नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी समापन समारोह एवं विजयादशमी उत्सव में दैनिक जागरण के प्रधान संपादक एवं प्रमुख अतिथि संजय गुप्त ने राष्ट्र निर्माण, भारतीयता, राष्ट्र निष्ठा और चरित्र निर्माण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट कर उसे सामर्थ्यवान बनाना और राष्ट्र को स्वतंत्रता दिलाना था। संघ की सोच स्पष्ट थी कि पराधीनता की मानसिकता से उबरे बिना वास्तविक स्वतंत्रता संभव नहीं है।
इस अवसर पर स्मृति मंदिर में संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा तथा श्री गुरुजी स्मृति स्थल पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी और प्रमुख अतिथि संजय गुप्त ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ और इजरायल के मिडवेस्ट के महावाणिज्यदूत माननीय यानिव रेवाच सहित अन्य अतिथि भी उपस्थित रहे।
स्वतंत्रता के बाद भी चुनौतियों के बीच आगे बढ़ता रहा संघ
अपने संबोधन में संजय गुप्त ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के बाद संघ ने व्यक्ति निर्माण के साथ-साथ भारतीयता और राष्ट्र निष्ठा को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाया। हालांकि, स्वतंत्रता के बाद सत्ता प्रतिष्ठान में मौजूद राजनीतिक वर्ग के एक हिस्से ने संघ की विचारधारा को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि यह उनके तुष्टीकरण के एजेंडे से मेल नहीं खाती थी। इसके बावजूद संघ तमाम चुनौतियों और आरोपों के बीच व्यक्ति निर्माण तथा राष्ट्र निष्ठा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता रहा। उन्होंने कहा कि पिछली शताब्दी में संघ का ध्यान तुष्टीकरण के कारण हिंदू समाज के सामने उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों को दूर करने पर केंद्रित रहा। वहीं, आगामी शताब्दी के लिए संघ के सामने जो प्रमुख चुनौती है, उसमें देशवासियों का चरित्र निर्माण सर्वोपरि है।
चरित्र निर्माण से ही संभव है स्वर्णिम भारत का निर्माण
संजय गुप्त ने कहा कि अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को भली-भांति समझता है। राष्ट्र के प्रति निष्ठा और कर्तव्यबोध एक चरित्रवान नागरिक के आवश्यक गुण हैं। यदि भारत को अपना स्वर्णिम काल वापस लाना है, तो चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा, “देश के प्रति कमिटमेंट और ड्यूटी की भावना एक नागरिक के ज़रूरी गुण हैं।
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विश्व में भारतीयता और हिंदुत्व की बढ़ती प्रतिष्ठा का श्रेय संघ को
अपने संबोधन में संजय गुप्त ने यह भी कहा कि आज विश्व में भारतीयता और हिंदुत्व की अपनी अलग पहचान और प्रतिष्ठा है। इसका श्रेय प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दिया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता, कर्तव्यबोध और चरित्र निर्माण को एक सशक्त राष्ट्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि नागरिकों में इन गुणों का विकास भारत को उसके गौरवशाली अतीत की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। RSS के विजयादशमी उत्सव एवं शताब्दी समापन समारोह में व्यक्त अपने विचारों के माध्यम से संजय गुप्त ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र निर्माण केवल स्वतंत्रता प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज में चरित्रवान नागरिकों का निर्माण, भारतीयता के प्रति गौरव और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा भी आवश्यक है।












