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SIR पर कांग्रेस का दोहरा रवैया उजागर: खुद उठाई थी फर्जी वोटरों को हटाने की मांग, अब SIR पर उठा रही सवाल!

Congress Double Standards on SIR: चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस का दोहरा मापदंड। राज्यों में खुद फर्जी वोटरों को हटाने की मांग की और अब विरोध।

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अभय कुमार

कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक स्थिति काफी विषम हो गई हैं क्योंकि मोदी सरकार के खिलाफ उसे कोई भी घोटाला या अन्य किसी भी प्रकार का मुद्दा नहीं मिल रहा है। अतएव अब कांग्रेस और उसके सहयोगियों का प्रयास चुनावों को संदिग्ध बनाने पर आकर टिक गया है। कांग्रेस पार्टी अब चुनाव आयोग को संदिग्ध करने का प्रयास करती दिख रही है। कांग्रेस पार्टी को अगले वर्ष पांच प्रदेशों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा के विधानसभा के चुनाव में किसी भी प्रकार का कोई भी सकारात्मक संकेत नहीं दिख रहा है। अतएव कांग्रेस पार्टी इस प्रकार की हरकत कर रही है। कांग्रेस पार्टी का अगला निशाना इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन बन सकता है।

कांग्रेस पार्टी और इंडि गठबंधन के दलों का दोहरा मापदंड है। एसआईआर से पहले अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस और दूसरे दलों ने बार-बार बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता होने का मुद्दा उठाया और एसआईआर में लगभग उसी के आसपास फ़र्ज़ी, मृत, गायब मतदाताओं का नाम हटाया गया था। अब भाजपा और एनडीए की सरकार को बदनाम करने के लिए अब यही दल एसआईआर पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी द्वारा सत्ता में रहते हुए अलग-अलग राज्यों में चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने लाखों मतदाताओं का नाम हटाया था।

पश्चिम बंगाल

पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद और पूर्व नौकरशाह जवाहर सरकार ने 11 नवंबर 2025 को चुनाव आयोग से पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को सही करने की अपील किया था। उन्होंने सोशल ट्विटर और मीडिया के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से के दोहरे, मृत,लापता और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने का मांग किया था। जवाहर सरकार ने दावा किया था कि राज्य की मतदाता सूची में ऐसे विसंगतिपूर्ण या फर्जी नामों की संख्या 70 लाख से लेकर 1.25 करोड़ के बीच हो सकती है, जिन्हें हटाया जाना जरूरी है। उनका यह बयान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ को तुरंत रोकने की मांग के बाद आया था। जवाहर सरकार ने इसके विपरीत जाकर मतदाता सूची की शुद्धता पर जोर दिया था। पश्चिम बंगाल में एसआईआर हुई और लगभग 90 लाख दोहरे, मृत,लापता और फर्जी मतदाताओं के नाम वोटर हटाए गए थे। जवाहर सरकार जितना संख्या में डुप्लीकेट डेड मिसिंग और फर्जी मतदाताओं के नामों का आकलन कर रहे थे लगभग उतने ही गलत मतदाता का नाम हटाए गया था। इसके बाद भी कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों के द्वारा चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाया जा रहा है।

बिहार

हिंदुस्तान टाइम्स ने 9 अगस्त 2013 को “Bihar fakes it at the poll booth, finds 76 lakh ‘suspect’ voters” शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित किया था। उस समय चुनाव अधिकारियों द्वारा राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 76 लाख संदिग्ध/फर्जी मतदाताओं की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया था। विदित हो की उस समय केंद्र में कांग्रेस पार्टी नीत यूपीए की सरकार थी। इसके 12 साल बाद, चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बिहार की मतदाता सूची से करीब 65 लाख डुप्लिकेट, मृत, लापता, और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। द हिंदू और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट्स के अनुसार इन 65 लाख नामों में लगभग 22 लाख मृत, 36 लाख स्थायी रूप से पलायन कर चुके या लापता और 7 लाख से अधिक डुप्लिकेट (दो जगह दर्ज) मतदाता शामिल थे। इस प्रकार हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने ने सालों पहले बिहार की मतदाता सूची में जितनी गड़बड़ी या फर्जी नामों का अंदेशा जताया था 2025 की बड़ी सफाई में लगभग उतनी ही संख्या में अमान्य नाम हटाए गए थे। अतएव बिहार के संदर्भ में कांग्रेस और उसके सहयोगियों का आरोप सिर्फ अपनी हार से ध्यान भटकाने का हैं।

