क्या पाकिस्तान कश्मीर में फिर दोहराएगा एक और कारगिल?
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क्या पाकिस्तान कश्मीर में फिर दोहराएगा
नरेन्द्र सहगल
भ्रष्टाचार और कालेधन के विरोध में उठ रही देशव्यापी मुखर आवाज को खामोश कर देने, अहिंसावादी सत्याग्रहियों को कुचल डालने और विपक्षी दलों को पछाड़ देने के लिए दिन-रात एक कर रही सरकार को देश की सीमाओं पर बढ़ती जा रही शत्रु देशों की हलचल का कोई ध्यान नहीं है। चीन और पाकिस्तान की संयुक्त भारत विरोधी गतिविधियों की अनदेखी करके भारत सरकार और कांग्रेस पार्टी के सामने एक ही राजनीतिक एजेंडा रह गया है कि किसी भी प्रकार से अपने खोए हुए मुस्लिम वोट बैंक को अपनी झोली में डाल लिया जाए। भारत की यही रणनीति चीन और पाकिस्तान दोनों को उत्साहित करने में मदद कर रही है।
कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति
भारत के साथ मित्रता और वार्तालाप का नाटक करने वाला पाकिस्तान अपने साथ लगती भारतीय सीमा विशेषतया जम्मू-कश्मीर की सीमा पर एक दूसरा कारगिल रचने की तैयारियां कर रहा है। इस बार पाकिस्तान के सेनाधिकारियों ने नियंत्रण रेखा पर स्थित जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के फरकियान क्षेत्र को चुना है। सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय सेना तो सतर्क है परंतु भारत सरकार की कमजोर रणनीतिक इच्छाशक्ति सेना का मनोबल तोड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि गत 30 जुलाई की रात को पाकिस्तान के रेंजरों (सीमा सुरक्षाकर्मी) ने भारत की सीमा पर उस समय अचानक गोलीबारी प्रारंभ कर दी थी जब पाकिस्तान की विदेशमंत्री हिना रब्बानी खार नई दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास में कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से बात करने के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री से हाथ मिला रही थीं। इधर वार्तालाप और उधर गोलीबारी, यही पाकिस्तान की भारत केन्द्रित विदेश नीति का आधार है जिस पर खड़े होकर पाकिस्तान भारत की सुरक्षा/अखंडता को न केवल चुनौती दे रहा है, अपितु अपनी भावी सैनिक कारगुजारियों का संकेत भी दे रहा है। न जाने क्यों हमारे देश की सरकार इस विषय पर मौन रखे हुए है जबकि हमारी फौज पूरी तरह सतर्क है।
भारतीय सैनिकों के सिर काटे
गत जुलाई के अंतिम सप्ताह में पाकिस्तान के साथ लगती जम्मू-कश्मीर की सीमा पर जो सैन्य हलचलें हुई हैं वे रोंगटे खड़े करने वाली हैं। पाकिस्तान के सैनिकों ने दो भारतीय सैनिकों के सिर काट लिए। इतना ही नहीं वे इन सिरों को अपने साथ भी ले गए। भारत की सीमा के अंदर घुसकर इस प्रकार दुस्साहस करने की घटना का किसी ने आज तक संज्ञान नहीं लिया। यह भारत की चाकचौबंद सुरक्षा-व्यवस्था पर एक गहरा सवालिया निशान है और साथ में रक्षा मंत्रालय सहित पूरी सरकार को भी कटघरे में खड़ा करने वाला संवेदनशील मुद्दा भी।
इस सनसनीखेज समाचार को दैनिक जागरण ने अपने सात जुलाई के अंक में प्रथम पृष्ठ पर इस तरह दिया है व्बीती तीस जुलाई को कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा पर स्थित फरकियान गली में जो घुसपैठ हुई थी, वह सामान्य नहीं थी। उसमें आतंकियों के दल के साथ पाकिस्तानी सेना का कमांडो दस्ता भी था। इन लोगों ने वहां टेंपल पोस्ट के आगे नाका लगाने जा रहे जवानों पर घात लगाकर हमला किया था।व् हालांकि भारतीय सेना की एक टुकड़ी ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पाकिस्तानी हमलावरों और घुसपैठियों को खदेड़ दिया परंतु वे दो भारतीय सैनिकों के सिर काटकर अपने साथ ले जाने में सफल हो गए।
घुसपैठियों में शामिल पाक सैनिक
यह दोनों सैनिक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और हल्द्वानी इलाके के रहने वाले थे। भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट के हवलदार जयपाल सिंह और लांसनायक देवेन्द्र सिंह की शहादत की पुष्टि रक्षा मंत्रालय के श्रीनगर स्थित प्रवक्ता ले.कर्नल जे.एस.बराड़ ने कर दी थी। परंतु उन्होंने इस घटना को घुसपैठ का साधारण हादसा करार दिया। यहीं पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न पैदा होता है कि भारतीय क्षेत्र में किए गए पाकिस्तानी सेना के इस दुस्साहस को नाकाम करने में भारतीय सैनिक क्यों और कैसे चूक गए?
