विजयदशमी पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन:स्वबोध संदेश और विविधता में एकता का आह्वान किया
October 20, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत महाराष्ट्र

विजयदशमी पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन:स्वबोध संदेश और विविधता में एकता का आह्वान किया

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने विजयदशमी पर कहा कि संविधान की प्रस्तावना में निहित “हम भारत के लोग” का स्वबोध ही प्राचीन काल से भारत को एक सूत्र में बांधे हुए है। विविधता में एकता और सनातन परंपरा पर बल।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Oct 20, 2026, 10:28 am IST
inमहाराष्ट्र
Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Vijayadashmi

विजयदशमी पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का संबोधन

विजय दशमी के मौके पर नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में विजयदशमी का उत्सव मनाया गया। इस दौरान सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने का कि ये वर्ष संत रविदास की 650 जयंती का वर्ष है। इसके तहत देशभर में संघ की शाखाओं में संत रविदास जी के बारे में बताया जा रहा है।

इस दौरान सरसंघचालक जी ने कहा कि जब देश में विदेशी आक्रांता स्वधर्म पर चलने वालों को प्रताड़ित कर रहे थे, ऐसे वक्त में भी संत रविदास ने स्वधर्म निष्ठा, सामाजिक समरसता और भक्ति का प्रचार किया। ऐसे ही स्वातंत्र्य बलिदानी स्वामी श्रद्धानंद का भी 100 वर्ष हुआ। उसी तरह उड़ीसा वनवासी बंधुओं के कल्याण के लिए काम करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की भी जन्म शताब्दी अभी चल रही है। इसके अलावा महात्मा फुले जी जन्म शताब्दी का 200वां वर्ष चल रहा है। इसी तरह बंगाल के राजनारायण बसु ने भी स्व का बोध जगाया। इन सभी महापुरुषों का स्मरण भारत को संगठित करने के लिए आवश्यक है।

स्व बोध

स्व बोध के आधार पर पिछले 100 वर्षों से भारत को संगठित, बल संपन्न के लिए चलाया जा रहा है। स्व बोध की व्याख्या संविधान की प्रस्तावना में भी की गई है। संविधान में कहा गया है-हम भारत के लोग। सरसंघचालक जी कहते हैं कि ‘हम’ नामक ‘स्व’ का जो बोध है उसी ने प्राचीन काल से देश को एकता के सूत्र में पिरो कर रखा। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि हमारे पूर्वजों के पास संपूर्ण एकता की शक्ति की अनुभूति थी। हमारे पास भी वही विरासत है। लेकिन, जब हम इसे भूले तो हमारा पतन शुरू हो गया। इसके कारण हम मानसिक रूप से इतने निकृष्ट हो गए कि हमें सैकड़ों वर्षों की गुलामी की दासता में रहना पड़ा।

विविधताओं का देश है भारत

अब उस गुलामी की जंजीरों को तोड़कर एक बार फिर से हम आगे बढ़ चुके हैं। अपना भारत विवधताओं से भरा देश है। यहां विविध प्रकार की प्राकृतिक, पंथों, प्रांतों, जातियों आदि की विवधताएं हैं। इन सब के बाद भी हमें एक होकर आगे बढ़ना है, इसके लिए आधार की आवश्यकता है और ये आधार हमारे सनातन काल से चली आई परंपरा से उपजा है। ये परंपरा आंखों देखी है। यही परंपरा परिवर्तनशील है और प्रभावी है।

भगवान ने मनुष्य को विचार का वरदान दिया है। अगर वह इसकी परिशुद्धि करते हुए अपने में साक्षात कर लेता है और उसी के अनुसार जीवन जीता है। ऐसा करने से ही शाश्वत सुख प्राप्त होता है। यही मुनष्यता की सनातन खोज है। इसी परम सुख को प्राप्त करना मनुष्य जीवन का ध्येय है। इसके लिए वसुधैव कुटुम्बकम का विचार चाहिए।

इसी सत्य को विविध पंथ से, विविध पक्ष से, वेदों में हमने गाया था।
निकट बिठाकर इसी सत्य को उपनिषदों में हमने समझाया था।।
मंदिर, मठ गुरुद्वारे जाकर, यही ज्ञान ससत्संग मिलेगा।

मनुष्य को परिवर्तनशील होना चाहिए

सरसंघचालक मोहन भागवत जी विवधता पर जोर देते हुए कहते हैं कि मनुष्य को परिवर्तनशील होना चाहिए। शाश्वत बातों को सदा कायम रखना चाहिए। लचीलापन भी सनातन का ही परिणाम हैं।

Topics: आरएसएसमोहन भागवत नागपुर विजयदशमी संबोधनमोहन भागवत विजयदशमी संबोधनविजयदशमीविवधता में एकता
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

दीप प्रज्वलित कर श्री अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का श्रीगणेश करते महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज। साथ में हैं बाएं से श्री अमित शाह, श्री आलोक कुमार, श्री दत्तात्रेय होसबाले और श्री महेश भागचंदका

संगठन शिल्पी की शताब्दी

‘भाषण से अधिक महत्वपूर्ण कार्य होता है’: कारंजा में बोले सरसंघचालक जी- राष्ट्र को समर्पित रहा बालासाहब जी का जीवन

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

धर्म और राष्ट्र अलग नहीं…  दुनिया को भारत से है समाधान की उम्मीद: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

RSS Sunil Ambekar Praises Captain Smit Machhar Flydubai Flight Saved Panchjanya

“पूरे देश को गर्व है”: कैप्टन स्मित मछार के साहस पर बोले संघ प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर- वे वास्तव में एक सच्चे वीर हैं

‘कन्वर्जन हिंसा है, हम इसे सहन नहीं करेंगे; प्रेम, करुणा, तपस्या और शुचिता है- हिंदुत्व’

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

USCIRF की कोई साख नहीं, नजरअंदाज करें: डॉ मोहन भागवत की अमेरिकी यात्रा पर विदेश मंत्रालय का जवाब

Load More

ताज़ा समाचार

Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Vijayadashmi

विजयदशमी पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन:स्वबोध संदेश और विविधता में एकता का आह्वान किया

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

श्री विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के उद्बोधन की प्रमुख बातें

श्री संजय गुप्ता जी

राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्र निर्माण और राष्ट्र निष्ठा आवश्यक: संजय गुप्ता

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

जीवन में आचरण का परिवर्तन लाने वाली व्यवहार की शैली है पंच परिवर्तन : श्री मोहन भागवत

India Newzealand Free trade Agreement

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आज से लागू, भारतीय उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह खत्म

कोलंबिया में अवैध सोने की खदान ढही, 14 की मौत; 7 घायल

Italy Protest and violence

मिलान में लूटपाट और तोड़फोड़ के बाद इटली ने बढ़ाई सुरक्षा, 500 फौजी तैनात होंगे

France protest Violence

फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बाद कई शहरों में आंशिक कर्फ्यू: 5000+ गिरफ्तारियां, 2000 दुकानें लूटी गईं

आज का राशिफल

आज का राशिफल: कुछ राशियों के लिए तरक्की के योग, तो कुछ को बरतनी होगी सावधानी

आज का श्लोक विजयादशमी पर : उधर प्रतिद्वन्द्वी था रावण, इधर रणभूमि में सहायक थे वानर

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies