दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने चार प्रमुख पदों में से तीन पर जीत दर्ज की। यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव निर्वाचित हुए। जीत के बाद पाञ्चजन्य से बातचीत में तीनों ने अपने चुनावी अनुभव, अभियान और आगामी कार्यकाल की प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की। अब चुनाव परिणाम सामने आने के बाद उनकी अगली परीक्षा उन वादों को पूरा करने की है, जिन्हें उन्होंने छात्रों के बीच रखा था।
पहले दिन से काम का दावा
यश डबास के अनुसार, कार्यकाल के पहले दिन ही डूसू टीम ने कॉलेजों के प्राचार्यों और विभागाध्यक्षों को पत्र भेजकर पानी, हॉस्टल सेफ्टी ऑडिट, कैंटीन के भोजन की गुणवत्ता, वाटर टैंक की सफाई और वॉशरूम सैनिटेशन जैसे मुद्दे उठाए। कॉलेजों को इन समस्याओं पर कार्रवाई के लिए तीन दिन का समय देने और इसके बाद डूसू स्तर पर निरीक्षण करने की बात कही गई। सत्यनिकेतन हादसे का उल्लेख करते हुए यश ने दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े प्रत्येक पीजी, हॉस्टल और कॉलेज का सेफ्टी ऑडिट कराने को प्राथमिकता बताया।
यश के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल बेड की क्षमता बढ़कर 12 हजार से अधिक हो गई है, जबकि पहले यह करीब 5,700 थी। अभाविप की मांग पर 10 हजार अतिरिक्त बेड की अनुमति मिलने का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनका कहना है कि संगठन करीब एक लाख छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग आगे भी उठाता रहेगा। विशेष रूप से दिल्ली से बाहर से आने वाले छात्रों के लिए छात्रावास की कमी को उन्होंने महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
महिला सुरक्षा पर फोकस
सचिव रिया छावड़ी ने पिछले कार्यकाल में विश्वविद्यालय परिसर में एक हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे और पांच पिंक बूथ लगाए जाने का उल्लेख किया। नए कार्यकाल में बिना सीसीटीवी वाले क्षेत्रों में कवरेज बढ़ाने, गर्ल्स कॉलेजों के बाहर पिंक बूथ और पेट्रोलिंग की व्यवस्था करने तथा शाम के समय चलने वाले कॉलेजों में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर देने की बात कही। उन्होंने वामिका वैन की व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
परीक्षा परिणाम, प्लेसमेंट और खेल
संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह ने परीक्षा परिणाम में तीन-चार महीने की देरी को छात्रों की बड़ी समस्या बताया। उनके अनुसार, परिणाम में देरी के कारण दस्तावेज समय पर नहीं मिल पाते, जिससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और अन्य प्रक्रियाओं में परेशानी होती है। उन्होंने करीब 90 कॉलेजों में प्रभावी प्लेसमेंट व्यवस्था की कमी का दावा करते हुए प्रत्येक कॉलेज में प्लेसमेंट सेल की मांग रखी। खेल सुविधाओं को लेकर यश ने विश्वविद्यालय के रग्बी ग्राउंड समेत करीब 50-52 कॉलेजों में खेल ढांचे की स्थिति का मुद्दा उठाया। पहले 100 दिनों में लक्ष्य ने स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है।
केरल और पंजाब में भी जीत

अभाविप ने केरल के कोच्चि स्थित त्रिपुनीथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में सभी 12 सीटों पर जीत हासिल की। संगठन के अनुसार, इस जीत के साथ कॉलेज में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव को चुनौती मिली है। स्निग्धा एम. हरि अध्यक्ष और आदित्य टी.ए. उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में भी अभाविप ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। अंकित बिधान ने यह चुनाव जीता। यह संगठन की लगातार दूसरी जीत बताई गई। इससे पहले पिछले वर्ष गौरववीर सोहेल ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी।
मेट्रो कंसेशन पास की पहल
छात्रों के लिए मेट्रो कंसेशन पास की मांग को लेकर अभाविप ने एक समिति गठित की है। यह समिति उन राज्यों का अध्ययन कर रही है, जहां छात्रों को मेट्रो यात्रा में छूट मिलती है। अध्ययन के बाद सरकार के सामने प्रस्ताव रखा जाएगा। लक्ष्य के अनुसार, ऐसी सुविधा का लाभ केवल दिल्ली विश्वविद्यालय ही नहीं, बल्कि अन्य शिक्षण संस्थानों के छात्रों को भी मिल सकता है।
जेन-जी और जातीय समीकरण पर जवाब
जेन-जी को लेकर यश ने अभाविप से अलग विमर्श खड़ा करने की कोशिशों को राजनीतिक प्रचार बताया। उनका कहना था कि अभाविप के कार्यकर्ता भी इसी पीढ़ी का हिस्सा हैं और संगठन सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीन पर भी सक्रिय रहता है। एनएसयूआई और अन्य छात्र संगठनों के संदर्भ में उन्होंने सालभर छात्रों के बीच काम करने और रिपोर्ट कार्ड जारी करने की बात कही। जातीय समीकरणों के आरोपों पर यश ने कहा कि संगठन में टिकट का आधार जाति नहीं, बल्कि कार्यकर्ता की तैयारी और छात्र हित में उसका काम है।
खर्च और गाड़ियों पर सफाई
चुनावी खर्च और महंगी गाड़ियों के सवाल पर लक्ष्य ने कहा कि वर्षों से जुड़े समर्थकों ने अपने स्तर पर आर्थिक सहयोग और वाहन उपलब्ध कराए। यश ने भी समर्थकों की गाड़ियों का उल्लेख करते हुए इसे लंबे समय से बने संपर्कों का परिणाम बताया। उनका कहना था कि उम्मीदवारों ने पैसे के दम पर नहीं, बल्कि छात्रों के बीच बने संपर्क और विश्वास के आधार पर चुनाव लड़ा। यश ने अपने व्यक्तिगत खर्च को करीब 5,000 रुपये बताते हुए लिंगदोह समिति की निर्धारित सीमा का उल्लेख किया।
100 दिन का एजेंडा
पहले 100 दिनों में यश की प्राथमिकता सेफ्टी ऑडिट, लक्ष्य की प्राथमिकता खेल ढांचा और रिया की प्राथमिकता पूरे साल छात्रों के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करना है। चुनावी जीत ने अभाविप को डूसू में मजबूत स्थिति दी है, लेकिन अब असली कसौटी काम के स्तर पर होगी। छात्रों के सामने किए गए वादों को कितना और कितनी तेजी से पूरा किया जाता है, यही आने वाले कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।

