महाराष्ट्र

The Hindu अखबार के 27 अप्रैल 2014 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 और 2013 के बीच महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान लगभग 71.76 लाख नाम हटाए गए थे और करीब 74.74 लाख नए नाम जोड़े गए थे। इस समयावधि में केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन सत्ता में था। चुनाव आयोग ने तब बताया था कि यह कार्रवाई मतदाता सूचियों में सुधार करने, फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को हटाने और फोटो मैचिंग को दुरुस्त करने के लिए की गई थी।

2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के बीच 5 महीनों के अंतराल में महाराष्ट्र में करीब 39 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। इसके बाद 2026 में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के ड्राफ्ट में लगभग 2.07 करोड़ नाम हटाए जाने को कांग्रेस पार्टी ने वोट चोरी का मामला करार दिया था। उनका तर्क था कि महज 5 महीने में इतनी बड़ी संख्या में वोटर्स का जुड़ना और राज्य की वयस्क आबादी के अनुमान से अधिक वोटर होना विसंगति को दर्शाता है। राहुल गांधी जानबूझकर भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए यह भूल गए की उनकी सरकार में इससे लगभग दोगुने नाम जोड़े गए थे। चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावों से ठीक पहले युवाओं और नए मतदाताओं का पंजीकरण बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है।

राजस्थान

15 अगस्त 2018 को एनडीटीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने दावा किया था कि राजस्थान की मतदाता सूची में लगभग 42 लाख फर्जी मतदाता हैं और पार्टी ने चुनाव आयोग से इन विसंगतियों को दूर करने की मांग किया था। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 41.85 लाख नाम हटाए गए या चिन्हित किए गए।

इनमे करीब 8.75 लाख मतदातव्यो की मृत्यु, 29.6 लाख दूसरे स्थानों पर स्थायी पलायन या बस जाने और करीब 3.44 लाख फ़र्ज़ी नाम शामिल था। मगर इस प्रक्रिया के बाद कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया की इस व्यापक छंटनी प्रक्रिया में उनके 70% से 80% समर्थकों या वोटरों के नाम काट दिए गये हैं। कांग्रेस पार्टी का यह आरोप चुनावों में हार के बाद उसपर पर्दा डालने का एक तरकीब था।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने 16 सितंबर 2018 को ट्वीट करके आंध्र प्रदेश की मतदाता सूची में लगभग 50 लाख फर्जी मतदाता दर्ज हैं का मुद्दा उठाया था। चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तहत की गई हालिया जांच में आंध्र प्रदेश की मतदाता सूची से लगभग 44.89 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गया हैं। इनमे 22.30 लाख गायब, 15.22 लाख मृत और 7.37 लाख मतदाता एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए थे। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने 2018 में जितने फर्जी या गड़बड़ मतदाताओं का दावा किया था चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया में लगभग उतने ही नाम हटाए गए हैं। इसके बावजूद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब इस SIR प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं और इसे “वोट चोरी” की साजिश बता रहे हैं। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का विगत दो विधानसभा चुनावों में खाता तक नही खुल रहा हैं इस कारण पार्टी इस प्रकार का मिथ्या प्रलाप कर रही हैं।

