
130 वर्ष पुरानी दुर्लभ मुद्रित श्रीमद्भगवद्गीता माचिस के आकार की।
टीकमगढ़: श्रीमद्भगवद्गीता का नाम आते ही भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद याद आते हैं। लेकिन टीकमगढ़ के खरगापुर में मिली गीता की एक दुर्लभ प्रति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी खासियत इसका बेहद छोटा आकार है। करीब 130 साल पुरानी यह गीता देखने में लगभग माचिस की डिबिया जितनी है।
यह दुर्लभ गीता पूर्व विधायक और भाजपा नेता सुरेंद्र प्रताप सिंह, जिन्हें बेबी राजा के नाम से भी जाना जाता है, के पास सुरक्षित है। इसका आकार महज 4×4.4 सेंटीमीटर है, जबकि इसमें करीब 350 पन्ने हैं। सबसे खास बात यह है कि यह गीता हाथ से लिखी हुई नहीं, बल्कि उस समय में पूरी तरह छापकर तैयार की गई थी। इतने छोटे आकार में सैकड़ों पन्नों की किताब छापना उस दौर में बड़ी तकनीकी उपलब्धि रही होगी। जानकारों के मुताबिक इसमें छोटे फिक्स फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया था। कम जगह में अक्षरों को व्यवस्थित कर पुस्तक तैयार करना पुराने समय की छपाई कला की खास मिसाल है।
गीता के शुरुआती पन्नों में गीता माहात्म्य दिया गया है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के रथ का बारीक चित्र भी बना हुआ है। यह चित्र वुडकट शैली में तैयार किया गया है, जो उस समय की छपाई तकनीक को दिखाता है। जानकारों के अनुसार पुराने समय में ऐसी छोटी धार्मिक किताबें श्रद्धालुओं के लिए काफी उपयोगी होती थीं। इन्हें आसानी से जेब में रखा जा सकता था। कुछ लोग इन्हें ताबीज में रखकर भी अपने साथ रखते थे। ज्ञान भारतम् अभियान के तहत इस तरह की पुरानी धरोहरों को सामने लाने का काम किया जा रहा है। टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय भी जिले में मौजूद ऐसी ऐतिहासिक सामग्री को सामने लाने में रुचि ले रहे हैं।