पंजाब के मोगा के डीसी कार्यालय परिसर में खूनी खालिस्तानी झंडा फहराने और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के बहुचर्चित मामले में मोहाली स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने आरोपी आकाशदीप सिंह उर्फ मुन्ना और जगविंदर सिंह उर्फ जग्गा को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई।
हालांकि, अदालत ने दोनों को तत्काल रिहा करने के आदेश भी दिए, क्योंकि वे सुनाई गई सजा की अवधि पहले ही न्यायिक हिरासत में पूरी कर चुके थे। दोनों आरोपियों द्वारा लगाया गया जुर्माना भी जमा करा दिया गया है। विशेष एनआईए न्यायाधीश दिनेश कुमार वाधवा की अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार किया।
इन धाराओं में मिली सजा
अदालत ने यह सुनिश्चित करने के बाद कि स्वीकारोक्ति बिना किसी दबाव, प्रलोभन या धमकी के की गई है, उन्हें भारतीय न्याय संहिता से पूर्व लागू भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। आरोपी अकाशदीप सिंह व जगविंदर सिंह को आईपीसी 120बी में पांच साल कैद व तीन हजार जुर्माना, 153बी में दो साल कैद व दो हजार जुर्माना, आईपीसी 201 में दो साल कैद व दो हजार जुर्माना, आईपीसी-212 में दो साल कैद व दो हजार जुर्माना, आईपीसी 204 में 1 साल कैद व दो हजार जुर्माना, यूएपीए-10 में दो साल कैद व दो हजार जुर्माना, यूएपीए-13 में पांच साल कैद व तीन हजार जुर्माना लगाया गया है।
लगभग छह साल पुराना है मामला
14 अगस्त 2020 को मोगा के उपायुक्त कार्यालय परिसर में आरोपियों ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर खालिस्तानी झंडा फहराया था। आरोप है कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रस्सी काटकर तिरंगे को नीचे गिराया गया और उसे घसीटते हुए परिसर के बाहर तक ले जाया गया।
पन्नू के इशारे पर किया काम
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस के कथित नेटवर्क के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया गया। जांच में संगठन के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके सहयोगी राणा सिंह उर्फ हरप्रीत सिंह की कथित साजिश का भी उल्लेख किया गया, जो अभी भी घोषित भगौड़े हैं।

















