झारखंड में भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। हेमंत सोरेन को न तो पीएमएलए अदालत से राहत मिलती दिखाई दे रही है और न ही झारखंड के उच्च न्यायालय से। ताजा मामला ये है कि रांची स्थित प्रवर्तन निदेशालय की विशेष पीएमएलए अदालत ने बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं।
यह मामला हेमंत सोरेन के लिए एक बड़ा झटका माना जा सकता है, क्योंकि इसके साथ ही अब इस पूरे मामले में नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर तय की है, और ईडी को अदालत के समक्ष गवाहों और सबूतों को पेश करने का आदेश दिया गया है।
उच्च न्यायालय से भी नहीं मिली राहत
इस मामले में आरोप तय होने से ठीक पहले हेमंत सोरेन ने 30 सितंबर को ही झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर निचली अदालत की कार्यवाही और आरोप तय करने पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उन्हें कोई अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया और ईडी को 20 अक्टूबर तक एक पूरक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद 30 सितंबर की शाम को विशेष पीएमएलए अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए हेमंत सोरेन को ईडी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पढ़कर सुनाया। इस दौरान सोरेन ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया और सुनवाई का सामना करने की बात कही।
राजनीतिक गलियारों में हलचल, इस्तीफे की मांग तेज
अदालत द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएमएलए की धारा 3 के तहत आरोप तय किए जाने के बाद झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर चौतरफा हमला बोल दिया है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ अदालत में आरोप तय हो चुके हैं। उन्हें अविलंब इस्तीफा देकर एक आम नागरिक की तरह नियमित सुनवाई का सामना करना चाहिए। मुख्यमंत्री पद का प्रभाव न्यायिक प्रक्रिया पर नहीं पड़ना चाहिए। वह पहले भी गिरफ्तारी से पहले करीब 40 घंटे तक गायब रहे और जेल में रहते हुए सरकार चलाते रहे। अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो पद छोड़कर निष्पक्ष ट्रायल का सामना करें। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए मुकदमा लड़ना झारखंड की गरिमा के खिलाफ है।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल के शांति नगर स्थित 8.86 एकड़ जमीन के अवैध अधिग्रहण, फर्जीवाड़े और आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, इस विवादित भूमि का कुल बाजार मूल्य 31.7 करोड़ रुपये से अधिक है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने पद का दुरुपयोग कर इस भूमि पर अवैध रूप से कब्जा जमाया। ईडी ने इस मामले में 30 मार्च 2024 को 5,500 से अधिक पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था। इस आरोप पत्र में सोरेन के अलावा 16 लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है। सोरेन को छोड़कर बाकी 16 आरोपियों पर अदालत पहले ही आरोप तय कर चुकी है, जिनमें भानु प्रताप प्रसाद, तापस घोष, शेखर कुशवाहा, विनोद कुमार सिंह, सद्दाम हुसैन, अंतु तिर्की, राजकुमार पाहन, अफसर अली, इरशाद अख्तर, कुमार राजश्री, मनोज कुमार यादव, प्रियरंजन सहाय, बिपिन सिंह, संजीत कुमार और इरशाद शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत के सामने दावा किया है कि हेमंत सोरेन साल 2010-11 से ही इस जमीन पर अवैध और गुप्त तरीके से नियंत्रण बनाए हुए थे। जांच के दौरान ईडी ने कई डिजिटल और भौतिक सबूत जुटाए हैं। ईडी को सोरेन के करीबी विनोद सिंह के मोबाइल से 8.86 एकड़ जमीन पर एक भव्य बैंक्वेट हॉल बनाने का विस्तृत आर्किटेक्ट और साइट प्लान मिला था, ईडी के अनुसार इसे भी सोरेन की सहमति से तैयार किया गया था।
इसके बाद ईडी ने वहां देखरेख करने वाले संतोष मुंडा से प्राप्त हुए बिल और अन्य दस्तावेजों को चार्जशीट का हिस्सा बनाया है। साथ ही संतोष मुंडा ने बयान दिया है कि वह पिछले 14-15 वर्षों से हेमंत सोरेन की इस संपत्ति की देखरेख कर रहा है। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि अंचल कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन के असली रैयतों (मालिकों) को बेदखल कर, जाली दस्तावेजों और फर्जी खरीदार-विक्रेताओं के जरिए स्वामित्व के विवरण बदले गए थे।
झामुमो ने हेमंत सोरेन को बताया निर्दोष
जबकि झामुमो नेता मनोज पांडे ने इस घटनाक्रम पर कहा कि आरोप तय होना अदालत की प्रक्रिया का हिस्सा है। अभी सुनवाई और बहस होगी, उसके बाद अदालत फैसला करेगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हमारे नेता निर्दोष हैं और हमें विश्वास है कि अंत में सत्य की जीत होगी और हेमंत सोरेन बरी होंगे।
हालांकि, यह कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए इस मुकदमे का सामना करना हेमंत सोरेन के लिए एक बड़ी नैतिक परीक्षा होगी। 30 नवंबर से शुरू होने वाली गवाही झारखंड की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
हेमंत सोरेन गिरफ्तारी से लेकर आरोप तय होने तक का पूरा घटनाक्रम
31 जनवरी 2024: इस पूरे मामले में पहली बार प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री आवास पर सात घंटे की लंबी पूछताछ की। इसके तुरंत बाद राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते ही ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था।
28 जून 2024: करीब पांच महीने जेल में बिताने के बाद, झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को नियमित जमानत दे दी। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली।
08 जून 2026: मामले की सुनवाई आगे बढ़ने पर रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने हेमंत सोरेन की तरफ से दाखिल आरोप मुक्त करने की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
18 सितंबर 2026: विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ हेमंत सोरेन ने झारखंड उच्च न्यायालय में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की, लेकिन उच्च न्यायालय के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने उनकी इस याचिका को भी खारिज कर दिया।
30 सितंबर 2026: सोरेन ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देकर उच्च न्यायालय में एक नई रिट याचिका दायर कर निचली अदालत की कार्यवाही और आरोप गठन पर रोक लगाने की अंतिम कोशिश की। हालांकि, चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक की खंडपीठ ने उन्हें कोई अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
30 सितंबर 2026 (शाम): विशेष पीएमएलए अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए। इसके साथ ही इस पूरे घोटाले में अब आगे नियमित न्यायिक सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

















