नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने शनिवार को स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के शेड्यूल से संबंधित सभी निर्णय ‘आयोग की सर्वसम्मति से’ लिए गए थे. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र चुनाव आयोग या उसके आईटी डिवीजन के किसी नीतिगत मामले से जुड़ा नहीं था, बल्कि यह आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था.
नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईसीआई के महानिदेशक (मीडिया) आशीष गोयल ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में शनिवार को आयोग की एक बैठक संपन्न हुई.
“सभी निर्णय आयोग की पूर्ण सहमति से लिए गए”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी आधिकारिक बयान के हवाले से बताया गया कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का शेड्यूल 27 अक्टूबर, 2025 को जारी किया गया था, जबकि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह 14 मई, 2026 को आयोग की सर्वसम्मति से जारी किया गया था.
“हाल के महीनों में आयोग ने देश भर में एसआईआर सहित कई निर्णय लिए हैं। बिहार से शुरू होकर पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के लिए 24 जून, 2025 को जारी एसआईआर का आदेश भी आयोग की सर्वसम्मति से दिया गया था, जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 27 मई, 2026 के अपने आदेश में बरकरार रखा गया है।”
कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र पर स्थिति स्पष्ट
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी. इन दावों को खारिज करते हुए ईसीआई ने कहा कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र किसी नीतिगत मामले से नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति के अधिकारी के कार्य-वितरण से जुड़ा था.
मुख्य बिंदु:
- कार्रवाई और क्रियान्वयन: संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-पुनर्वितरण आदेश दोनों आयुक्तों के निर्देशों के बाद लागू नहीं किए गए थे।
- आईटी डिवीजन की निगरानी: डीईसी द्वारा आईटी डिवीजन की निगरानी कभी भी वापस नहीं ली गई थी।
- विस्तार: देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद आंकड़े सामने आएंगे।
निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद एसआईआर प्रक्रिया और आयोग के भीतर निर्णयों की पारदर्शित को लेकर स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई है.
















