दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम को 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड बताया है। दोनों लंबे समय से जेल में हैं और उनकी जमानत याचिकाओं का पुलिस ने फिर विरोध किया है।
पुलिस ने हाई कोर्ट में क्या कहा
पिछले कई सालों से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम ने 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में जमानत मांगी थी। ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने पिछले महीने नोटिस जारी किया और सुनवाई की तारीख 27 अगस्त तय की थी। उस दिन अदालत में अवकाश होने की वजह से अब मामला सोमवार को आएगा।
पुलिस ने मंगलवार को हलफनामा दाखिल कर जमानत का विरोध किया। पुलिस का कहना है कि ये याचिकाएं गलतफहमी पर आधारित हैं और कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं हैं। पुलिस ने साफ लिखा कि उमर खालिद और शरजील इमाम दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड्स में से हैं। उनकी भूमिका दूसरे आरोपियों से अलग है। इसे पुलिस ने ‘कमांड अथॉरिटी’ वाली भूमिका बताया।
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का भी जिक्र किया। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों को जमानत देने से मना कर दिया था। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इनकी संलिप्तता दूसरे सह-आरोपियों से अलग है और इन्हें कमांड अथॉरिटी की श्रेणी में रखा गया है।
क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये हिंसा नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। शरजील इमाम और उमर खालिद गिरफ्तारी के बाद से लगातार जेल में हैं।
दोनों की दलील और पुलिस का जवाब
अपनी याचिका में उमर खालिद और शरजील इमाम ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया। उन्होंने सैयद इफ्तिकार अंद्राबी बनाम एनआईए मामले का जिक्र करते हुए कहा कि परिस्थितियों में बदलाव हो गया है, इसलिए अब जमानत मिलनी चाहिए।
पुलिस ने इस दलील को खारिज कर दिया। पुलिस का कहना है कि दोनों ने इस फैसले का जिक्र करके अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। हलफनामे में लिखा गया कि यह फैसला पूरी तरह अलग केस से जुड़ा है। इसका दिल्ली दंगों या इन दोनों की कथित भूमिका से कोई लेना-देना नहीं है।

















