Archive भ्रष्टाचार और घोटालों में आकण्ठ डूबी सरकार, आतंक के सामने घुटने टेकती सरकार, संवैधानिक संस्थाओं को जेब में डालने को आतुर सरकार, विकास दर को रसातल में ले जाकर महंगाई और बेरोजगारी से लापरवाह सरकार और सबसे बढ़कर देशहित को तिलाञ्जलि देने को तैयार इस सरकार ने खोया जनता का विश्वास। अब कितने दिन की यह सरकार?