सितंबर 2018 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि तेलंगाना की मतदाता सूची में लगभग 70 लाख गड़बड़ियां हैं। उस समय कांग्रेस का दावा था कि इस सूची में लगभग 30 लाख फ़र्ज़ी, 20 लाख मतदाताओं के नाम राज्य विभाजन के बहाने मनमाने ढंग से हटा दिए गए और 18 लाख नाम दोनों राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सामान्य हैं। कांग्रेस पार्टी ने तब चुनाव आयोग से मांग किया था कि चुनाव कराने से पहले वोटर लिस्ट का शुद्धीकरण और सत्यापन किया जाए जिससे फर्जी वोटों के आधार पर चुनाव प्रभावित नही हो। वर्ष 2026 में पूरे देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तहत तेलंगाना में जब इस डिजिटल और व्यावहारिक सत्यापन को लागू किया गया तो लगभग 73.39 लाख मतदाताओं के नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में डालकर ड्राफ्ट रोल से हटा दिया गया था। 2018 में खुद वोटर लिस्ट सुधारने की मांग करने वाली कांग्रेस पार्टी अब 2026 में इस एसआईआर प्रक्रिया को “वोट चोरी” और लोकतंत्र पर हमला बता रही है। कांग्रेस का यह रुख अंतर्विरोधों से भरा है क्योंकि 70 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की मांग 2018 में किया था। चुनाव आयोग ने जब 73 लाख फर्जी मतदाताओं का नाम हटाया तब कांग्रेस पार्टी इसे चुनाव प्रभावित करने का जरिया बताने लगी हैं।

केरल

केरल में मार्च 2021 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने दावा किया था कि राज्य की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी और दो-दो बार दर्ज नाम मौजूद हैं। उन्होंने यूडीएफ कार्यकर्ताओं के माध्यम से लगभग 4.34 लाख से 5 लाख फर्जी या दोहरे मतदाताओं की सूची होने का दावा करते हुए चुनाव आयोग से इसकी शिकायत किया था। 2026 में केरल विधानसभा चुनावों के बाद गृह मंत्री व कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने चुनाव आयोग द्वारा की गई एसआईआर प्रक्रिया की सराहना की है। खबरों के मुताबिक एसआईआर प्रक्रिया के तहत केरल में लगभग 8.6 लाख से 9 लाख फर्जी, मृत या गायब मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाया गया था। चेन्निथला ने स्पष्ट तौर पर कहा की इस प्रक्रिया के कारण फर्जी मतदान रोकने में मदद मिली, जिससे कांग्रेस नीत यूडीएफ को लाभ हुआ हैं। केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से चौथे बार के सांसद शशि थरूर ने मई 2026 में कहा था कि केरल में एसआईआर प्रक्रिया से सीपीएम के फर्जी और दोहरे मतदान वाले नाम हटने से अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को फायदा है।

दिल्ली

2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए एक गहन अभियान चलाया था। चुनाव आयोग ने दिल्ली की मतदाता सूची से लगभग 13.58 लाख (फर्जी, दोहरी प्रविष्टि वाले और स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए थे। इस छंटनी के दौरान 81,000 से अधिक मामले दोहरे नामों के, 12 लाख से अधिक मामले ऐसे मतदाताओं के थे जो अपना घर बदल चुके थे और लगभग 1.24 लाख नाम मृत मतदाताओं के थे। यह कार्रवाई जून से अगस्त 2013 के बीच पूरी की गई थी जो कि दिसंबर 2013 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से लगभग 4 महीने पहले का समय था। 2013 में केंद्र में और दिल्ली प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। वर्तमान में दिल्ली में कोई भी चुनाव नहीं है। एसआईआर प्रक्रिया के द्वारा दिल्ली में मतदाता सूची को निष्पक्ष बनाया जा रहा है। मगर कांग्रेस पार्टी फिर भी इसे वोट चोरी बताने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों के द्वारा चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को लगातार निशाना पर लिया जा रहा है।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पर सवाल

वर्तमान में एसआईआर में गहनता से जांच करने के बाद कई बार मतदाताओं को मौका देने के बाद, लंबा समय देने के बाद भी अगर कोई खुद को मतदाता साबित नहीं कर पा रहा है तो उनका नाम हटाया जा रहा है। लेकिन इसको लेकर भी विलाप किया जा रहा है। चुनाव आयोग को संदिग्ध करने के लिए सुनियोजित तरीके से गलतबयानी किया जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाकर उनके घर पर हमले का प्रयास किया जा रहा है।

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