झारखंड में बच्चों को अपराध की दुनिया में धकेलने वाले एक पुराने नेटवर्क ने अब एक नए और ज्यादा गंभीर सवाल को जन्म दे दिया है कि क्या बच्चों को चोर बनाने के लिए ही उनकी चोरी की जा रही है?
ताजा मामला रांची और साहिबगंज से जुड़ा है। 24 सितंबर को रांची रेलवे स्टेशन के बाहर से चार वर्षीय विवान रजवाड़ गायब हो गया। करीब दो दिन की पुलिस कार्रवाई के बाद उसे साहिबगंज के तीनपहाड़ से सकुशल बरामद कर लिया गया। इस मामले में धनबाद और साहिबगंज में कार्रवाई करते हुए छह आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चे के अपहरण का उद्देश्य क्या था और गिरफ्तार आरोपितों के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।
मां और बहन के साथ रांची रेलवे स्टेशन पहुंचा था विवान
घटना के समय विवान अपनी मां और छह वर्षीय बहन के साथ रांची रेलवे स्टेशन पहुंचा था। परिवार को छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जाना था। स्टेशन के बाहर मां ऑटो चालक से बस स्टैंड जाने का रास्ता पूछ रही थीं। इसी दौरान सामान के पास खड़ा चार वर्षीय विवान अचानक गायब हो गया। परिवार ने काफी तलाश की और इसके बाद चुटिया थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने स्टेशन और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तथा तकनीकी जांच और मानवीय सूचना के आधार पर बच्चे की तलाश शुरू की।
जांच की कड़ी धनबाद तक पहुंची। पुलिस ने रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन को धनबाद रेलवे स्टेशन के आसपास से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर रांची पुलिस ने साहिबगंज पुलिस के सहयोग से तीनपहाड़ में छापेमारी की।
तीनपहाड़ के बाबूपाड़ा गांव में बिट्टू सिंह के घर से चार वर्षीय विवान को सकुशल बरामद किया गया। मौके से बिट्टू सिंह और पाकुड़ निवासी कयूम अंसारी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में कार्रवाई आगे बढ़ाई। राजमहल से जमादार शेख, तीनपहाड़ के नीचे टोला से तस्वीर शेख और बाबूपुर गांव से छोटू नोनिया को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस सभी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चे के अपहरण के पीछे क्या उद्देश्य था और क्या आरोपितों के तार बच्चों को चोरी के लिए इस्तेमाल करने वाले किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं।
पुलिस की जांच में इस बात का भी उल्लेख सामने आया है कि तीनपहाड़ और आसपास के इलाकों में बच्चों को चोरी की घटनाओं में इस्तेमाल करने वाले गिरोहों की जानकारी पहले भी पुलिस को मिलती रही है। मौजूदा मामले में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि विवान को आगे चलकर चोरी के लिए इस्तेमाल करने की कोई योजना थी या नहीं। हालांकि, इस उद्देश्य की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
तीनपहाड़ का पुराना कनेक्शन
विवान प्रकरण इसलिए ज्यादा गंभीर हो जाता है क्योंकि साहिबगंज का तीनपहाड़ क्षेत्र पहले भी नाबालिगों से चोरी कराने वाले गिरोहों के मामलों में सामने आता रहा है।
2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में साहिबगंज के तीनपहाड़-बाबूपुर और महाराजपुर क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल चोरी के नेटवर्क का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस नेटवर्क में 10 से 12 वर्ष तक के बच्चों को भी शामिल किया जाता था। महाराजपुर में बच्चों को मोबाइल चोरी की ट्रेनिंग दिए जाने और प्रशिक्षण के बाद उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजे जाने का दावा रिपोर्ट में किया गया था।
2023 में रांची पुलिस ने नाबालिगों से मोबाइल चोरी कराने वाले गिरोह का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, साहिबगंज के तीनपहाड़ और राजमहल क्षेत्र में बच्चों को मोबाइल चोरी की ट्रेनिंग दी जाती थी। इसके बाद उन्हें ट्रेन से रांची लाया जाता और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चोरी कराई जाती थी। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान तीन नाबालिगों से करीब तीन दर्जन मोबाइल बरामद किए थे।
2025 में रांची के खादी मेले में भी बच्चों के जरिए मोबाइल चोरी कराने वाला गिरोह पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, गिरोह तीनपहाड़ क्षेत्र से जुड़ा था और बड़े आयोजनों में भीड़ का फायदा उठाकर बच्चों से मोबाइल चोरी कराता था। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों को चोरी के बदले पैसे दिए जाते थे और उन्हें गिरोह में शामिल करने की एक वजह यह भी बताई गई कि नाबालिग होने के कारण उनके पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई का स्वरूप अलग होता है।
एक महिला पर नाबालिगों से मोबाइल और पर्स चोरी करने का आरोप
इसी वर्ष रांची में एक अन्य मामले में तीनपहाड़ से आई एक महिला पर नाबालिग बच्चों से मोबाइल और पर्स चोरी कराने का आरोप लगा। पुलिस ने दो नाबालिगों को पकड़ा था। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि महिला उन्हें अपने साथ लेकर रांची आई थी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चोरी कराती थी।
2026 में भी यह सिलसिला थमा नहीं। मई में रांची रेलवे स्टेशन पर एक अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें चार नाबालिग थे। पुलिस की जांच में साहिबगंज के तीनपहाड़ क्षेत्र से गिरोह के संबंध की बात सामने आई। नाबालिगों के जरिए स्टेशन और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मोबाइल चोरी कराने का आरोप था।
अप्रैल 2026 में दिल्ली में पकड़े गए एक मोबाइल चोरी गिरोह की जांच में भी साहिबगंज के महाराजपुर क्षेत्र से बच्चों को कथित रूप से चोरी के लिए तैयार करने और इस्तेमाल करने का मामला सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों को दूसरे शहरों में ले जाकर चोरी के काम में लगाया जाता था।
रांची रेलवे स्टेशन से 4 वर्षीय विवान के गायब हो जाने के मामले में पुलिस यह पता लगाने की बात कही है कि गिरफ्तार आरोपितों ने पहले कितने बच्चों को निशाना बनाया और क्या दूसरे जिलों में हुई बच्चों की गुमशुदगी की घटनाओं से इनका कोई संबंध है।
यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं है। जिस उम्र में बच्चे स्कूल और परिवार के बीच अपना भविष्य बना रहे होते हैं, उसी उम्र में उन्हें अपराध के लिए प्रशिक्षित किया जाना उनके पूरे जीवन को प्रभावित कर सकता है।
विवान की बरामदगी ने एक बच्चे को उसके परिवार तक वापस पहुंचा दिया है। लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या वह एक अकेली घटना का शिकार था या ऐसे किसी बड़े तंत्र की कड़ी, जिसमें बच्चों को पहले चोरी के लिए इस्तेमाल किया जाता था और अब उन्हें चोर बनाने के लिए ही निशाना बनाया जा रहा है?











