विद्या, विनय और सफलता कैसे एक-दूसरे से बंधी होती है, इसे रेखांकित करता और विद्या क्यों जरूरी है, इस पर प्रकाश डालता आज का श्लोक।
श्लोक:
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति धनाद् धर्म ततः सुखम् ॥७॥
भावार्थ-
आज के दौर में यह श्लोक बेहद प्रासंगिक है। यह बताता है कि केवल डिग्री या धन कमाना ही शिक्षा नहीं है। ज्ञान के साथ विनम्रता भी जरूरी है। नैतिकता का होना जरूरी है। यही सफलता की कसौटी भी है।

















