31 अगस्त का दिन भारतीय अंतरिक्ष इतिहास के लिए काफी खास माना जाता है। इस दिन भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की थीं। एक ओर भारत का संचार उपग्रह इनसैट-1बी अंतरिक्ष में पहुंचा, वहीं दूसरी ओर नौसेना के लिए बनाए गए विशेष उपग्रह जीसैट-7 का सफल प्रक्षेपण किया गया। इन दोनों मिशनों ने भारत की संचार और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
31 अगस्त 1983 को भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई। अमेरिका के केप कैनेडी से भारत के संचार उपग्रह इनसैट-1बी को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया। इसे अमेरिकी अंतरिक्ष यान स्पेस शटल चैलेंजर की मदद से अंतरिक्ष में पहुंचाया गया था। इनसैट-1बी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण उपग्रह था। इसका मुख्य उद्देश्य देश में संचार सेवाओं को बेहतर बनाना था। इसके जरिए टेलीविजन प्रसारण, दूरसंचार और मौसम संबंधी जानकारी को बेहतर तरीके से पहुंचाने में मदद मिली। इस मिशन से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई मजबूती मिली और देश में उपग्रह आधारित संचार व्यवस्था के विकास को बढ़ावा मिला।
इसके ठीक 30 साल बाद, 31 अगस्त 2013 को भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। फ्रेंच गुयाना के कौरू अंतरिक्ष केंद्र से भारत के रक्षा उपग्रह जीसैट-7 को यूरोपीय रॉकेट एरियन-5 की मदद से सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया। जीसैट-7 को खास तौर पर भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। यह उपग्रह समुद्र में मौजूद भारतीय नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों और विमानों के बीच सुरक्षित संचार में मदद करने के लिए बनाया गया था। इसके जरिए नौसेना को समुद्री क्षेत्र में अपनी गतिविधियों पर बेहतर निगरानी और समन्वय करने में मदद मिली। इस तरह 31 अगस्त भारत के अंतरिक्ष इतिहास में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियों से जुड़ा हुआ है। इनसैट-1बी ने भारत की संचार व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया, जबकि जीसैट-7 ने देश की रक्षा और नौसेना की संचार क्षमता को नई ताकत दी।
1983 – केप कैनेडी, भारतीय उपग्रह ‘इनसेट 1 बी’ का सफल प्रक्षेपण हुआ

2013 – फ्रेंच गुयाना, भारतीय अंतरिक्ष संस्थान (इसरो) ने नौसेना के लिए विकसित विशिष्ट रक्षा उपग्रह (जीसैट 7) का ‘एरियन 5’ रॉकेट द्वारा सफल


