समाचार के अनुसार व्दोनों सैन्यकर्मियों के पाकिस्तानियों द्वारा सिर काटे जाने की असलियत तब खुली जब उनका अंतिम संस्कार किया जाने लगा। अधिकारियों ने दोनों जवानों के शव उनके परिवार जनों को यह कर दिखाने से इनकार कर दिया कि आतंकियों ने आरपीजी (राकेट प्रोपैल्ड ग्रेनेड) से उन पर हमले किए थे, जिससे उनके सिर उड़ गए।व् इस असाधारण घुसपैठ से यह तो स्पष्ट हो ही गया कि पाकिस्तान के सैनिक भी भारतीय सीमा में घुसपैठ करने में सफल हो जाते हैं।
पाकिस्तान की घुसपैठ-रणनीति
प्राय: इसी प्रकार की परिस्थितियां 1999 में हुए भारत-पाक कारगिल युद्ध के समय भी बनीं थीं। पाकिस्तान के सैकड़ों सैनिक सादे वेष में हथियारों के साथ सीमा पार करके कारगिल की पहाड़ियों पर काबिज हो गए थे। इन पाकिस्तानी सशस्त्र घुसपैठियों ने अनेक भारतीय चोटियों, गुफाओं और जंगलों में अपने पक्के बंकर स्थापित कर लिए थे। कई महीनों तक किसी को पता तक नहीं चला था। इन घुसपैठियों द्वारा भारतीय फौजी ठिकानों पर जब हमले शुरू किए गए तब हमारे सैन्य प्रतिकार से भारतीय चोटियों को मुक्त करवाया जा सका। पाकिस्तान अब फिर पहले से भी ज्यादा बेहतर और ताकतवर ढंग से उसी कारगिल रणनीति के पराजित इतिहास को सफलतापूर्वक दोहराने की फिराक में है।
सशस्त्र घुसपैठ की पाकिस्तानी रणनीति एक साथ कई निशानों पर मार करती है। सीमा पर हलचल करके भारतीय सैनिकों को रक्षात्मक कार्रवाई में उलझाए रखना, जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश के बड़े शहरों में हिंसा फैलाना और कश्मीरी युवकों को आतंकी संगठनों में भर्ती करके प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजना। ध्यान देने की बात है कि यह घुसपैठिए कश्मीर घाटी के एक विशेष समुदाय के घरों में ठहरते हैं और बाद में इन्हीं की सहायता से पहाड़ों और जंगलों में अपने गुप्त ठिकाने बना लेते हैं। पाकिस्तान की यह घुसपैठ-रणनीति 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय से ही चल रही है।
सुरक्षा पर सवालिया निशान
विचारणीय प्रश्न यह भी है कि पाकिस्तानी रेंजरों की कवरिंग फायर की आड़ में भारतीय क्षेत्रों में घुसने वाले प्रशिक्षित आतंकवादी पकड़ में क्यों नहीं आते? पाकिस्तान के साथ लगती जम्मू-कश्मीर की 1267 किलोमीटर की सीमा (अंतरराष्ट्रीय सीमा/नियंत्रण सीमा) पूरी तरह सील है। बिजली के करंट वाली कांटेदार तारों का ऊंचा जाल पूरी सीमा पर बिछा हुआ है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल की गश्ती टुकड़ियां 24 घंटे मुस्तैदी से गश्त लगाती हैं। थोड़े-थोड़े अंतराल पर ऊंचे-ऊंचे निगरानी टावर हैं जिन पर अत्याधुनिक कैमरे लगे हैं। इन टावरों पर तैनात जवान अंधेरे में दूर तक देख सकने वाली दूरबीनों के साथ 24 घंटे तैनात रहते हैं। सेना की चौकियों, बंकरों और मोर्चों पर सशस्त्र जवान सदैव तैयार रहते हैं। आधुनिक राडारों, वायरलैस सिस्टम और आवाज को कैद करने वाले यंत्रों को स्वचालित सिग्नल पर दिन-रात सक्रिय रखा जाता है।
एक क्षण के लिए भी न रुकने वाली सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद अगर पाकिस्तान के सैनिक घुसपैठिए भारतीय क्षेत्र में घुसकर दो जवानों को मारकर उनके सिर अपने साथ ले जाते हैं तो इससे बड़ी सुरक्षा की नाकामी और क्या होगी? चिंता का विषय यह भी है कि हमारे सीमा प्रहरियों से आंख बचाकर घुसपैठ करने में सफल होने वाले आतंकी युवक अपने स्थानीय गाइड की सहायता से अपने सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचते हैं। वहां कुछ दिन ठहरने के बाद अपने गंतव्य स्थान पर जाकर हिंसक वारदात करते हैं और जो बच जाते हैं वे फिर उन्हीं रास्तों और तौर तरीकों से वापस पाकिस्तान भाग जाते हैं।
