पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित लगभग दो शताब्दी पुराने रामलीला मंदिर को लेकर विवाद सामने आया है। डेरा इस्माइल खान जिले में मौजूद इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को हटाकर उसकी जगह व्यावसायिक परिसर बनाने की कथित योजना का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू समुदाय के सदस्यों, स्थानीय निवासियों और नागरिक संगठनों ने मंदिर के संरक्षण की मांग उठाई। बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन ने हस्तक्षेप कर संपत्ति का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) ने मंदिर परिसर को सील कर दिया। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान में ऐतिहासिक धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
मंदिर के आसपास गतिविधियों से शुरू हुआ विवाद
मामला डेरा इस्माइल खान के रहीम बाजार इलाके का है, जहां मंदिर के आसपास तोड़फोड़ किए जाने की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और हिंदू समुदाय के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर संबंधित गतिविधियों पर सवाल उठाए। डेरा सिविल सोसाइटी और स्थानीय व्यापारी संघ के अध्यक्ष सोहेल अहमद आजमी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने दावा किया था कि उसे मंदिर गिराने का ठेका मिला है। इस दावे के बाद विवाद और बढ़ गया। स्थानीय प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात कर मंदिर की जमीन के स्वामित्व और वहां प्रस्तावित निर्माण की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि इस मामले को संसद में उठाया जाए, ताकि ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
ईटीपीबी ने मंदिर परिसर को किया सील
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया और मंदिर को अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड ने परिसर को सील कर दिया। इस कार्रवाई से फिलहाल मंदिर को गिराए जाने की आशंका के बीच प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप हुआ है। ईटीपीबी पाकिस्तान में विभाजन के बाद छोड़ी गई संपत्तियों के प्रबंधन के साथ-साथ हिंदू और सिख समुदायों के कई धार्मिक स्थलों की देखरेख भी करता है। रामलीला मंदिर को उन लगभग 400 संरचनाओं में शामिल बताया जाता है, जिन्हें बोर्ड ने सांस्कृतिक विरासत के तौर पर चिह्नित किया है। मंदिर से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि ऐसी धरोहरों को नुकसान से बचाया जा सके। ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के अध्यक्ष हारून सरब दयाल ने उम्मीद जताई कि खैबर पख्तूनख्वा में लागू राज्यपाल शासन के दौरान हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

















