गुवाहाटी। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र के तत्वावधान में ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत एक भव्य सामूहिक वंदे मातरम् गायन समारोह का आयोजन श्रीमंत शंकरदेव अंतरराष्ट्रीय सभागार, कलाक्षेत्र, पंजाबारी में किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (सेवानिवृत्त) ने शिरकत की.

समारोह में उनके साथ एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) संजीव बोरदोलोई, संगठन मंत्री विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र डॉ. पवन तिवारी, सहित विद्या भारती के तमाम पदाधिकारी, पूर्व छात्र, शिक्षक, प्रबुद्ध नागरिक, माता-बहनें और भारी संख्या में उत्साहित विद्यार्थी उपस्थित रहे.
“वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रीय चेतना और एकात्मता का स्वर है” – डॉ. पवन तिवारी
कार्यक्रम के दौरान विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री डॉ. पवन तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत मात्र नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक एकात्मता और अनंत गौरव का अमर स्वर है. इसके 150 वर्ष पूर्ण होने का यह ऐतिहासिक अवसर पूरे देश के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है.

“माँ कामाख्या की पावन भूमि, श्रीमंत शंकरदेव की आध्यात्मिक चेतना और वीर लाचित बरफुकन के शौर्य से प्रेरित पूर्वोत्तर से उठने वाला वंदे मातरम् का यह स्वर संपूर्ण भारत की राष्ट्रीय एकात्मता का सबसे सशक्त प्रतीक है।” – डॉ. पवन तिवारी, संगठन मंत्री, विद्या भारती
सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व छात्र के रूप में शामिल हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी
मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक मंच पर पूर्व सेना प्रमुख के रूप में नहीं, बल्कि एक गौरवान्वित सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व छात्र के रूप में उपस्थित हुए हैं.

जनरल उपेंद्र द्विवेदी के संबोधन के मुख्य बिंदु:
- पूर्वोत्तर का महत्व: “पूर्वोत्तर वह स्थान नहीं है जहाँ भारत समाप्त होता है, बल्कि यह वह स्थान है जहाँ से भारत शुरू होता है। यह भारत का सच्चा प्रवेश द्वार है।”
- युवाओं के लिए मंत्र: युवाओं को अपने जीवन में Attitude, Adaptability और Ability (सकारात्मक सोच, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता और योग्यता) को अपनाने का संदेश दिया।
- Problem Fixer बनें: आज के युवाओं को केवल ‘Problem Finder’ नहीं बल्कि ‘Problem Fixer’ बनना चाहिए। जीवन में ‘Learn, Unlearn and Relearn’ के सिद्धांत को अपनाएं।
- शून्य-दस की आदत: युवाओं को प्रतिदिन सुबह 10 मिनट बिना मोबाइल के अपने लक्ष्य, कृतज्ञता और दिन के संकल्प पर विचार करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने देश के वीरों का स्मरण करते हुए वीर लाचित बरफुकन और कनकलता बरुआ के महान योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, एनसीसी और विद्या भारती जैसी संस्थाएं देश की विविधता को उसकी ताकत में बदलने का कार्य कर रही हैं। इस भव्य आयोजन ने पूर्वोत्तर से लेकर पूरे देश में राष्ट्रभक्ति की एक नई अलख जगाई है.


















