भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए आज मंगलवार से लागू हो गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी जानकारी दी। इस समझौते के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों पर न्यूजीलैंड में कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। खास तौर पर चमड़ा, जूते-चप्पल, कपड़े और टेक्सटाइल जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों के सामान आसानी से वहां पहुंच सकेंगे।
भारतीय उत्पादों पर शुल्क खत्म
गोयल ने बताया कि एफटीए के अमल में आने से इन उत्पादों पर न्यूजीलैंड में आयात शुल्क पूरी तरह हट जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुलने वाले हैं। समझौते से अगले 15 साल में न्यूजीलैंड से भारत में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है। यह निवेश कई क्षेत्रों में काम आएगा और भारतीय कंपनियों को निर्यात बढ़ाने का मौका मिलेगा।
जेसीबी का पहला निर्यात
पीयूष गोयल ने भारी निर्माण उपकरण बनाने वाली कंपनी जेसीबी इंडिया के एक छोटे एक्सकेवेटर को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मशीन इसी व्यापार समझौते के तहत न्यूजीलैंड को निर्यात की जाएगी। गोयल ने कहा कि जेसीबी अपने कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत हिस्सा भारत से दूसरे देशों को भेजती है। अब कंपनी इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रख रही है। न्यूजीलैंड कंपनी के लिए 140वां निर्यात गंतव्य बन गया है।
कृषि क्षेत्र में साझेदारी
इस एफटीए में कृषि उत्पादकता साझेदारी भी शामिल है। इसके जरिए न्यूजीलैंड की तकनीक भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करेगी। दोनों देश खेती से जुड़े मामलों में एक-दूसरे से सीख सकते हैं और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर सकते हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर रखा
समझौते में कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है। इनमें डेरी उत्पाद, प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, कृत्रिम शहद और चीनी शामिल हैं। इन चीजों को सुरक्षा के लिहाज से अलग रखा गया है ताकि घरेलू किसानों और उद्योगों पर असर न पड़े।
टैरिफ रेट कोटा की प्रक्रिया
वाणिज्य मंत्रालय ने इस समझौते के तहत टैरिफ रेट कोटा यानी टीआरक्यू आवंटित करने की प्रक्रिया को अधिसूचित कर दिया है। इस कोटे में आने वाले सामानों में सेब, किवी, एल्ब्यूमिन और मानुका शहद शामिल हैं। इन उत्पादों पर सीमित मात्रा में कम शुल्क या विशेष व्यवस्था लागू होगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक कदम है। भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार अब ज्यादा खुला हो गया है और निवेश के नए रास्ते भी तैयार हो रहे हैं।














