गत जून को सोलापुर जिले के करमाला स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का नामकरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सह सरकार्यवाह श्री मदनदास देवी की पावन स्मृति में ‘स्व. मदनदास देवी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान’ किया गया। समारोह के मुख्य वक्ता थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने वीडियो संदेश के माध्यम से शुभकामनाएं प्रेषित कीं, जबकि महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर श्री सुनील आंबेकर ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता होनी चाहिए। इसके लिए आय और स्वरोजगार के साधन केवल महानगरों तक सीमित न रहकर गांव-कंदराओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचने अनिवार्य हैं। देश की आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए उच्च तकनीकी शिक्षा देने वाले ‘आईआई’ संस्थानों की ही भांति, जमीनी स्तर पर कुशल कार्यबल का निर्माण करने वाले ‘आईटीआई’ संस्थानों को भी सशक्त बनाना होगा। समय की मांग के अनुरूप इनका आधुनिकीकरण भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मदनदास जी संघ की तपःपूत भट्ठी में गढ़े गए सार्वजनिक जीवन के एक आदर्श और अप्रतिम कार्यकर्ता थे। स्वयं सदैव नेपथ्य में रहकर संगठन और राष्ट्रकार्य को कैसे गति दी जाए- यही उनका जीवनव्रत था, जिसे उन्होंने अंतिम सांस तक पूर्ण निष्ठा से निभाया। उन्होंने कहा कि बदलते समय की पदचाप को पहचान कर आईटीआई जैसे संस्थानों में भी युगानुकूल सुधार होने चाहिए। इसी दूरगामी सोच के साथ मदनदास जी ने 1989-90 में नागपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से ऐतिहासिक ‘राष्ट्रीय आईटीआई सम्मेलन’ आयोजित करवाया था। आज करमाला आईटीआई का नामकरण उनके उन्हीं वैचारिक संकल्पों की सार्थक परिणति है।
श्री देवेंद्र फडणवीस ने स्व. मदनदास जी की पावन स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि युवाओं में राष्ट्र निर्माण की चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का ध्येय जागृत करने में मदनदास जी का योगदान अतुलनीय है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने जीवन-पर्यंत भगीरथ प्रयास किए। आज के युग में आईटीआई केवल तकनीकी प्रशिक्षण का केंद्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के लिए कुशल, सक्षम और राष्ट्रभक्त मानव संसाधन का निर्माण करने वाला ऊर्जा केंद्र है। विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में इन संस्थानों का महत्व अद्वितीय है।
श्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा कि मदनदास जी सदैव भारत के आर्थिक विकास (जीडीपी) को बढ़ाने और युवाओं को स्वावलंबी बनाने के प्रबल पक्षधर थे। उनके इसी चिंतन को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार प्रदेश के आईटीआई संस्थानों के व्यापक आधुनिकीकरण के लिए 5,700 करोड़ रु. का विशाल कोष खर्च कर रही है। आईटीआई में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इलेक्ट्रिकल जैसे आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा चुके हैं तथा आगामी वर्ष में पांच नए उन्नत पाठ्यक्रम भी जोड़े जाएंगे। इस अंचल में कौशल विकास को अधिक गति देने के लिए करमाला आईटीआई में ‘टाटा इंस्टीट्यूट’ की एक स्वतंत्र शाखा शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी।

















