस लड़की के बलात्कार का आरोप लगाया जाता है। कुरियन ने हमेशा दावा किया कि वह उस दिन और उस समय कुमिली से 2 घंटा दूर तिरुवल्ला में थे।
अभी 8 फरवरी को, इस मामले में एकमात्र सजा प्राप्त व्यक्ति और 2010 में जमानत के दौरान फरार होकर अब छुपे फिर रहे, एस.एस. धर्मराजन ने एक मलयालम टेलीविजन चैनल को एक अलग ही कहानी सुनायी। उसने बताया, 'मैं 19 फरवरी 1996 को अपनी अम्बेसडर कार में कुरियन को कुमिली के उस गेस्ट हाउस में उस लड़की के कमरे तक छोड़कर आया था।' पूर्व अधिवक्ता धर्मराजन यह भी कहा कि उसे इस मामले की जांच करने वाले विशेष जांच दल के मुखिया पुलिस अधिकारी सिबी मैथ्यूज ने चेतावनी दी थी कि जांचकर्ताओं के सामने या अदालत में कुरियन के नाम का जिक्र न करे।
धर्मराजन के इस बयान से एक दिन पहले स्थानीय भाजपा नेता के. एस. राजन ने बताया था कि उस दिन वे कुरियन से तय कार्यक्रम के तहत तिरुवल्ला में 7 बजे की बजाय 2 घंटा पहले 5 बजे मिले थे। राजन का 3 अन्य नेताओं के साथ कुरियन से 7 बजे मिलना तय था। राजन ने बताया, 'मैंने विशेष जांच दल को तब भी बताया था कि हम कुरियन से शाम 5 बजे मिले थे, लेकिन विशेष जांच दल ने अपनी रपट में 7 बजे का समय ही लिखा। मैं मैथ्यूज पर मुकदमा करने के बारे में सोच रहा हूं'।
9 फरवरी को कुरियन ने तिरुवल्ला में मौजूद होने का जो अपना वक्त बताया था उसको लेकर विरोधाभास फिर सामने आये। कुरियन ने तिरुवल्ला में जिस घर में उस दिन देर रात तक रुकने का दावा किया था उसके मालिक के.के. इडिक्कुला की विधवा अन्नम्मा ने टेलीविजन चैनल को बताया कि असल में कुरियन उसके घर से शाम 6 बजे निकल गये थे। कुरियन ने इस पर कहा कि अन्नम्मा इतनी बूढ़ी हो गयीं हैं कि 17 साल पहले की घटना उन्हें याद नहीं रह सकती। हालांकि अन्नम्मा ने अगले दिन यह भी कहा कि हो सकता है कि उन्हें चीजें सही तरह से याद न हों। अन्नम्मा के इस बयान के बाद कुरियन के विरोधियों ने कहा कि अन्नम्मा पर बयान से पलटने के लिए दवाब डाला गया था।
अगर यह कांग्रेस को परेशान करने के लिए काफी नहीं था तो, एक समाचार चैनल ने 8 फरवरी को हुई एक टेलीफोन वार्ता प्रसारित कर दी जिसमें कुरियन से तिरुवल्ला में मिलने वाले तीन नेताओं में से एक, चार्ल्स अब्राहम इन बयानों को सही ठहराते प्रतीत हुये। टेप में अब्राहम एक दोस्त से यह कहते हुए सुने गये कि उन्होंने, कुरियन कुमिली में नहीं थे यह दर्शाने वाले एक सबूत में जोड़तोड़ करने में कुरियन की मदद की थी। अब अब्राहम कहते हैं कि फोन वार्ता का टेप फर्जी है।
कुरियन पर आज भारी दबाव है। जब राज्यसभा महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराधों के विरुद्ध अध्यादेश पर बहस करेगी उस वक्त हो सकता है कि सभापति की कुर्सी पर वह ही बैठे हों। भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा कुरियन के इस्तीफे की मांग के चलते कांग्रेस पर उन्हें हटाने का दबाव है।
