महाराष्ट्र

RSS सरसंघचालक मोहन भागवत का विजयदशमी संदेश: 10 करोड़ घरों तक पहुंचा संघ

विजयदशमी पर नागपुर में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत का विदेशों में मान बढ़ा है। संघ 4.61 लाख गांवों और 10 करोड़ घरों तक पहुंचा। जाति-बिरादरी बैठकें, हिंदू सम्मेलन और युवा सम्मेलन हुए।

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कुलदीप सिंह

विजयदशमी के अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने बड़ी बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का हाल के वर्षों में विदेशों में काफी मान बढ़ा है। दुनिया में संघ को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, इसलिए वहां भी प्रबोधन शुरू किया गया है। आज दुनिया में भारत को लेकर एक अलग कौतूहल की दृष्टि बनी है।

उन्होंने भारत की विविधिता पर जोर देते हुए कहा कि मनुष्य को परिवर्तनशील होना चाहिए। शाश्वत बातों को सदा कायम रखना चाहिए। लचीलापन भी सनातन का ही परिणाम है। जब हमारा राष्ट्रीयता का भाव सर्वोच्च रहा, तब हम विश्व में सभी दृष्टि से आदर्श थे। इसे भूलते ही हम आपसी संबंधों को भूलने लगे और इसका असर ये हुआ कि हम विघटित हो गए। इसी विघटन ने हममें दुर्बलता को जन्म दिया और दुर्बलता ने भय को पैदा किया। और इसी डर ने हमारे सभी रास्तों को बंद कर दिया। क्योंकि दुर्बल व्यक्ति खुद को दीवारों में बंद कर लेता है।

दुर्बल व्यक्ति खुद को सिद्ध करने के चक्कर में अहंकारी बन जाता है

डॉ भागवत जी कहते हैं कि जो व्यक्ति दुर्बल होता है और फिर वह खुद को जब साबित करने की कोशिशें करता है तो उसके अंदर अहंकार आ जाता है और वह अहंकारी बन जाता है। इन सभी का अंतत: परिणाम ये हुआ कि हमारी ही दुर्गति हुई। अपने अस्तित्व और अस्मिता के भावनात्मक आधार को याद करते हुए परस्पर हित के लिए कटिबद्ध जीवन जीना ही होगा। बीते 100 वर्षों से इसी दृष्टि से संघ कार्य करता आया है।

विश्व में भारत का मान बढ़ा

सरसंघचालक जी कहते हैं कि भारत का विश्व में तेजी से मान बढ़ रहा है। उसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी कार्य भी बढ़ गया है। विदेशों में भारत और भारतीयों का मान बढ़ रहा है। चर्चाएं हो रही हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए वहां भी प्रबोधन का कार्य शुरू करना पड़ा। इसका अनुभव ये है कि विश्व में भारत के प्रति एक नया कौतुहल बन रहा है। अब दुनिया के देश भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहे हैं।

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देश में संघ के कार्यक्रमों का लेखा जोखा

जनसंपर्क बढ़ाने के अभियान के तहत भारत के 4,61,527 से अधिक गावों तक हम पहुंचे। इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों की 10,000 की बस्तियों तक भी हम पहुंचे। इस तरह से हम 41076 बस्तियों तक पहुंचे। इसके अलावा 10 करोड़ से अधिक घरों तक संघ पहुंचा। इसके अलावा प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियां 1017 जिलों में की गईं। इसमें महिला-पुरुष मिलाकर 426497 प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए।

इसके अलावा करीब 5036 खंडों में जाति-बिरादरी की बैठकें की गई। ये आगे भी जारी रहेंगी। 34187 मंडलों में हिन्दू सम्मेलन किए जा चुके हैं। युवा सम्मेलन भी हुए, जिसमें 39 लाख से अधिक युवा शामिल हुए।

पंच परिवर्तन सर्वमान्य है

पंच परिवर्तन को लेकर सरसंघचालक जी कहते हैं कि ये अभी भी सर्वनमान्य है। विशेषकर कुटुम्ब प्रबोधन, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण। विश्व के दूसरे देशों में भी इसकी आवश्यकता देखी गई है। चूंकि, ये जीवन में परिवर्तन लाने वाली विधा है और इसलिए अपनी आदत बनाने की आवश्यकता है। हमारी भारतीय संस्कृति में ये रहा है कि छोटी-छोटी कृतियों से हम एक से दूसरी पीढ़ी को अपने संस्कारों को पहुंचाते रहे हैं। इसी से समाज में परिवर्तन आएगा और इसके लिए सबसे पहले आचरण बदलना पड़ेगा।

ड्रग्स पर बात

आजकल युवाओं में ड्रग्स का उपयोग बढ़ा है। इस चेतावनी देते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि ये विवेक का अभाव है। विवेक के अभाव के चलते ही गलत जानकारियां फैली। आज नशीली दवाएं एक राष्ट्रीय समस्या बन गई हैं। समय रहते ही हमें इस पर सोचना पड़ेगा। इससे निपटने के लिए स्वयंसेवकों ने भी सोचा है कि ड्रग्स का विरोध करने वाले लोगों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर इससे निपटने का उपाय खड़ा किया जाएगा। भारत को विश्वगुरू बनाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के ही कंधों पर आने वाली है। हमारी नई पीढ़ी इस उत्तरदायित्व को सही तरह से निभा सके, इसके लिए हमें उसे तैयार करना होगा।

 

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