पंजाब में अवैध कन्वर्जन और विदेशी फंडिंग को लेकर संदेह के दायरे में आए पास्टर अंकुर नरूला पर ईडी का शिकंजा कस गया है। जालंधर स्थित चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स के संचालक पास्टर अंकुर नरूला की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने उसके खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में अदालत में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की। नरूला पर चमत्कार के नाम पर लोगों को गुमराह करने से लेकर वित्तीय अनियमितताओं तक के गंभीर आरोप हैं।
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की आशंकाओं के चलते यह जांच शुरू की थी। आरोपों में विदेशी मिशनरियों को टूरिस्ट वीजा पर भारत बुलाकर पांथिक गतिविधियों में शामिल करना भी है, जिसे विदेशी अधिनियम 1946 का उल्लंघन माना गया है। इसके अलावा, नरूला की संस्था पर बिना विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम पंजीकरण के विदेशी चंदा लेने और बिना जीएसटी बिल के अभिषेक तेल व घडिय़ां बेचने का भी आरोप है।
कई एजेंसियां कर रहीं जांच
मामले की जांच सिर्फ ईडी तक सीमित नहीं है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो भी नरूला पर लगे आरोपों की पड़ताल कर रही है। अदालत ने सीबीआई को भी निर्देश दिया है कि वह अपनी जांच रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में ही जमा करे। साथ ही, कोर्ट ने सख्ती से हिदायत दी है कि इस स्तर पर मामले से जुड़ा कोई भी पक्ष मीडिया से किसी तरह की जानकारी साझा नहीं करेगा। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होनी है।
कौन है अंकुर नरूला?
अंकुर नरूला जालंधर-नकोदर रोड पर स्थित खाम्बरा गांव में पेंटेकोस्टल चर्च के तहत चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स चलाता है। एक हिंदू खत्री परिवार में जन्मे नरूला ने अपने परिवार का मार्बल और टाइल्स का व्यवसाय छोडक़र ईसाई मत अपना लिया था। उसने साल 2008 में इस चर्च की स्थापना की थी। इस चर्च में अवैध रूप से कन्वर्जन का गंदा खेल खेले जाने की खबरें आती रही हैं।

















