आईएमएफ ने भारत की जीडीपी डेटा सुधार और मजबूत बुनियाद की तारीफ कीअंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने हाल ही में कहा है कि भारत ऊर्जा झटके के समय मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ दाखिल हुआ था और उसने इस स्थिति को अच्छे से संभाला है। बैंकॉक में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में आईएमएफ के एशिया और पैसिफिक विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने यह बात कही। उन्होंने साफ कहा कि रुपये पर दबाव को अर्थव्यवस्था की नाकामी का संकेत नहीं मानना चाहिए।
विकास दर का अनुमान बढ़ाया गया
आईएमएफ ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ा दिया है। अब वह इस साल और अगले साल दोनों के लिए 7 प्रतिशत विकास दर देख रहा है। मध्यम अवधि में यह 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अप्रैल-जून तिमाही में विकास दर अपेक्षा से काफी मजबूत रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अनुसार यह 7.8 प्रतिशत रही थी। इसी वजह से आईएमएफ ने अपना अनुमान ऊपर किया।
विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट के अनुसार कैलेंडर वर्ष के आधार पर 2026 में 7.4 प्रतिशत और 2027 में 7.0 प्रतिशत विकास दर का अनुमान है। पिछले अनुमानों से यह आंकड़ा आधा प्रतिशत या उससे ज्यादा ऊपर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब भी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की अच्छी गतिविधि इसका मुख्य आधार है।
मजबूत बुनियाद और घरेलू ताकत
श्रीनिवासन ने बताया कि भारत में विकास मजबूत था और राजकोषीय समझदारी भी बनी हुई थी। अनुकूल जनसांख्यिकी, बड़ा और बढ़ता घरेलू बाजार तथा लगातार संरचनात्मक सुधारों की वजह से मध्यम अवधि का दृष्टिकोण भी सकारात्मक है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसे कर्ज अनुपात को 2025 के स्तर पर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त राजकोषीय कसावट की जरूरत नहीं है।
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रुपये का दबाव और ऊर्जा झटका
रुपये पर दबाव वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता और तेल की कीमतों से जुड़ा है। भारत तेल आयातक देश होने के कारण ऊर्जा झटके से प्रभावित हुआ है। आईएमएफ के अनुसार विनिमय दर को अर्थव्यवस्था की सफलता या असफलता का पैमाना नहीं बनाना चाहिए। आधारभूत अनुमान में 2026 में तेल की कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल मानी गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य मार्च 2027 से फिर खुलने की बात कही गई है।
जीडीपी डेटा में बदलाव की तारीफ
आईएमएफ ने भारत के जीडीपी आंकड़ों में हुए संशोधन की भी सराहना की। एमओएसपीआई ने 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाते हुए नई जीडीपी श्रृंखला जारी की है (पहले 2011-12 था)। श्रीनिवासन ने कहा कि ये बदलाव आईएमएफ के आंकड़ा विभाग की सलाह के अनुरूप हैं और अच्छी प्रथाओं के मुताबिक हैं। हालांकि सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है, लेकिन एमओएसपीआई के काम को पहचानना चाहिए।
अर्थव्यवस्था पर असर
आईएमएफ के इस रुख से भारत की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। ऊंची विकास दर का अनुमान घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है, जिससे रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। मजबूत बुनियाद और राजकोषीय अनुशासन बाहरी दबावों को सहने की क्षमता बढ़ाता है। रुपये पर दबाव को लेकर चिंता कम होने से बाजारों में स्थिरता का माहौल बन सकता है। संरचनात्मक सुधारों और घरेलू बाजार की ताकत मध्यम अवधि में विकास को सहारा देगी। वहीं मध्य पूर्व में तनाव और अल नीनो जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं, जो मुद्रास्फीति और राजकोषीय दबाव बढ़ा सकते हैं।

















