सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला हर वीडियो क्या पूरी सच्चाई बयां करता है, या फिर अधूरी तस्वीर के आधार पर किसी घटना को राजनीतिक रंग दे दिया जाता है? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो ने दिल्ली में मारपीट की घटना को लेकर ऐसा ही सवाल खड़ा कर दिया है। वीडियो के आधार पर महिला उत्पीड़न, पुलिस की निष्क्रियता की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। लेकिन इसी घटनाक्रम से जुड़े दूसरे वीडियो और सामने आए दावों ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। जिस व्यक्ति को युवती बताकर मारपीट का मुद्दा उठाया गया, उसकी पहचान को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। ऐसे में आखिर उस दिन हुआ क्या था? क्या वायरल वीडियो घटना की पूरी तस्वीर दिखाता है, और दिल्ली पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की? आइए, राजनीतिक आरोपों से इतर उपलब्ध तथ्यों और सामने आए वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम को समझते हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में चार युवक कुछ युवतियों और एक युवक के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ये युवतियां और युवक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने आए थे, जहां उनके साथ मारपीट की गई। वीडियो सामने आते ही CJP और विपक्षी नेताओं ने इसे महिलाओं के साथ अभद्रता, मारपीट और संवैधानिक अधिकारों के हनन का मामला बताते हुए सवाल उठाने शुरू कर दिए। विपक्ष की ओर से इस घटना को लेकर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। किंतु किसी भी घटना का मूल्यांकन केवल वायरल वीडियो और राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके संपूर्ण घटनाक्रम और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण की तह तक जाते हुए यह जानना भी आवश्यक है कि हिंसा को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने क्या कदम उठाए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने वायरल वीडियो में मारपीट करते दिखाई देने वाले चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। ऐसे में जिस घटना को लेकर संविधान और महिला सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, उसकी वास्तविकता क्या है? आखिर मारपीट की शुरुआत कैसे हुई, इसके पीछे की परिस्थितियां क्या थीं और वायरल वीडियो में क्या पूरा घटनाक्रम सामने आया है? इन प्रश्नों के उत्तर जानना आवश्यक है, ताकि राजनीतिक दावों से अलग घटना की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
मारपीट की शुरुआत कैसे हुई?
वायरल वीडियो के आधार पर यह आरोप लगाया गया कि दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कथित RSS और भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक युवती के साथ मारपीट की और उसके कपड़े फाड़े। हालांकि, इसी घटना का एक अन्य वीडियो सामने आने के बाद विवाद में नया पहलू जुड़ गया है। डॉ. प्रकाश सिंह द्वारा साझा किए गए वीडियो में कथित तौर पर दिखाई देता है कि कार में सवार दो-तीन युवकों को CJP के प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने घेर लिया था। कुछ लोग कार पर हमला करते और उसकी खिड़कियों पर लात मारते नजर आ रहे हैं।
डॉ. प्रकाश सिंह का दावा है कि कार के पीछे लगे ‘जय श्रीराम’ के स्टिकर को देखकर प्रदर्शनकारियों ने युवकों के साथ अभद्रता शुरू की। उनके अनुसार, भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने आपत्तिजनक इशारे किए, गालियां दीं और वाहन पर हमला किया। उन्होंने रविंदर और रमनदीप नामक युवकों पर एक युवती के कपड़े फाड़ने के आरोपों को भी भ्रामक बताया। कुछ हिंदू कार्यकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारी भगवा ध्वज देखकर उत्तेजित हो गए थे। इस प्रकार, सामने आए दूसरे वीडियो के आधार पर यह प्रश्न उठता है कि क्या मारपीट से पहले कार में सवार युवकों को उकसाया गया था?
लड़की या लड़का? वायरल वीडियो के पीछे की वास्तविकता
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर CJP और कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल समेत कई नेताओं ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कथित भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं ने एक युवती के साथ मारपीट की। CJP ने इस घटना को महिला सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों के हनन से जोड़ते हुए दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। वहीं, कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई और पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे।
DEEPLY DISTURBING!
BJP-RSS goons beating a young girl in the presence of Delhi Police, with an officer seemingly guiding them to stop the recording.
Why is Delhi Police helping goons attack peaceful protestors instead of protecting them? Who gave them this free hand? pic.twitter.com/2JeT40wrx2
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) October 10, 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इसी वीडियो को साझा करते हुए भाजपा और संघ पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने घटना को महिलाओं और युवाओं के विरुद्ध हिंसा से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया।
दिल्ली पुलिस के सामने BJP-RSS के गुंडे प्रोटेस्टर्स को मार रहे हैं।
मोदी-शाह ने पूरे देश में गुंडाराज कायम कर दिया है।
वीडियो में दिख रहा है कि गुंडे एक लड़की को जमीन पर गिराकर मार रहे हैं और पुलिस तमाशा देख रही है। pic.twitter.com/cBDjcNtv5Q
— Congress (@INCIndia) October 10, 2026
इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी वायरल वीडियो को साझा करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “देश की राजधानी, शर्म से हुई पानी-पानी! ये है भाजपाई ‘नारी वंदन’ का सच। निंदनीय!” अखिलेश यादव ने इस घटना को महिला सम्मान से जोड़ते हुए भाजपा पर सवाल उठाए।
देश की राजधानी, शर्म से हुई पानी-पानी!
ये है भाजपाई ‘नारी वंदन’ का सच।
निंदनीय! pic.twitter.com/V201CyzWlH
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 11, 2026
हालांकि, इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जिस काली टी-शर्ट पहने व्यक्ति को लड़की बताकर उसके साथ मारपीट का दावा किया जा रहा था, वह वास्तव में लड़का है। इस पहचान की पुष्टि होने के बाद वायरल वीडियो के साथ किए गए महिला उत्पीड़न संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Bhai aur kitna saboot doo in chamcho ko😂.
ये साले नर और मादा में फ़र्क़ नहीं कर पा रहे है ।😂 https://t.co/9Hk2XZ6mrf pic.twitter.com/2MjnuOopNc— DR.PRAKASH SINGH🇮🇳 (@DRPRAKASHSING14) October 11, 2026
इतना ही नहीं, दिल्ली पुलिस पर निष्क्रियता के आरोपों के बीच डॉ. प्रकाश सिंह द्वारा साझा किए गए दूसरे वीडियो में घटना का एक अन्य पक्ष भी सामने आया है। इसमें कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को कार सवार युवकों के साथ अभद्रता करते और उनके वाहन पर हमला करते देखा जा सकता है। वहीं, एक पुलिसकर्मी भी स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करता दिखाई देता है। दिल्ली पुलिस ने मारपीट के मामले में कार्रवाई करते हुए चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक आरोपों की होड़ में तथ्यों की सत्यता पीछे छूटती जा रही है? जिस व्यक्ति की पहचान को आधार बनाकर महिला उत्पीड़न, संवैधानिक अधिकारों के हनन और पुलिस की निष्क्रियता जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, उसकी वास्तविक पहचान सामने आने के बाद इन दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। निस्संदेह, किसी के साथ भी मारपीट को उचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन घटना के तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना भी गंभीर विषय है। आखिर संविधान और कानून की दुहाई देने वालों से यह अपेक्षा तो की ही जा सकती है कि उनके आरोपों का आधार अधूरा वीडियो या भ्रामक पहचान नहीं, बल्कि सत्य और प्रमाण हों।















