गत 2 अक्तूबर को नई दिल्ली में ‘राष्ट्रीय सेवा भारती’ एवं ‘संत ईश्वर फाउंडेशन’ की ओर से 11वां संत ईश्वर सम्मान आयोजित हुआ। समारोह में 18 सेवा साधकों और संस्थाओं का सम्मान किया गया। विमान संकट के दौरान अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले कैप्टन स्मित मच्छार तथा भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन दृष्टि’ को ‘संत ईश्वर विशेष सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
ऑपरेशन दृष्टि की ओर से ब्रिगेडियर एस. के. मिश्रा ने सम्मान ग्रहण किया। मिलिंद मधुसूदन जोशी, महामोगी आदिवासी बहुउद्देशीय विकास संस्था, सरबजीत कौर सिंधू और बाबा सत्यनारायण मौर्य को ‘संत ईश्वर विशिष्ट सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
ग्रामीण, जनजातीय तथा महिला एवं बाल विकास के क्षेत्रों में कार्य करने वाले 12 सेवा साधकों को ‘संत ईश्वर सेवा सम्मान’ दिया गया। सम्मानित होने वालों में शामिल हैं धरनी आर. मुरुगेशन, विशाल सिंह, संजय कुमार, सुमन्ती देवी भगत, ग्याती राणा, जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल, आयुष्मन्दिर, डॉ. तारा देवी सेन, जीवन संवर्धन फाउंडेशन, अप्पुकुट्टन के., इंजीनियर सुधीर सेठी और अरज सोशल वर्क ऑर्गेनाइजेशन।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और कर्तव्य बोध जरूरी है। संत ईश्वर सम्मान समिति के अध्यक्ष कपिल खन्ना ने संत ईश्वर परिवार की 24 वर्ष की यात्रा का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि 2002 में माता चंद्रकांता स्मृति सेवा न्यास द्वारा संचालित ज्ञानदीप सेवाधाम में एक दर्जन घुमंतू बच्चों को शिक्षा देने के संकल्प से यह यात्रा शुरू हुई थी। आज यह पहल व्यापक सेवा प्रकल्प का रूप ले चुकी है। श्री खन्ना ने बताया कि 2015 में परम पूजनीय सरसंघचालक जी की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुए संत ईश्वर सम्मान के 11 वर्ष में अब तक 168 सेवा साधकों और विभूतियों को सम्मानित किया जा चुका है।
सम्मान के रूप में लगभग 3.5 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है। इन सम्मानित विभूतियों में से 10 को आगे चलकर भारत सरकार द्वारा ‘पद्म श्री’ और ‘पद्म भूषण’ जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम को पूज्य जगद्गुरु श्री कृष्णदास विद्यार्थी महाराज का विशिष्ट सान्निध्य मिला।

















