प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान के दौरे पर हैं। जहां वह आज देश की राजधानी बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान शाम को होगी। दोनों नेता दिसंबर 2025 के वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद पहली बार आमने-सामने होंगे। इसके बाद वे 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भी मिलेंगे।
बैठक का मकसद और समीक्षा
विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेता भारत-रूस विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा करेंगे। क्रेमलिन ने भी इसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों वाली वार्ता बताया है। बैठक उस समय हो रही है जब अमेरिका ने रूस से कारोबार करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाए हैं और भारत-अमेरिका संबंधों में कुछ मुद्दे सहज नहीं हैं।
ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति मुख्य एजेंडा
ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति इस बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा रहेगा। भारत ने साफ किया है कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आपूर्ति में अनिश्चितता की वजह से रूस से तेल और उर्वरक की आपूर्ति उसकी प्राथमिकता है। रूस इस समय भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया मॉस्को यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने ईंधन और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया था। बैठक में दीर्घकालिक अनुबंध, भुगतान व्यवस्था और व्यापार असंतुलन दूर करने पर जोर रहने की संभावना है।
व्यापार असंतुलन और लक्ष्य
दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ा है, लेकिन इसमें रूसी ऊर्जा निर्यात का बड़ा हिस्सा है। भारत चाहता है कि रूस भारतीय फार्मा, आईटी, कृषि और उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपना बाजार और खोले। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी कारोबार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है।
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रक्षा सौदे
रक्षा डिलीवरी भी एजेंडे में ऊपर होगी। एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की शेष डिलीवरी, अतिरिक्त मिसाइलों का स्टॉक और भारत में रखरखाव-मरम्मत सुविधा पर चर्चा हो सकती है। दोनों देश सह-उत्पादन और स्पेयर पार्ट्स के स्वदेशीकरण पर भी बात कर रहे हैं। इसकी समीक्षा होने की संभावना है।
अमेरिका की तरफ से प्रतिबंध और कठोर होने की संभावनाओं के बीच दोनों नेता द्विपक्षीय भुगतान तंत्र को व्यापक और सुरक्षित बनाने पर भी बात करेंगे। उद्देश्य प्रतिबंधों के बीच व्यापार जारी रखने के व्यावहारिक उपाय खोजना है। परमाणु ऊर्जा, उर्वरक संयंत्र और उच्च तकनीक सहयोग को दोनों पक्ष भविष्य के स्तंभ मानते हैं। पुतिन ने हाल में इन्हीं क्षेत्रों में प्रगति का उल्लेख किया था।

















