बिश्केक/नई दिल्ली। भारत और किर्गिस्तान के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और वैज्ञानिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए बिश्केक में ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर सिविलाइज़ेशनल स्टडीज़: मानस एंड महाभारत’ का आधिकारिक उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध किर्गिज महाकाव्य ‘मानस’ के पहले हिंदी अनुवाद का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन किर्गिस्तान में भारतीय दूतावास और भारत में किर्गिज दूतावास के सहयोग से संपन्न हुआ।
यह सेंटर नई दिल्ली स्थित ‘सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस’ (CSIR) और किर्गिस्तान की ‘मानस नेशनल एकेडमी’ द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है। उद्घाटन समारोह के दौरान मानस नेशनल एकेडमी, CSIR तथा किर्गिस्तान की सात प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ (KNU, BSU, AUCA, Ala-Too आदि) के बीच त्रिपक्षीय सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
श्री सुनील आंबेकर रहे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य और अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत और किर्गिस्तान के सदियों पुराने सांस्कृतिक व मानवीय मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस तरह भारतीय संस्कृति पर ‘महाभारत’ का गहरा प्रभाव है, ठीक उसी प्रकार ‘मानस’ महाकाव्य हजारों वर्षों से किर्गिज समाज की सांस्कृतिक धरोहर रहा है।

उन्होंने इस पहल को ‘नेशनल एकेडमी मानस’ का एक ऐतिहासिक कदम बताया और एकेडमी की प्रेसिडेंट प्रोफेसर नजीरा आली किजी, गुलजात तथा हिंदी अनुवादकों के समर्पित प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में भाग लेने गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख विद्वान शामिल रहे:
प्रोफेसर रमाकांत द्विवेदी (चेयरमैन, इंडिया-सेंट्रल एशिया फाउंडेशन व डायरेक्टर, MERI सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज)
प्रोफेसर हेम चंद्र पांडे (जाने-माने भाषाविद् व पूर्व डायरेक्टर, सेंटर फॉर रशियन लैंग्वेज एंड लिटरेचर, JNU)
डॉ. पुनीत गौड़ (मानद डायरेक्टर, CSIR सेंटर फॉर रिसर्च इन इंटरनेशनल रिलेशंस)

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति प्रशासन में रणनीतिक योजना एवं सुधार विश्लेषण प्रभाग के प्रमुख ओक्त्याब्र कपालबायेव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इसके बाद कपालबायेव, किर्गिस्तान के विज्ञान व उच्च शिक्षा उप-मंत्री दुरुसबेक कोज़ुएव, संस्कृति उप-मंत्री साल्क्यन सारनोगोएवा और किर्गिस्तान में भारत के राजदूत बिरेंदर सिंह यादव ने समारोह में शिरकत की।
महाकाव्य ‘मानस’ का पहला हिंदी अनुवाद प्रस्तुत
समारोह का मुख्य आकर्षण प्रोफेसर हेम चंद्र पांडे और प्रोफेसर रमाकांत द्विवेदी द्वारा तैयार किया गया किर्गिज महाकाव्य ‘मानस’ (किर्गिज़ उच्चारण के अनुसार “मनास) का पहला हिंदी अनुवाद रहा। प्रोफेसर द्विवेदी ने बताया कि यह अनुवाद किर्गिस्तान के ‘पीपल्स राइटर’ मार बैज़िएव द्वारा किए गए रूसी काव्यात्मक रूपांतरण पर आधारित है। इसमें ‘मानस’ महाकाव्य के तीनों भाग- “मानस,” “सेमेतेई,” और “सेइतेक” शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारतीय पाठकों को किर्गिज साहित्य से परिचित कराना और अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ाना है।
प्रधानमंत्री मोदी के ‘सभ्यतागत संवाद मंच’ के विजन को मिलेगा बल
डॉ. पुनीत गौड़ ने कहा कि यह नया केंद्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम’ (सभ्यतागत संवाद मंच) के प्रस्ताव के अनुरूप है। यह सेंटर दोनों देशों के बीच तुलनात्मक सभ्यतागत अध्ययन, महाकाव्य परंपराओं (महाभारत व मानस), मानवीय कूटनीति, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उभरते शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में शोध एवं सहयोग को प्राथमिकता देगा।

















