गरबा और धार्मिक आयोजनों में प्रवेश को लेकर महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे का एक बयान चर्चा में है। राणे ने कहा कि उन्होंने गरबा आयोजनों में आने वाले लोगों के केवल आधार कार्ड की जांच की बात नहीं कही थी। उनके मुताबिक, पहचान पत्र की जांच के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि धार्मिक आयोजन की मर्यादा बनी रहे।
नितेश राणे ने कहा कि गरबा में शामिल होने वाले लोगों के माथे पर तिलक लगाया जाना चाहिए और उनसे हनुमान चालीसा का पाठ भी कराया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि आज के समय में आधार कार्ड लगभग हर व्यक्ति के पास होता है, इसलिए केवल आधार कार्ड देखकर किसी की धार्मिक आस्था या आयोजन में उसकी भागीदारी के उद्देश्य का पता नहीं लगाया जा सकता। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि जिस तरह अलग-अलग धर्मों के धार्मिक आयोजनों में कुछ नियम और परंपराएं होती हैं, उसी तरह हिंदू धार्मिक आयोजनों की भी अपनी मर्यादा और परंपराएं हैं। उन्होंने गरबा और नवरात्रि के धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व सनातन हिंदू परंपरा में विशेष स्थान रखता है। नवरात्रि के दौरान देवी की पूजा की जाती है और मूर्ति पूजा भी इसी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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नितेश राणे ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति की धार्मिक मान्यताएं उसे गरबा या नवरात्रि जैसे आयोजन में शामिल होने की अनुमति नहीं देती हैं, तो फिर वह ऐसे धार्मिक कार्यक्रम में शामिल क्यों होना चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू धार्मिक आयोजन में शामिल होना चाहता है, तो उसे हिंदू बन जाना चाहिए।












