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गत 27 जनवरी को रा.स्व.संघ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 'नव चैतन्य शिविर' का साहिबाबाद (उ.प्र.) में समापन हो गया। शिविर में संघ के मेरठ प्रांत के 1011 महाविद्यालयीन कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सभी कार्यकर्ता दायित्वयुक्त थे। प्रांत का यह तीसरा 'नव चैतन्य शिविर' था। यहां कार्यकर्ताओं को शारीरिक-बौद्धिक क्षमता बढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया।
शिविर के समापन समारोह की अध्यक्षता स्वामी विवेकनाथ तीर्थ ने की, जबकि मुख्य वक्ता रा.स्व.संघ के अ.भा. सह सम्पर्क प्रमुख श्री राममाधव थे। श्री राममाधव ने अपने संबोधन में कहा कि रा.स्व.संघ स्वामी विवेकानंद के विचारों के अनुरूप ही प्रशिक्षण देता है। स्वस्थ शरीर अथवा स्वस्थ मन वाले अर्थात दृढ़ हृदय और फौलादी शरीर वाले युवा, जिनमें देश के प्रति अटूट श्रद्धा है, का निर्माण करना संघ को अभीष्ट है। संघ कहता है कि राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास के प्रति अनुपम गर्व की भावना रखो। विश्व जिसके सामने नतमस्तक था, उस सभ्यता को गौरव दृष्टि से देखो। वर्तमान के प्रति मन में पीड़ा रखो और भविष्य के प्रति आशान्वित रहो, भविष्य निर्माण हेतु परिश्रम करो।
स्वामी विवेकानंद की सार्द्ध शती का जिक्र करते हुये उन्होंने उनके इस कथन की ओर ध्यान खींचा कि 'हमें ऐसे युवक चाहिए जिनके अंदर मातृभूमि के लिये वेदना हो और देश के लिये सब कुछ दांव पर लगाने की तत्परता हो'। संघ ऐसे ही युवा तैयार कर रहा है।
शिविर का विशेष आकर्षण 'एक दौड़ देश के लिये' रही, जिसमें सभी कार्यकर्ता अपने हाथों में 63 मीटर लंबा तिरंगा झंडा लेकर 5 किलोमीटर तक दौड़े। साहिबाबाद की सड़कों पर यह दृश्य देखने के लिये जनता उमड़ पड़ी। सभी कार्यकर्ता 'भारतमाता की जय', 'वंदेमातरम्' जैसे उद्घोष लगाते हुए दौड़ रहे थे। दौड़ का समापन शिविर स्थल पर हुआ, जहां भारतमाता पूजन किया गया। इस अवसर पर रा.स्व.संघ के अ.भा. सह-बौद्धिक प्रमुख श्री महावीर ने कहा कि भारतमाता की पूजा के लिए केवल भक्ति ही नहीं, शक्ति भी जरूरी है। शक्ति संपादन के लिए देशभक्तिपूर्ण अनुशासित संगठन की आवश्यकता है। कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचारक श्री शिव प्रकाश भी उपस्थित थे। शिविर में रात्रि के एक कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन भी हुआ। अजय मित्तल











