फ्रांस में इन दिनों वामपंथियों ने आग लगा रखी है। छात्रों के कथित विरोध प्रदर्शनों के नाम पर वामपंथी और कट्टर इस्लामिस्ट लगातार फ्रांस की सड़कों पर उत्पात मचा रहे हैं। हजारों दुकानों को लूट लिया गया, पुलिस पर हमले किए गए, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। इसी क्रम में सोशल में पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें वामपंथियों और इस्लामवादियों के द्वारा एक फ्रांसीसी महिला की दुकान को लूटते देखा गया। महिला रो रही है और वह उनसे केवल ऐसा न करने की ही कहने की हिम्मत जुटा पा रही है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पेरिस की सड़कों पर मची लूटपाट और अफरा-तफरी मची हुई है। फ्रांसीसी महिला, जो अपनी दुकान लूटने वाली कम्युनिस्ट और इस्लामी गुंडों (कथित छात्रों) की भीड़ के सामने गिड़गिड़ा रही है, उसने संभवतः फ्रांस में इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व वाली वामपंथी “उदारवादी” सरकार को ही वोट दिया होगा। पोस्ट के कमेंट में लिखा था, फ्रांस को लोगों ने राष्ट्र्वादी नेता मरीन ले पेन को चुनाव में हराया और इसका नतीजा यह हो रहा है कि अब वामपंथी और कट्टरपंथी इस्लामवादी देश में आतंक फैला रहे हैं।
कब की है वायरल घटना
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ये वारदात 17 अक्तूबर की है, जो कि देश की राजधानी पेरिस की है। यही स्थित सुपरमार्केट में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई। इसमें देखा जा सकता है कि एक फ्रांसीसी महिला भीड़ से रुकने की गुहार लगाती दिखी। लेकिन, बेखौप दंगाइयों ने उसकी नजरों के सामने ही उसकी दुकान के सामानों को लूट लिया।
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हिंसा कैसे शुरू हुई
शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से अलग कुछ समूहों ने पुलिस और अधिकारियों को चौंका दिया। वे एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहे, सड़कें बंद कीं, आगजनी की और पुलिस से भिड़ गए। मास्क पहने लूटेरों ने मौके का फायदा उठाया। दुकानों के शीशे तोड़े और सामान उठा ले गए। पेरिस में कुछ बच्चे भी सामान लेकर भागते दिखे। गृह मंत्रालय के अनुसार, 1500 दुकानें लूटी गईं शनिवार को लगभग 2,400 गिरफ्तारियां हुईं। करीब 1,000 पुलिसकर्मी और जेंडरम घायल हुए, सात गंभीर रूप से। सेंट-एटिएन में 17 साल के एक लड़के का दाहिना हाथ क्राउड-कंट्रोल ग्रेनेड से उड़ गया। मुलहाउस में 17 साल की लड़की की एक आंख चली गई।
अल्ट्रा लेफ्ट ने की ये हिंसा
इस बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि हिंसा का कोई औचित्य नहीं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और लूट-पाट करने वालों के बीच फर्क करना जरूरी है। उन्होंने “अल्ट्रा-लेफ्ट” समूहों और अपराधियों को दोषी ठहराया। स्थानीय अधिकारी जरूरत पड़ने पर कुछ जमावड़ों पर रोक लगा सकते हैं।












