भारत में Gen Z, यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी, 2029 के लोकसभा चुनाव तक देश की सबसे बड़ी वयस्क आबादी बन जाएगी। हाल में NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर छात्रों के आंदोलन ने दिखा दिया कि ये युवा अब चुप रहने वाले नहीं हैं। वे अपनी बात साफ रखते हैं और राजनीतिक दबाव भी बना सकते हैं। ये आंदोलन सिर्फ परीक्षा सुधार की मांग भर नहीं थे, बल्कि युवाओं की बढ़ती राजनीतिक समझ और ताकत का बड़ा संकेत थे।
भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी
2029 तक Gen Z की कुल आबादी करीब 38 करोड़ होने वाली है। इसमें लगभग 19.9 करोड़ लड़के और 18.1 करोड़ लड़कियां होंगी। ये संख्या उन्हें मिलेनियल्स से आगे ले जाएगी, जिनकी आबादी उस समय करीब 35.7 करोड़ रहने की उम्मीद है। Gen Z उस वक्त देश की सबसे बड़ी संख्या में छात्र, पहली बार वोट डालने वाले, नौकरी शुरू करने वाले और नए परिवार बसाने वाले युवा होंगे। इसलिए उनके लिए रोजगार, अच्छी पढ़ाई, सस्ता घर, स्वास्थ्य सुविधाएं, जलवायु बदलाव और बेहतर शासन जैसे मुद्दे सबसे अहम होने वाले हैं।
इसे भी पढ़ें: धनबाद में ईडी की बड़ी छापेमारी: झामुमो नेता हरेंद्र चौहान और डिप्टी मेयर के भाई के घर पर तलाशी
वोटरों में हिस्सा घट रहा है
Gen Z सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी तो बन रही है, लेकिन कुल वोटरों में युवाओं (18-29 साल) का प्रतिशत धीरे-धीरे कम हो रहा है। वजह है देश की आबादी का बूढ़ा होना। 1988 में वोट देने वालों में 18-29 साल के युवाओं की हिस्सेदारी 38.3 प्रतिशत थी, जो 2024 में घटकर 30.1 प्रतिशत रह गई। यूएन के अनुमान के मुताबिक 2029 तक यह और गिरकर करीब 27.8 प्रतिशत रह जाएगी। यानी हर चार वोटर में से सिर्फ एक युवा होगा।
फिर भी Gen Z की ताकत सिर्फ संख्या में नहीं है। ये पीढ़ी सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर जुड़ी हुई है। वे मुद्दों को तेजी से उठाते हैं, लोगों को जोड़ते हैं और बहस को पूरे देश तक पहुंचा देते हैं। NEET का विरोध इसी बात का उदाहरण था कि शिक्षा और नौकरी जैसे मुद्दे कितनी जल्दी राजनीति का केंद्र बन सकते हैं।
भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है
ये सब बड़े डेमोग्राफिक बदलाव का हिस्सा है। बच्चों की संख्या कम हो रही है और बुजुर्गों की बढ़ रही है। पुरुषों में 18 साल से कम उम्र वालों की हिस्सेदारी 1989 में 45.2 प्रतिशत थी, जो 2029 में घटकर 27.8 प्रतिशत रह जाएगी। महिलाओं में यह 44.8 प्रतिशत से घटकर 27.3 प्रतिशत होगी। दूसरी तरफ 46-61 साल के लोगों की संख्या बढ़ रही है। पुरुषों में यह 10.9 प्रतिशत से बढ़कर 18.3 प्रतिशत और महिलाओं में 11.3 प्रतिशत से बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो जाएगी। 62 साल और उससे ज्यादा उम्र वालों की संख्या और तेजी से बढ़ रही है। महिलाएं ज्यादा उम्र तक जी रही हैं, इसलिए उनमें बुजुर्गों की तादाद ज्यादा बढ़ेगी।
Gen Z ठीक उसी समय बड़ी हो रही है जब देश का डेमोग्राफिक डिविडेंड अभी बाकी है, लेकिन धीरे-धीरे कम होने लगा है। ये पीढ़ी ज्यादा पढ़ी-लिखी, डिजिटल और जागरूक है, जो आने वाले चुनावों में अपनी जरूरतें और प्राथमिकताएं साफ-साफ रखेगी।











