ईडी ने साइबर धोखाधड़ी की रकम ठिकाने लगाने वाले एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता हासिल की है। इस नेटवर्क में एक घंटे के अंदर 400 से ज्यादा बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए जाते थे और फिर उन्हें विदेश भेज दिया जाता था। इसमें आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त कई मनी चेंजर्स कंपनियां भी शामिल थीं। जांच में पता चला कि कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेक्स में काम करने वाली कई कंपनियां आपस में जुड़ी हुई थीं और यही इंटरकनेक्टेड नेटवर्क धोखाधड़ी कर रहा था।
दो करोड़ 60 लाख की साइबर ठगी
इस पूरे नेटवर्क का राजफाश गोवा की एक महिला से दो करोड़ 60 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच के दौरान हुआ। साइबर ठगों ने उससे सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट के नाम पर पैसे जमा करवाए थे। पीड़ित महिला के अकाउंट से पैसे मिलते ही उसे एक घंटे के अंदर नेटवर्क से जुड़े 400 से अधिक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया। कई जगहों पर इस पैसे को नकद में निकालकर फिर से नेटवर्क से जुड़े बैंक अकाउंट में जमा कराया गया। बाद में इसे विदेश भेज दिया गया था।
27,850 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेनदेन के सबूत मिले
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों की जांच में 27,850 करोड़ रुपये के बैंकिंग ट्रांजेक्शन के सबूत मिले हैं। इन कंपनियों के बैंक अकाउंट में 2,904 करोड़ रुपये नकद में जमा किए गए थे, जिनमें 585 करोड़ रुपये अलग-अलग स्थानों पर लगी 61,448 बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीन के द्वारा जमा कराए गए थे। 17 जुलाई को गोवा और मुंबई में 20 स्थानों पर छापेमारी की गई और उनमें से कुछ जगहों पर 21 अगस्त को दोबारा छापा मारा गया। इस दौरान 3.25 करोड़ रुपये की नकदी के साथ डिजिटल उपकरण और कंपनियों के दस्तावेज बरामद हुए।
कमोडिटी, ट्रैवल, ट्रेडिंग, फॉरेक्स में काम करने वाली कंपनियों का इंटरकनेक्टेड नेटवर्कजांच के दौरान इस नेटवर्क में शामिल कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेक्स में काम करने वाली कई कंपनियों का पता चला जो आपस में एक-दूसरे से जुड़ी थीं। 20 राज्यों में साइबर धोखाधड़ी के 330 पीड़ितों की शिकायत और 163 एफआईआर में इस नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों की संलिप्तता के सबूत मिले हैं। इस मामले में ईडी ने रविवार को गोवा से फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मोइन सैयद को गिरफ्तार किया है।















