अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोजिटो ने हाल ही में H-1B वीजा प्रोग्राम को लेकर कुछ बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि अगले एक साल में यानी 365 दिनों में यह प्रोग्राम काफी अलग दिखने वाला है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे ‘टोटल शटडाउन’ यानी पूरी तरह बंद होने का इशारा बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इसका असर भारतीय कामगारों पर पड़ सकता है।
ये बातें ट्रंप प्रशासन के दौरान आई हैं, जब H-1B प्रोग्राम पर नजर सख्त की जा रही है। H-1B वो वीजा है जिससे अमेरिकी कंपनियां स्पेशल स्किल वाले विदेशी वर्कर्स को नौकरी पर रख सकती हैं।
डी’एस्पोजिटो ने ठीक-ठीक क्या बोला
वॉशिंगटन में बोलते हुए उन्होंने बताया कि विदेशी लेबर सिस्टम में धोखाधड़ी के खिलाफ जांच चल रही है और केस तैयार किया जा रहा है। बेनी जॉनसन के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हमारे पास हथकड़ियां तैयार हैं… हम केस बना रहे हैं। व्हाइट हाउस और इस प्रशासन का फोकस एक कहानी बता रहा है। हम अमेरिकी लोगों के सामने केस साफ-साफ रख रहे हैं। मुझे लगता है कि विदेशी लेबर वीजा प्रोग्राम 365 दिनों बाद आज से बहुत अलग दिखेगा।”
कुछ न्यूज आउटलेट्स ने इसे प्रोग्राम पूरी तरह बंद होने का संकेत माना, लेकिन उनके खुद के शब्दों में सिर्फ यह है कि सिस्टम बहुत अलग हो जाएगा। उन्होंने ये भी साफ कहा कि ये कोई सामान्य पेपरवर्क की जांच नहीं है, बल्कि असल में कुछ गंभीर चल रहा है।
जांच का दायरा बढ़ रहा है
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशासन विदेशी लेबर फ्रॉड, वर्कर्स के शोषण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसी चीजों की देशभर में जांच बढ़ा रहा है। डी’एस्पोजिटो ने एक पोस्ट में ‘फेक एम्प्लॉयर्स’, ‘शाम जॉब्स’ और ‘वीजा मिल्स’ का जिक्र किया। लेबर डिपार्टमेंट के ऑफिस ऑफ इंस्पेक्टर जनरल ने 18 सितंबर को बताया कि उन्होंने कई जगहों पर दर्जनों सबपोना जारी किए और सर्च वारंट भी चलाए।
सिर्फ H-1B तक बात नहीं रुकी। 22 सितंबर के एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि कुछ कॉलेजों पर J-1 वीजा का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। वे स्पॉन्सर, ग्रांट मनी और इस स्कीम के पीछे वाले लोगों तक पहुंच रहे हैं और धोखेबाजों को हथकड़ी लगने की चेतावनी दी।
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बाकी क्या कदम उठाए जा रहे हैं
इसके साथ ही कुछ और नियम भी आए हैं। एक प्रेसिडेंशियल एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में कहा गया है कि विदेशी वर्कर की अर्जी लगाने वाली कंपनियों को ये चेक करना होगा कि उन्होंने हाल में उसी तरह के अमेरिकी वर्कर्स को नौकरी से तो नहीं निकाला। कुछ नए ऑफशोर पेटिशन पर 1 लाख डॉलर का फीस भी लगाया गया है। कुछ ओवरसीज H-1B वालों पर एंट्री रेस्ट्रिक्शन सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया गया है।
व्हाइट हाउस का कहना है कि पहले वाले रेस्ट्रिक्शन के बाद सबसे बड़ी अमेरिकी आईटी आउटसोर्सिंग फर्म्स से H-1B रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत की गिरावट आई। पिछले साल सितंबर 2025 में लेबर डिपार्टमेंट ने ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ भी शुरू किया था। इसका मकसद था कि कंपनियां पहले योग्य अमेरिकियों को तरजीह दें और H-1B के गलत इस्तेमाल पर जवाबदेह ठहराया जाए।















