लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नौ वर्षों के कार्यों, कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, कृषि, निवेश और बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाने में सफलता प्राप्त की है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पहचान, सुरक्षा और विकास के संकट से जूझ रहा था, लेकिन पिछले नौ वर्षों में राज्य ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यूपी में पहली बार कोई सरकार लगातार तीसरी बार रिपीट होगी। एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी।
नौ वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने है: मुख्यमंत्री योगी
सीएम ने कहा कि नौ वर्षों की कार्यपद्धति और रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने है। जनता जनार्दन फैसला करने के लिए तैयार है। वर्ष 2003 से 2017 तक समाजवादी पार्टी और अन्य सरकारों की कार्यपद्धतियां भी सभी के सामने हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का कार्य किया गया है।
उन्होंने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को केवल डबल इंजन वाली भाजपा सरकार ही पूरा कर सकती है। गत वर्ष एक रिकॉर्ड टूटा था, इस बार एक नया रिकॉर्ड टूटने वाला है। यूपी में पहली बार कोई सरकार लगातार तीसरी बार रिपीट होगी। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
सपा के विकास मॉडल पर साधा निशाना
सीएम ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी का विकास मॉडल लागू होता, तो उत्तर प्रदेश कब का डूब गया होता। उन्होंने कहा कि सैफई खानदान उत्तर प्रदेश को तबाह कर रहा था, जिसका नमूना जेपीएनआईसी बिल्डिंग है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने जेपीएनआईसी के निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये का डीपीआर बनाया था, लेकिन 800 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी है। इसी प्रकार, आदि गंगा की मान्यता वाली गोमती के रिवर फ्रंट के नाम पर 166 करोड़ रुपये का डीपीआर बनाया गया था, लेकिन 1400 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी कार्य अधूरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में केवल सरकारी खजाना लूटा जा रहा था।
कानून-व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों पर भी कही बड़ी बात
सीएम ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सुरक्षा की स्थिति ऐसी थी कि त्योहारों से पहले कर्फ्यू लग जाता था और उपद्रव शुरू हो जाते थे। आज हर समुदाय के पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाईं, वही आज आस्था की बात कर रहे हैं। साथ ही पवित्र हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई। देश के उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र दाखिल कर यह कहा गया कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर के विरोध में अपने अधिवक्ताओं को खड़ा किया गया।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के खजाने को लूटा और पहचान का संकट खड़ा किया, आज उन्हें अयोध्या की चोरी दिखाई दे रही है, लेकिन अपनी डकैती नहीं दिखाई देती।
अयोध्या प्रकरण पर भी मुख्यमंत्री ने रखी बात
सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की घटना निश्चित ही सभी रामभक्तों को आहत करती है। उन्होंने कहा कि यह एक स्वतंत्र ट्रस्ट है, जिसमें सरकार को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की रिपोर्ट आते ही ट्रस्ट ने कार्रवाई शुरू की। जो लोग चोरी करते हुए पकड़े गए, उनकी और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी हुई। नैतिक आधार पर भी दो इस्तीफे हुए।
उन्होंने कहा कि इसके नाम पर अयोध्या, श्रीराम जन्मभूमि या हिंदू आस्था को बदनाम करना न्यायसंगत नहीं है। जब उत्तर प्रदेश में आस्था के केंद्र पूरे देश के लिए मॉडल बन रहे हैं और प्रदेश नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है, तो इससे समाजवादी पार्टी को पीड़ा हो सकती है।
23 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच ले जाने की अपील
सीएम ने कहा कि वर्ष 2003 से 2026 तक के 23 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच लेकर जाइए। पहले पांच वर्ष मुलायम सिंह यादव के, अगले पांच वर्ष मायावती के, उसके बाद पांच वर्ष अखिलेश यादव के और पिछले नौ वर्षों के वर्तमान सरकार के कार्यकाल की तुलना कर जनता से उनकी संतुष्टि के बारे में पूछिए।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय राजीव गांधी का वह बयान आज भी याद आता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हम 100 रुपये भेजते हैं, लेकिन नीचे केवल 15 रुपये ही पहुंचते हैं। आखिर 85 रुपये कौन खा जाता था?
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पैसा किसी छात्र-छात्रा की छात्रवृत्ति, किसी युवा की नौकरी, बुजुर्ग और निराश्रित महिलाओं की पेंशन, गरीबों के राशन तथा बहन-बेटियों के लिए बनने वाले शौचालय का होता था। पिछली सरकारें इसी 85 प्रतिशत धन पर डकैती डालने का काम करती थीं।
उन्होंने कहा कि आज डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से दिल्ली या लखनऊ से भेजे गए 100 रुपये सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचते हैं। अब सभी योजनाओं का पूरा लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है।











