असम के सिलचर नगर निगम के मतदान पत्र से हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए ने बड़ी जीत हासिल की है। सिलचर नगर निगम के कुल 42 सीटों में भाजपा ने 34 पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस केवल दो सीट ही जीत सकी। छह सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
सिलचर नगर निगम के कुल 42 वार्ड में से 40 के लिए मतदान हुआ था क्योंकि दो वार्डों 9 और 20 से भाजपा उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह और भक्ति सेन तालुकदार ने निर्विरोध जीत दर्ज की थी। सिलचर भाजपा का गढ़ रहा है, जिसे पार्टी मजबूती से अपने पक्ष में बनाए हए है। सिलचर असम का वो इलाका है, जहां से भाजपा को राज्य में राजनीतिक आधार मिला था। भाजपा के कबीन्द्र पुरकायस्थ ने 1991, 1996, 1998 और 2009 लोकसभा के चुनाव में इसी लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेता संतोष मोहन देब को हराया था।
कांग्रेस के ईवीएम पाखंड का अंत
पूर्वोत्तर के दो स्थानीय चुनाव सिलचर नगर निगम और त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव ने कांग्रेस पार्टी के ईवीएम के पाखंड को पूरी तरह से धराशायी कर दिया है। कांग्रेस बार-बार यह आरोप लगाती है कि वह ईवीएम के कारण चुनाव हार रही है। लेकिन त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव और सिलचर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की करारी हार ने उसे फिर से आईना दिखाया है। त्रिपुरा में कांग्रेस 4507 सीटों में महज 14 जीत सकी है, वही सिल्चर नगर निगम चुनाव में 42 में से दो सीट ही जीतने में कामयाब हुई।
लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का घटता जनाधार
लोकसभा चुनाव में 99सीट जितने और राहुल गांधी के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कांग्रेस का जनाधार लगातार घट रहा हैं। 2024 के लोकसभा के चुनाव में असम में कांग्रेस पार्टी 31 विधानसभा सीटों पर आगे थी मगर विधानसभा चुनाव में 19 सीट ही जीत सकी, जिसमें 18 विधायक एक खास वर्ग से हैं। पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 11 विधानसभा सीटों पर आगे थी मगर विधानसभा चुनाव में महज दो सीट ही जीत सकी।
असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूरे देश में सबसे बड़ा थप्पड़ लगा है। लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के उपनेता और जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई जोरहाट विधानसभा सीट से अपना भी चुनाव हार गए।
पुड्डुचेरी से मिली करारी शिकस्त
कांग्रेस लोकसभा चुनाव में पुड्डुचेरी सीट पर 30 विधानसभा सीटों में 28 पर आगे रही थी। मगर विधानसभा चुनाव में महज दो सीटें ही जीत सकी। कांग्रेस के सांसद वी वैथिलिंगम विधानसभा चुनाव में थट्टनचावडी विधानसभा सीट से जमानत भी नहीं बचा सके। लोकसभा चुनाव में इस सीट पर वी वैथिलिंगम को 51 प्रतिशत से अधिक मत मिले थे मगर विधानसभा सीट में महज 12.68 प्रतिशत मत ही प्राप्त कर सके थे ।
राहुल गांधी ने नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कांग्रेस पार्टी के लोकसभा में उपनेता गौरव गगोई और पुडुचेर्री के सांसद वी वैथिलिंगम उन सीटों से विधानसभा का चुनाव हार गए हैं जिससे उन्होंने लोकसभा के चुनाव में बड़ी जीत हासिल किया था ।

