संसद के बाहर भी यह मामला कुछ अलग तरह के विवाद पैदा कर रहा है। 2005 में इस मामले में एक छोड़कर सभी को बरी कर देने वाले केरल उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज आर. बसंत 9 फरवरी को एक समाचार चैनल पर यह कहते देखे गये कि 'बलात्कार की शिकार वह लड़की बाल यौनकर्मी थी और आरोपी के साथ यौन संबंध बनाने के लिए खुद ही राजी हुई थी।' इस बयान के बाद महिला समूहों ने बसंत से माफी मांगने की मांग की है। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में केरल का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के समूह में से भी हटाने की मांग की है। उधर अनिवासी भारतीय मामलों के केन्द्रीय मंत्री वायलार रवि ने महिलाओं को 11 फरवरी को अपने उस बयान से नाराज कर दिया जब कुरियन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने एक महिला पत्रकार से कहा कि वह कुरियन के पीछे क्यों पड़ी हैं। उन्होंने यहां तक कहा, 'क्या आपको उनसे कोई दिक्कत हुई है?' इसके बाद ऐसा हल्ला मचा की रवि को माफी मांगनी पड़ी।
केरल सरकार अब भी कुरियन के पक्ष में बोल रही है और हाल में उजागर हुयी बातों को बेबुनियाद बताती है। राज्य के गृहमंत्री राधाकृष्णन और विधिक अधिकारी आसफ अली, दोनों का कहना है कि अभी सामने आए आरोपों में कुछ नया उजागर नहीं हुआ है। वे केरल उच्च न्यायालय और सवोर्च्च न्यायालय द्वारा कुरियन को पहले दी गयी 'क्लीन चिट' की ही रट लगाए हैं। लेकिन 31 जनवरी, 2013 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2007 में कुरियन को बरी करने वाले अपने ही फैसले को पलटने के बाद यह साफ है कि दागी कुरियन और उनकी पार्टी कांग्रेस अब भी भंवर से उबरे नहीं कहे जा सकते।
कलंक की कथाएं अनेक
सुशील शर्मा, मनु शर्मा, ए.डी. तिवारी, गोपाल कांडा…
सुशील शर्मा – कांग्रेस विधायक पर जुलाई 1995 में अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या करके उसके शरीर के हिस्से तंदूर में जला देने का आरोप। नवम्बर 2003 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने फांसी की सजा बरकरार रखी।
मनु शर्मा – कांग्रेस सांसद विनोद शर्मा के इस बेटे पर अप्रैल 1999 में बार में काम करने वाली जेसिका लाल की हत्या का आरोप।
ए.डी. तिवारी – आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री 86 वर्षीय तिवारी पर बिन ब्याहे पिता होने का आरोप। डीएनए जांच से मुकरे। आंध्र के राज्यपाल का पद छोड़ना पड़ा क्योंकि राजभवन में उनके साथ तीन लड़कियों की अशोभनीय तस्वीरें प्रसारित हुई थीं।
चंद्रमोहन– वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भजनलाल के बड़े बेटे और हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने मतांतरण करके फिजा नामक महिला से प्रेमविवाह किया फिर तलाक दिया। बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हुई।
महिपाल मदेरणा– राजस्थान में कांग्रेस के इस पूर्व मंत्री पर दिसम्बर 2011 में भंवरी देवी नामक महिला से अनैतिक संबंध होने और बाद में उसकी हत्या में संलिप्त होने का आरोप।
अभिषेक मनु सिंघवी– कांग्रेस प्रवक्ता सिंघवी को एक महिला के साथ अभद्र तस्वीरें प्रसारित होने के बाद प्रवक्ता पद छोड़ना पड़ा था।
गोपाल कांडा– हरियाणा की कांग्रेस सरकार में गृहमंत्री रहे दबंग विधायक कांडा पर अपनी ही कंपनी में कार्यरत गीतिका शर्मा को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप।
इसके अलावा कांग्रेस पार्टी में ऐसे मंत्रियों, सांसदों, विधायकों की कमी नहीं है जिन पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन आलाकमान के अभयदान से शायदकानून के शिकंजे में नहीं फंसे हैं। कुरियन ऐसों में से ही एक बताए जाते हों, तो आश्चर्य कैसा!