पाक सरकार का पूरा समर्थन
भारत सरकार की लाचारी, अकर्मण्यता, नासमझी और कायरता पर सभी देशभक्त संगठन और लोग आश्चर्यचकित हो रहे हैं और उधर पाकिस्तान सरकार और सेना कश्मीर की आजादी के मसले पर अपनी बयानबाजी के साथ अपनी भारत विरोधी हरकतों में भारी इजाफा करते चले जा रहे हैं। पाकिस्तान के शासकों के वक्तव्य, सीमा पर गोलीबारी, हथियारबंद घुसपैठ और कश्मीर घाटी में पाकिस्तान समर्थक माहौल बनाया जाना इन चार पायों पर निर्मित पाकिस्तान की रणनीति का स्पष्ट दृश्य गत 14 अगस्त (पाकिस्तान के निर्माण दिवस) को दिखाई दिया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने अपनी जनता के नाम संदेश देते हुए भारत सहित सारे संसार को अपने असली इरादे बता दिए हैं- व्इस सच्चाई से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कश्मीर पाकिस्तान की दुखती रग है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को स्वीकार किया है…पाकिस्तान कश्मीरियों को निर्बाध रूप से नैतिक, कूटनीतिक एवं राजनीतिक समर्थन देता रहेगा ताकि वे अपना अधिकार प्राप्त कर सकें।व् इस प्रकार के पाकिस्तानी शासकों से यह उम्मीद करना कि वे कश्मीर में हो रही सशस्त्र घुसपैठ को रोकेंगे, कोरी मृगमरीचिका ही होगी।
जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कश्मीरियों को समर्थन जारी रखने की घोषणा कर रहे थे, उसी वक्त व्जम्मू-कश्मीर में कई जिलों में रविवार को पाकिस्तानी झंडे लहराए गए…किश्तवाड़ के जिस चौगान में सोमवार को भारतीय स्वतंत्रता दिवस आयोजित होना था, वहीं अलगाववादियों ने पाकिस्तानी झंडे लहराकर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया।
ठोस नीति और सख्त कार्रवाई
इसी दिन जम्मू संभाग के साम्बा सीमांत क्षेत्र में पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय चौकियों पर गोले बरसाए। इसी तरह कुपवाड़ा सेक्टर में भी सीमा पार से कई घंटे लगातार गोलीबारी होती रही। गोलीबारी और सशस्त्र घुसपैठ की इस पाकिस्तानी फौजी मुहिम के चलते कश्मीर सहित भारत में व्याप्त आतंकवाद को समाप्त करना असंभव है। यह काम कोरी वार्ताओं से संभव नहीं होगा। वास्तव में भाईचारे की भाषा को पाकिस्तान समझता ही नहीं है।
उसकी नजर में बातचीत करना भारत की कमजोरी और मजबूरी है। भारत-पाक के मध्य हुए चार बड़े युद्धों, आतंकी हादसों और घुसपैठ के बाद भारत द्वारा वार्ता की मेजों पर टेके गए घुटनों से पाकिस्तान ने यही निष्कर्ष निकाला है कि भारत सरकार इस बुजदिली को बरकरार रखेगी और पाकिस्तान के इरादे सफल होते रहेंगे।
अत: वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर अपने देश की सुरक्षा, स्वाभिमान एवं अखंडता को बचाने के लिए भारत सरकार को एक ठोस और सख्त रणनीति अपनानी होगी। अन्यथा पाकिस्तानी घुसपैठ जारी रहेगी, आतंकी धमाके होते रहेंगे और देश के बेगुनाह लोग मरते रहेंगे, उजड़ते रहेंगे। अपने देश की सेना, राजनीतिक/सामाजिक संगठन और जनता तैयार है। गेंद सरकार के पाले में है। यह समय पाकिस्तान के नापाक इरादों को कुचल देने का है। कोताही खतरनाक साबित होगी।











